नोटिस की याचिका खारिज, अब फिर से कोर्ट जाएगी भाजपा

जयपुर। बसपा छोड़कर कांग्रेस में शामिल हुए 6 विधायकों की योग्यता को लेकर भाजपा विधायक मदन दिलावर की ओर से दायर याचिका को विधानसभा अध्यक्ष सीपी जोशी द्वारा याचिका खारिज करने और इसी पर कार्यवाही को लेकर हाई कोर्ट द्वारा अपील खारिज किये जाने को भाजपा फिर से कोर्ट में चुनौती देगी।

प्रदेश भाजपा कार्यालय में विधायक मदन दिलावर ने पत्रकारों से बातचीत में आरोप लगाया है कि विधानसभाध्यक्ष ने एकतरफा कार्रवाई की है, मुझे ना तो सुना गया और ना ही उपस्थित होने के लिए नोटिस दिया गया, इसके बावजूद याचिका को निरस्त कर दिया गया।

दिलावर ने कहा कि मुझे आदेश की कॉपी चाहिए थी, लेकिन एक पेज दिया गया है। यही समझ नहीं आ रहा है कि विस्तृत आदेश की कॉपी क्यों नहीं दी जा रही है।

हाईकोर्ट की ओर से बसपा विधायकों की याचिका को खारिज करने के सवाल पर दिलावर ने बताया कि याचिका को इसलिए खारिज किया गया है कि विधानसभाध्यक्ष ने इस पर सुनवाई कर ली है, हम विधिक राय लेकर दोबारा कोर्ट की शरण में जाएंगे।

बता दें कि दिलावर ने बसपा विधायकों की याचिका पर दिए गए आदेश की कॉपी मांगी थी, जिसे देने में आनाकानी की जा रही थी। हालांकि, मामला बढ़ता देख विधानसभा की ओर से दिलावर को शॉर्ट कॉपी दी गई है।

साथ ही विस्तृत कॉपी शाम तक देने का आश्वासन दिया गया है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष डॉ. सतीश पूनियां ने कहा विधानसभा अध्यक्ष ने जो तत्परता कांग्रेस के इन नाराज लोगों के प्रति दिखाई, वैसी तत्परता बसपा के विधायकों के प्रति नहीं दिखाई तो इसमें थोड़ी शंका लगती है।

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आज एक सामान्य सी बात थी विधायक मदन दिलावर को उनके फैसले की कॉपी देनी थी, इसके लिए भी जद्दोजहद करनी पड़ी।

कल बसपा महासचिव सतीश मिश्रा की ओर से बीएसपी का पत्र जारी हुआ, यह स्पीकर और राज्यपाल को सारगर्भिक तरीके से धरनों का भी हवाला दिया है। इस तरीके के केसेस में कोर्ट ने रिलीफ भी दी हैं।

मोटे तौर पर कहा जाए तो बीएसपी का चुनाव चिन्ह है, उसका सिंबल जारी होता है। बीएसपी का राष्ट्रीय स्तर पर कोई मर्जर नहीं हुआ है, इसलिए विधायकों का मर्जर यह संवैधानिक तौर पर जायज है या नहीं है, इसका फैसला न्यायालय करेगा, क्योंकि ईश्वर खारिज कर चुके, मुझे लगता है इसमें पीटीसन फाइल होने के बाद बहुत सारी चीजें होगी।

एक सवाल के जवाब में डॉ. पूनियां ने कहा कि कांग्रेस का यह सामान्य आरोप है, राजनीति में खरीद-फरोख्त का वो खुद का आरोप खुद पर ही लगा रहे हैं, भाजपा के खिलाफ उनके पास कोई प्रमाण नहीं है।

कांग्रेस अपने घर के झगड़े को भाजपा के माथे मंढ रहे हैं, लेकिन कांग्रेस ने वर्षों तक यह किया और बहुत स्थापित तरीके से किया, किस तरीके से लोकसभा के दौरान विधानसभाओं में उनका आचरण पूरे देश भर में रहा है।

दो बार लूली-लंगड़ी सरकार को मैनेज करके जुगाड़ करके मैंडेट प्राप्त किया। वर्ष 2008 में अशोक गहलोत ने कोई भंडारे में समर्थन लिया? ऐसा भी नहीं है उस दौरान क्या कारण था, क्या डील हुई? इस तरीके से 2018 में में इस तरीके की कई चीजें हुई।

निर्दलीय और छोटे दलों को मैनेजमेंट का उदाहरण साफ दिखता है कि बीपीपी का एक विधायक सरकार को कोसते हुए वीडियो जारी करता है और दूसरे तीसरे दिन आकर उसका इतना बड़ा हृदय परिवर्तन अशोक गहलोत की जादूगरी से तो नहीं हो सकता, कोई ना कोई कारण है तो आज भी कहीं ना कहीं कांग्रेस के इन काले कारनामों से जनता ही पर्दा उठा देगी।

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उन्होंने कहा कि हमारे विधि वेत्ताओं से राय मशवरा लिया जा रहा है, उसके बाद एक नई याचिका दायर की जाएगी। 2008 में एक ही केस में विधानसभा अध्यक्ष ने खारिज की थी, उस समय कोई इंटरेस्टिंग पार्टी नहीं थी, इसमें भी यह लगातार इससे पहले यह विधानसभा अध्यक्ष के यहां पड़ी रही थी, उसका निर्णय उसकी पूरी कॉपी आने के बाद होगा।

अध्यक्ष की मंशा पर क्या कोई सवाल है, इसके जवाब में डॉ. पूनियां ने कहा कि विधानसभा अध्यक्ष को विशेषाधिकार है, इस तरह की याचिकाएं लगती है तो उनको पूरा अधिकार है, वह स्वीकार करें या अस्वीकार।

उन्होंने जो तत्परता कांग्रेस के नाराज विधायकों के खिलाफ दिखाई, उतनी ही तत्परता वह बसपा के विधायकों के प्रति नहीं दिखाई, इस पर कहीं न कहीं शंका लग रही हैं।