कोरोनाकाल में दलीय गैरमौजूदगी से गुस्साए भाजपा नेतृत्व ने वसुंधरा राजे को दिल्ली तलब किया

-वर्तमान नेतृत्व के साथ तालमेल बिठाने और राज्य में पार्टी को मजबूती प्रदान करने के बारे में चर्चा की संभावना

जयपुर। राजस्थान में जब से भारतीय जनता पार्टी के वर्तमान नेतृत्व, यानी डॉ. सतीश पूनियां को पार्टी की कमान सौंपी गई है, तब से लेकर पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे की भारतीय जनता पार्टी मुख्यालय समेत तमाम दलीय गतिविधियों में शामिल नहीं होने से गुस्साए केंद्रीय नेतृत्व में उन को दिल्ली तलब किया है।

सितंबर 2019 में डॉ. पूनियां को अध्यक्ष बनाने से नाराज बताई जा रहीं वसुंधरा राजे लगभग निष्क्रिय रहीं, इस साल पर मार्च के बाद तो राजस्थान से लगभग गायब ही रही हैं।

कोरोनाकाल में उन्होंने अधिकांश समय दिल्ली और धौलपुर में अपने घर में खुद को अघोषित “क्वारन्टीन” कर लिया था, और अब राजस्थान के सियासी संकट के समय उनकी चुप्पी भी भाजपा के बजाए कांग्रेस सरकार को फायदा पहुंचाने का काम कर रही है, इसको लेकर चर्चाओं का बाज़ार भी वसुंधरा राजे की अगली भूमिका को दृष्टिगत करता है।

भाजपा दिल्ली नेतृत्व के द्वारा फोन करके वसुंधरा राजे को दिल्ली बुलाया है। दिल्ली भाजपा सूत्रों के द्वारा कहा जा रहा है कि लंबे समय से भाजपा की गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी नहीं निभाए जाने के कारण केंद्रीय नेतृत्व राजे से खासा नाराज है और अब उनसे संभवतः आखरी बार यह पूछना चाहता है कि उनका मन वर्तमान नेतृत्व के साथ राजस्थान की राजनीति में सक्रिय रहने का है या फिर केंद्र की राजनीति में उनको कोई सक्रिय भूमिका दी जाए?

इससे पहले, जबकि राजस्थान सरकार पर सियासी संकट आया हुआ है और लगातार भारतीय जनता पार्टी के घटक दल, राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के मुखिया और नागौर के सांसद हनुमान बेनीवाल के द्वारा वसुंधरा राजे पर राज्य के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की सरकार बचाने के आरोप लगाए गए हैं, ऐसे समय में भाजपा नेतृत्व द्वारा वसुंधरा राजे को बुलाया जाना काफी महत्वपूर्ण बताया जा रहा है।

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सूत्रों द्वारा दावा किया जा रहा है कि दिसंबर 2018 में राजस्थान से भाजपा की सत्ता हाथ से निकलने के बाद वसुंधरा राजे को भारत के गृहमंत्री और तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के द्वारा समय नहीं दिया गया, तब करीब एक साल के इंतजार के बाद वसुंधरा राजे ने हमेशा से मिलने के प्रयास छोड़ दिये।

इसके बाद जहां एक तरफ राजस्थान में उनके धुर विरोधी माने जाने वाले आमेर विधानसभा क्षेत्र से विधायक डॉ. सतीश पूनियां को पिछले साल सितंबर में भाजपा की कमान सौंपी गई और वसुंधरा राजे के तमाम प्रयासों के बावजूद डॉ. पूनियां को दिसंबर के आखिरी सप्ताह में निर्वाचित अध्यक्ष के रूप में कार्यभार सौंपा गया, तब से लेकर अब तक वसुंधरा राजे एक तरह से भाजपा के साथ निष्क्रिय व्यवहार कर रही हैं और कोप भवन में होने जैसी गतिविधियों को अंजाम दे रही हैं।

सूत्रों का दावा है कि राजस्थान भाजपा के प्रदेश नेतृत्व, तमाम सांसदों और अधिकांश विधायकों की भाजपा केंद्रीय नेतृत्व के द्वारा जो रिपोर्ट मांगी गई, उसमें वसुंधरा राजे को भाजपा के साथ कम और विपक्षी पार्टी के सत्ताधारी मुखिया अशोक गहलोत को अधिक समर्थन दिए जाने की तरफ इंगित किया गया है।

इसके बाद भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा के द्वारा उनको फोन करके दिल्ली बुलाया गया है।

सूत्रों का दावा है कि वसुंधरा राजे से राजस्थान की दलीय राजनीति में अध्यक्ष डॉ. सतीश पूनियां के नेतृत्व में काम करने के लिए दिशा-निर्देश दिए जाने की संभावना है, और यदि वसुंधरा राजे इसके लिए तैयार नहीं होती हैं तो फिर उनको राजस्थान से बाहर किसी दूसरे राज्य की जिम्मेदारी या फिर केंद्रीय नेतृत्व के अंतर्गत कार्य करने के लिए निर्देशित किया जा सकता है।

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ऐसा पहली बार हुआ है, कि साल 2003 के बाद वसुंधरा राजे को भाजपा केंद्रीय नेतृत्व गुस्सा होने के बाद तलब कर रहा है। इससे पहले कभी भी वसुंधरा राजे राजनीतिक तौर पर इतनी कमजोर नजर नहीं आई हैं।

इसमें यह भी संदेश माना जा रहा है कि राजस्थान में जिस तरह से संगठनात्मक गतिविधियां बदल रही हैं, और तमाम तरह की राजनीतिक क्रियाओं पर प्रदेश अध्यक्ष डॉ. सतीश पूनियां का नियंत्रण स्थापित होता जा रहा है, वह संगठन की दृष्टि से तो बेहतर है ही, इसके साथ ही राज्य में वसुंधरा राजे की सियासी भूमिका को भी धीरे-धीरे पूरी तरह से समाप्त करने के रूप में देखा जा रहा है।

दिल्ली भाजपा के सूत्रों का यह भी कहना है कि वसुंधरा राजे को लेकर एक तरफ जहां पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष और वर्तमान गृहमंत्री अमित शाह पूरी तरह से नकारात्मक रुख अपनाए हुए हैं, तो दूसरी तरफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वसुंधरा राजे को राजनीतिक तौर पर लगभग भुला चुके हैं।

सूत्रों के द्वारा ऐसा भी कहा जा रहा है कि दोनों बड़े नेताओं के दिशा-निर्देश के बाद राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा भी वसुंधरा राजे से आखरी बार राजनीति को लेकर गंभीर चर्चा करने जा रहे हैं।

ऐसे में इस चर्चा का जो भी नतीजा होगा, उसके बाद राजस्थान की राजनीति में वसुंधरा राजे की भविष्य की भूमिका को लेकर काफी कुछ स्पष्ट करेगा। इतना ही नहीं, अपितु इसके बाद नेतृत्वकर्ता के तौर पर राजस्थान भाजपा का भविष्य भी तय होने की सम्भवना है।