जातीय-वर्गीय आधार पर विधायकों को ‘डिफेम’ करने की सरकारी साजिश नाकाम हुई

जयपुर। राजस्थान की राजनीति में शुक्रवार और शनिवार को बड़ा भूचाल आया। एक तरफ जहां भारतीय जनता पार्टी के द्वारा सत्तारूढ़ पार्टी कांग्रेस के विधायकों को तोड़ने और खरीद-फरोख्त करने की साजिशों के आरोप लग रहे थे।

वहीं शनिवार को इस बात का खुलासा हुआ कि राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत खुद पुलिस प्रशासन के माध्यम से भाजपा के एससी-एसटी वर्ग से सम्बंधित विधायकों को टारगेट-ट्रेस करके ‘डिफेम’ करने का काम कर रहे थे।

इस सिलसिले में प्रदेश की आईपीएस अधिकारियों की लॉबी के 5 अधिकारियों का नाम सामने आया है, जो कि अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वर्ग से संबंध रखते हैं।

जानकारी के अनुसार भाजपा के करीब 20 विधायकों को गुजरात सरकार की सुरक्षा में पोरबंदर के किसी सुरक्षित रिजॉर्ट में भेज दिया गया है।

इनमें जसीराम कोली, समाराम गरासिया, धर्मनारायण जोशी, बाबूलाल खराड़ी, फूलसिंह मीणा, गौतम लाल मीणा, अमृतलाल मीणा, गोपीचंद मीणा, कैलाश मीणा, हरेंद्र निनामा, नारायण सिंह देवल, शोभा चौहान, निर्मल कुमावत, धर्मेंद्र मौची, झाबर सिंह सांखला, गौपाल खंडेलवाल, गुरदीप सिंह सहापिणी गुजरात गए हैं।

भाजपा डॉ. सतीश पूनियां ने भी इस बात को परोक्ष रूप से स्वीकार किया है कि पार्टी के विधायकों में खरीद-फरोख्त जैसी बात का कोई डर नहीं है, किन्तु यह बात सही है कि सरकार अपनी ताकत का दुरुपयोग कर विधायकों पर दबाव बनाने का कार्य किया जा रहा था।

पुलिस सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार एक दर्जन आईपीएस ऑफिसर, आरपीएस ऑफिसर और यहां तक कि मौका पड़ने पर थानेदारों को भाजपा की कमजोर कड़ी के रूप में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के सम्बंधित विधायकों को टारगेट करने के ऊपरी निर्देश थे, यहां तक कि कई जनप्रतिनिधियों को फोन कर ट्रेसिंग की प्रक्रिया में ले लिया गया था।

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ऐसी स्थिति में भाजपा के द्वारा अपने विधायकों को आनन-फानन में गुजरात शिफ्ट करने का फैसला किया गया। जिन विधायकों को टारगेट किया गया था, उनमें उदयपुर, बांसवाड़ा, डूंगरपुर, भीलवाड़ा, कोटा, प्रतापगढ़, सिरोही की उन विधानसभा क्षेत्र के जनप्रतिनिधि हैं, जो एससी-एसटी वर्ग से सम्बंध रखते हैं, आर्थिक रूप से कमजोर हैं, और इसी तरह से जिन विधायकों या उनके परिजनों, रिश्तेदारों के खिलाफ पुलिस केस दर्ज हैं और इस नाते उनको आसानी से दबाव में लिया जा सकता है।

ऐसे विधायकों को प्रेशर में लेने के लिए पिछले एक सप्ताह से सरकारी स्तर पर प्रयास चल रहे थे। इसके साथ ही सूत्रों ने दावा किया है कि जिस तरह से पिछले कुछ समय से जैसे कांग्रेस नेताओं और सरकार के मंत्रियों ने भाजपा की नेता और पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के पक्ष में बयान देकर भाजपा को दो फाड़ बताने का प्रयास किया गया।

इसी प्रकार के हथकंडों के सहारे भाजपा के इन कमजोर कड़ी के विधायकों को कई अन्य प्रलोभन देने का भी जबरदस्त प्रयास हुआ।

पुलिस विभाग के कुछ लोगों का तो यहां तक कहना है कि भाजपा विधायकों को गहलोत-वसुंधरा संबंधों का हवाला देकर भी सरकार के पक्ष में राजी किया जा रहा था।

लक्ष्य पर लगे आईपीएस अधिकारियों द्वारा अपने-अपने हिसाब विधायकों की सूची लेकर उनको ट्रेस करने का काम एक सप्ताह से चल रहा था।

शिफ्ट किये गए विधायकों से जानकारी में यह भी आया है कि, इसकी जानकारी खुद भाजपा अध्यक्ष डॉ. सतीश पूनियां को थी, और डॉ. पूनियां इस घटनाक्रम को लेकर अपने दल के विधायकों के सम्पर्क में थे, व उनको लगातार निर्देशित भी कर रहे थे।

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मजेदार बात यह है कि जहां आईपीएस अधिकारी भाजपा विधायकों को ट्रेस शीशे में उतारने की तरफ बढ़ रहे थे, वहीं पल-पल की जानकारी से रूबरू डॉ. पूनियां ने उस वक्त एक्शन लिया, जब उनको लगने लगा कि अब सरकार भाजपा विधायकों को ज्यादा दबाव में लेने लगी थी।

यह भी जानकारी में आया है कि जहां अशोक गहलोत के अधिकारी भाजपा विधायकों को ‘सरकारी दबाव’ में लेने की व्यूहरचना को अमलीजामा पहनाने के करीब थे, तब डॉ. पूनियां ने सारी ‘आईपीएस अधिकारी योजना’ फ्लॉप कर भाजपा के ट्रेस किये जा रहे 20 से ज्यादा विधायकों को गुजरात सरकार की मेहमाननवाजी में पहुंचा दिया और अशोक गहलोत सरकार की सारी योजना फ्लॉप साबित हो गई।