भारत और भारतीयता पर आधारित है नई शिक्षा नीति: देवनानी

  • नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति का स्वागत एवं भारत सरकार का अभिनन्दन
  • पूर्व में शिक्षा मंत्री के नाते उनके सुझावों को भी किया गया शामिल
  • मोदी सरकार का शिक्षा के क्षेत्र में क्रांतिकारी कदम
  • मानव संसाधन विकास मंत्रालय का नाम हुआ शिक्षा मंत्रालय
  • उच्च शिक्षा अब एक ही रेग्यूलेटरी बोर्ड से नियंत्रित

जयपुर/अजमेर।
पूर्व शिक्षा राज्य मंत्री व विधायक अजमेर उत्तर वासुदेव देवनानी ने भारत सरकार द्वारा मंजूर की गई नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति का स्वागत करते हुए इसके लिए केन्द्र सरकार का अभिनन्दन किया है। उन्होंने कहा कि भारत और भारतीयता पर आधारित नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति लागू करना मोदी सरकार का एक क्रांतिकारी कदम है जो कि सरकार की शिक्षा के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

देवनानी ने कहा कि पिछले लम्बे समय से नई शिक्षा नीति की आवश्यकता महसूस की जा रही थी। इससे पहले 1986 में राष्ट्रीय शिक्षा नीति बनाई गई थी।

तीन दशक से अधिक समय में आए बदलावों को ध्यान में रखते हुए केन्द्र सरकार द्वारा नई शिक्षा नीति तैयार की गई है जिसमें सभी को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने व प्रारम्भिक शिक्षा में सुधार लाने के साथ ही शिक्षा को सर्वसुलभ व सर्वव्यापी बनाने के प्रयास किये गये है जो विद्यार्थी के सुंदर भविष्य के निर्माण में सहायक सिद्ध होंगे।

उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति में मातृभाषा में अध्ययन का अवसर प्राप्त हुआ है जिससे भारतीयता का बोध तो होता ही है साथ ही गर्व की अनुभूति भी होती है। अब पांचवी कक्षा तक विद्यार्थी अपनी मातृभाषा में पढ़ाई कर सकेंगे।

उन्होेंने कहा कि लम्बे समय से मानव संसाधन विकास मंत्रालय का नाम शिक्षा मंत्रालय करने की मांग की जा रही है जिसे नई शिक्षा नीति में स्वीकार कर लिया गया है। यह सरकार का एक अभिनंदनीय कदम है।

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देवनानी ने बताया कि पूर्व में प्रदेश के शिक्षा राज्य मंत्री रहते हुए वे मानव संसाधन विकास मंत्रालय की कई बैठकों में सम्मिलित हुए थे तथा शिक्षा सुधारों को लेकर उनके द्वारा दिये गये सुझावों का भी नई शिक्षा नीति में समावेश किया गया है जिसके लिए उन्होंने शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल का आभार व्यक्त किया।

उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति में देश की भाषा, सभ्यता व संस्कृति को ध्यान में रखे जाने के साथ ही खेल, कला व 21वीं सदी की आवश्यकताओं के अनुसार कई आमूलचूल बदलाव किये गये है।

उन्होने कहा कि नई शिक्षा नीति में ड्राॅपआउट बच्चों को पुनः शिक्षा से जोड़ने व सभी तक शिक्षा की पहुंच सुगम बनाने के विशेष प्रावधान किये गये है। नई शिक्षा नीति से शिक्षा क्षेत्र के कई मुद्दों का समाधान सम्भव हो सकेगा।

युवाओं के लिए उच्च शिक्षा लेना आसान हो सकेगा। नई शिक्षा नीति में सारी उच्च शिक्षा के लिए एक ही रेग्यूलेटरी बाॅडी बनाई जाएगी।

उच्च शिक्षण संस्थाओं द्वारा ली जाने वाली फीस का भी पूरी तरह खुलासा करना होगा जिससे फीस चार्ज करने में पारदर्शिता आएगी।