पॉलिटिकल ड्रामे के बाद अब सरकार करे जनता के काम

जयपुर। भाजपा प्रदेशाध्यक्ष डॉ. सतीश पूनिया ने कहा है कि 31 दिन चले पॉलिटिकल ड्रामे के बाद अब सरकार को जनता के दुख-दर्द दूर करने के लिए काम मे जुट जाना चाहिए।

इस पॉलिटिकल ड्रामे को पूरे देश ने देखा, लेकिन हम पहले से ही कह रहे थे कि यह कांग्रेस का अपने घर का झगड़ा है। इस ड्रामे से प्रदेश की जनता को सिर्फ परेशान होना पड़ा है।


भाजपा प्रदेश कार्यालय में संवाददाताओं को सम्बोधित करते हुए पूनिया ने कहा कि इस ड्रामे से एक अच्छा काम यही हुआ है कि सोए हुए भाई-बहन (राहुल-प्रियंका) की जोड़ी अब जाग गई और अपनी पार्टी की सुध ली, नहीं तो बेचारी कांग्रेस इधर से उधर भागती रहती, उसकी सुध लेने वाला कोई नहीं था।


पूनिया ने कहा कि हकीकत में मख्यमंत्री अशोक गहलोत को फेयरमाउंट होटल और सूर्यगढ में विधायकों पर खर्च का हिसाब प्रदेश की जनता को बता देना चाहिए। अब सरकार को जनता के काम करने में जुट जाना चाहिए।

सबसे पहले किसानों की कर्ज माफी का वादा पूरा करना चाहिए। जनता के तीन महीनों के बिजली के बिल माफ करने चाहिए। प्रदेश में बढ़ रहे अपराध पर लगाम लगानी चाहिए। युवाओं को बेरोजगारी भत्ता देना चाहिए और प्रदेश के विकास पर ध्यान देना चाहिए।


पूनिया ने कहा कि इस सियासी घटनाक्रम में बहुत सी चीजें उजागर हुई है, जिनका जिक्र हमने शुरू में किया था। कांग्रेस में दो फाड़ होने के कई कारण है, जिनमें मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का शुरूआत से ही तानाशाही रवैये वाली कार्यशैली के साथ स्पीकर द्वारा विधायकों को नोटिस, विधायकों पर राजद्रोह की धारा लगाना सरकार की नीयत पर सवालिया निशान लगा रही है।

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उन्होंने चुटकी लेते हुए कहा कि जिस तरह से गहलोत यू-टर्न लेते हैं, उसी तरह राहुल गांधी भी लेते हैं। मेरी सलाह है कि राहुल को यू-टर्न चैनल शुरू कर देना चाहिए। इस पूरे मामले में कांग्रेस आलाकमान की कमजोरी उजागर हुई है।

गहलोत की सरकार ने इतने दिनों तक क्या किया, इसका लेखा-जोखा प्रदेश की जनता को देना पड़ेगा। कांग्रेस का असली चरित्र जनता के सामने आ चुका है। मुझे नहीं लगता है कि कांग्रेस के नेता राजस्थान को मजबूत और ईमानदार सरकार दे पाएंगे।

गहलोत ने नायक बनने की कोशिश की थी, लेकिन अमर्यादित भाषा और तानाशाही कार्यशैली से राजस्थान की छवि को तार-तार किया है। इसलिए गहलोत को नैतिकता के आधार पर अपनी कुर्सी छोड़ देनी चाहिए।