ऐसे पायलट खेमे के विधायकों की सदस्यता भी नहीं जाएगी और गहलोत सरकार भी अपदस्थ हो जाएगी!

राजस्थान में राजनीतिक संग्राम के बीच सचिन पायलट खेमे के विधायकों और मुख्यमंत्री अशोक गहलोत गुट से कांग्रेस आलाकमान के समक्ष एक नया प्रस्ताव भेजा गया है। बताया जा रहा है कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और पूर्व उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट के अलावा बागी विधायकों में से किसी को राज्य का मुख्यमंत्री बनाने के लिए प्रस्ताव भेजा गया है।

कांग्रेस के जानकार सूत्रों का दावा है कि करीब 20 दिन से राजस्थान में जिस तरह राजनीतिक ड्रामेबाजी चल रही है और मुख्यमंत्री अशोक गहलोत व पूर्व उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट की तरफ से मुख्यमंत्री पद पर दावेदारी को लेकर अपने अपने तर्क किए जा रहे हैं उसे कांग्रेस आलाकमान असमंजस में है।

इसके चलते अशोक गहलोत गुट की तरफ से और सचिन पायलट खेलने की तरफ से कांग्रेस आलाकमान को एक नया फार्मूला ईजाद करके उस पर सहमति जताने के लिए प्रस्ताव भेजा गया है।

इस प्रस्ताव में जहां सचिन पायलट खेमे की तरफ से वयोवृद्ध विधायक और पूर्व राजस्व मंत्री हेमाराम चौधरी को मुख्यमंत्री बनाने और इसके साथ ही प्रदेश के पीसीसी अध्यक्ष की कमान अशोक गहलोत के गुट में से किसी विधायक को सौंपे जाने की बात कही गई है।

दूसरी तरफ मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा के संयुक्त प्रस्ताव में पार्टी में मौजूद वर्तमान मंत्रियों बीडी कल्ला, रघु शर्मा जैसे किसी नाम के साथ ही अलवर के पूर्व सांसद भंवर जितेंद्र सिंह को मुख्यमंत्री बनाने पर सहमति का प्रस्ताव दिया गया है।

इस बीच अगर 14 अगस्त से शुरू होने वाले विधानसभा सत्र के दौरान कांग्रेस के सचिन पायलट समेत 22 विधायकों की उपस्थिति नहीं होती है और सरकार की तरफ से व्हिप जारी किया जाता है तो उनकी सदस्यता जाने लगभग तय है।

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हालांकि उससे पहले 11 अगस्त को राजस्थान हाईकोर्ट में बहुजन समाज पार्टी के विधायकों की विधानसभा सदस्यता रद्द किए जाने कि भाजपा और बसपा की संयुक्त याचिका पर सुनवाई होगी, जिसमें यदि कोर्ट की तरफ से उनकी वोटिंग का अधिकार पर स्टे किया जाता है तो सरकार अल्पमत में आ जाएगी।

इतना ही नहीं राजस्थान में जिस तरह से कोरोनावायरस के मरीजों की संख्या बढ़ रही है, उससे यह भी कयास बाजी लगाई जा रही है कि राज्य के विधायकों में यदि कोरोनावायरस फैलता है और 14 अगस्त से होने वाले विधानसभा सत्र के दौरान उनकी उपस्थिति को लेकर विधानसभा स्पीकर को फैसला लेना पड़ा तो सरकार के लिए एक बार फिर से परीक्षा की घड़ी आनी तय है।

गौरतलब है कि सचिन पायलट समेत उनके खेमे में बैठे विधायकों की विधायकी को लेकर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और मौजूदा कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा के द्वारा अयोग्य किए जाने की अटकलों के बीच कांग्रेस विधायकों में कोरोनावायरस की घुसपैठ होने से भी इंकार नहीं किया जा सकता है।

ऐसे में राजस्थान कांग्रेस जिसमें अशोक गहलोत खेमा और सचिन पायलट गुट के अलावा भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी अथवा बीटीपी या मार्क्सवादी पार्टी या फिर निर्दलीय विधायकों में से किसी को भी कोरोनावायरस पॉजिटिव पाया जाता है, तो विधानसभा सत्र संचालित होना लगभग असंभव हो जाएगा।

ऐसी स्थिति में यदि सचिन पायलट के साथ मानेसर गुरुग्राम या दिल्ली में बैठे हुए कांग्रेस और निर्दलीय विधायकों में से किसी को कोरोनावायरस पॉजिटिव पाया जाता है और राज्य सरकार की तरफ से भी व्हिप जारी किया जाता है, फिर भी उनकी विधायकी पर कोई संकट नहीं आने वाला है।

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