वसुंधरा की नकेल कसने के लिए केंद्रीय नेतृत्व के साथ कदमताल करेगा प्रदेश नेतृत्व!

जयपुर। 

पिछले 1 महीने से मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और पूर्व उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट के बीच चल रही राजनीतिक अदावत को लेकर जहां कांग्रेस पार्टी दो खेमों में में बंटी हुई नजर आ रही है, तो दूसरी तरफ इसी दौरान भारतीय जनता पार्टी में भी वसुंधरा राजे की नाराजगी को लेकर उठा तूफान थमने के बजाय अब केंद्रीय नेतृत्व के द्वारा उसका अंत किए जाने की चर्चा शुरू हो चुकी है।

गुरुवार को राजस्थान भारतीय जनता पार्टी विधायक दल की बैठक होने जा रही है। विधानसभा सत्र 14 अगस्त से शुरू होने जा रहा है, उससे पहले यह बैठक काफी महत्वपूर्ण है, क्योंकि इस बैठक में केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर को प्रदेश नेतृत्व के द्वारा आमंत्रित किया गया है।

उनके साथ भाजपा के वरिष्ठ नेता वी मुरलीधरन और राष्ट्रीय सह संगठन मंत्री वी सतीश के अलावा प्रदेश प्रभारी अविनाश राय खन्ना विधायक दल की बैठक के दौरान होने वाली सेमिनार को संबोधित करेंगे। इन सारे नामों में केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर का नाम काफी चर्चा में है माना जा रहा है कि जिस तरह से केंद्र की तरफ से कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर को राजस्थान विधानसभा सत्र से पहले विधायक दल की बैठक को संबोधित करने के लिए भेजा गया है, उसको लेकर काफी कयास लगाए जा रहे हैं।

लेकिन सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि पिछले दिनों जब भाजपा के विधायकों को भाजपा प्रदेश नेतृत्व के मुखिया डॉ. सतीश पूनियां के द्वारा गुजरात में भेजा गया और उसी दौरान झालावाड़-कोटा के कुछ विधायकों द्वारा पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे की अनुमति के बिना संभवत भोपाल में भेजे जाने से इनकार किया गया। उसके बाद यह चीज निकल कर सामने आई थी प्रदेश भाजपा के 72 विधायकों में से करीब एक दर्जन विधायक ऐसे थे, जो वसुंधरा राजे के इशारे पर चलने वाले थे।

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भाजपा सूत्रों का कहना है कि इन सभी एक दर्जन विधायकों के नाम भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व को भी भेजे जा चुके हैं और उन पर संभव है निकट भविष्य में कोई कार्रवाई भी की जा सकती है। सूत्रों का यह भी कहना है कि हालांकि वसुंधरा राजे के खास लोगों के द्वारा मीडिया में प्रचारित किया गया कि 45 विधायक वसुंधरा राजे के साथ हैं, लेकिन हकीकत में जब प्रदेश भाजपा नेतृत्व की तरफ से इस बात की पड़ताल की गई तो केवल 11 नाम निकल कर सामने आए जो वसुंधरा राजे के इशारे पर काम करने के लिए तैयार हैं।

इन सभी लोगों के नाम के साथ वास्तविक वस्तुस्थिति की जानकारी देते हुए प्रदेश नेतृत्व के मुखिया डॉ. सतीश पूनियां के साथ ही विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया, उप नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र सिंह राठौड़ और प्रदेश संगठन मंत्री महामंत्री चंद्रशेखर के द्वारा एक रिपोर्ट तैयार कर केंद्रीय नेतृत्व को भेजी जा चुकी है।

एक तरफ जहां पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष वसुंधरा राजे के खास लोगों के द्वारा सोशल मीडिया और उनके चाहने वाले मीडिया के द्वारा प्रसारित किया गया कि वर्तमान भाजपा विधायकों में से अधिकांश वसुंधरा राजे के साथ हैं, वही जब भाजपा के अपने स्तर पर इस बात की पड़ताल की गई तो सामने आया कि एक दर्जन से भी कम विधायक वसुंधरा राजे के पक्ष में खड़े हो सकते हैं अथवा कभी वसुंधरा राजे के कहने पर भाजपा से बगावत कर सकते हैं।

अब देखना ने केवल दिलचस्प होगा, बल्कि विधानसभा सत्र से पहले भाजपा की तमाम गतिविधियों को देखकर इस बात का भी सहज रूप में अंदाजा लगाया जा सकता है कि भाजपा में प्रदेश नेतृत्व के द्वारा किस तरह से तैयारी की गई है और वसुंधरा राजे के गुट के द्वारा पिछले दिनों जो खबरें प्रसारित की गई, उनमें कितनी सच्चाई है।

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यदि वसुंधरा राजे के कहने से माने जाने वाले 45 विधायकों ने भाजपा की विधायक दल की बैठक में सम्मिलित होने में आनाकानी की या फिर किसी अन्य गतिविधि में सम्मिलित होने का प्रयास किया तो यह माना जाएगा कि प्रदेश नेतृत्व कमजोर है और यदि भाजपा के तमाम विधायक एक साथ एकता के साथ नजर आए तो यह माना जाएगा कि प्रदेश नेतृत्व पूरी तरह से सक्षम है और संगठन को चलाने के लिए वर्तमान नेताओं में सबसे बेहतर विकल्प में से एक है।