वसुंधरा के साथ 45 एमएलए थे, तो फिर 4 विधायक ही गायब क्यों हुए?

जयपुर। राजस्थान में पिछले दिनों लगातार एक महीने तक मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और पूर्व उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट के बीच चली लंबी खींचतान के दौरान जब पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष वसुंधरा राजे के द्वारा उनके गुट से माने जाने वाले 45 विधायकों के साथ अशोक गहलोत सरकार को समर्थन दिए जाने का दावा किया जा रहा था, लेकिन जिस दिन अशोक गहलोत की सरकार ने विश्वासमत हासिल करने के लिए विधानसभा में प्रस्ताव पेश किया, उस दिन भाजपा की केवल चार विधायक ही सदन की कार्यवाही से बाहर रहे।

ऐसे में सवाल यह खड़ा हो रहा है कि जो वसुंधरा राजे और उनके प्रचारक लगातार वसुंधरा राजे के साथ भाजपा के 2 विधायकों में से 45 से लेकर 50 विधायक होने का दावा कर रहे थे। आखिर ऐसा क्या कारण रहा कि वसुंधरा राजे के खेमे से माने जाने वाले केवल चार विधायक ही पार्टी के साथ जारी करने के बावजूद उपस्थित नहीं हुए?

हालांकि इस मामले को लेकर भाजपा के अध्यक्ष डॉ सतीश पूनिया का कहना है कि सभी विधायकों के बारे में उनको जानकारी थी और उनसे फोन पर बात हो रही थी, कि किन्हीं विशेष कारणों की वजह से विधायक उनको पूछ ही बाहर निकले थे, पार्टी में किसी तरह की खेमेबाजी या फिर गुटबाजी का कोई भी कारण नहीं है।

गौरतलब है कि लगातार भाजपा में भी वसुंधरा राजे के द्वारा गुटबाजी किए जाने की बातें सामने आ रही थी, लेकिन इन सभी अफवाहों का खंडन करते हुए भाजपा अध्यक्ष ने स्पष्ट तौर पर कहा है कि भाजपा में किसी तरह की भी गुटबाजी नहीं है और पूरी भारतीय जनता पार्टी की प्रदेश इकाई एक साथ है, खुद पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे भी पार्टी के साथ पूरी निष्ठा के साथ खड़ी हुई हैं और इस तरह की झूठी अफवाह फैलाने का काम कांग्रेस पार्टी और मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के द्वारा किया जाता है।

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अध्यक्ष के द्वारा तमाम तरह की सफाई देने के बावजूद राजनीतिक हलकों में चर्चा यह है कि क्या राजस्थान से वसुंधरा राजे का प्रभाव कम हो रहा है, क्योंकि उनके बताए जा रहे 45 विधायकों में से केवल 4 विधायकों के गायब होने की जानकारी सामने आ रही है।

इतना ही नहीं, अपितु शुक्रवार को विधानसभा से बाहर निकलते समय निकलते हुए वसुंधरा राजे ने जब पत्रकारों से बात की तब भी उनके चेहरे पर मायूसी और एक तरह से थकानभरा अभाव दिख रहा था।

इससे साबित होता है कि वसुंधरा राजे के तमाम समर्थकों के द्वारा किए गए प्रचार-प्रसार के बावजूद भाजपा में टूट-फूट नहीं हुई और संभवत यही कारण है कि वसुंधरा राजे इतनी खुश नजर नहीं आ रही थीं, जितनी होनी चाहिए।