प्रदेश को अराजकता में धकेलने के दोषी खुद मुख्यमंत्री और उनकी सरकार है: डॉ. पूनियां

संविधान में, कानून में अनेकों प्रावधान हैं, लेकिन यह कोई अखाड़ा-दंगल नहीं था: डॉ. पूनियां

जयपुर। राजस्थान में जारी राजनीतिक संग्राम के बीच भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का प्रतिनिधिमंडल शनिवार को राजभवन में राज्यपाल कलराज मिश्र से मिला।

इस अवसर पर पत्रकारों से बात करते हुए भाजपा के अध्यक्ष डॉ. सतीश पूनियां ने कहा कि राजस्थान का मशहूर पॉलिटिकल ड्रामा सबके संज्ञान में है, लेकिन कल का दृश्य दुर्भाग्यपूर्ण था, वह देश ने नहीं, पूरी दुनिया ने देखा।

संवैधानिक संस्था का कोई प्रमुख व्यक्ति डोमिनेटेड हेड के खिलाफ यह चेतावनी और चुनौती देता है, “8 करोड़ जनता राजभवन को घेर लेंगे, तो हमारी जिम्मेदारी नहीं होगी”, इस तरह के दुर्भाग्यपूर्ण बयान मुख्यमंत्री और गृहमंत्री के थे और सीधे-सीधे आईपीसी की धारा 124 के अंतर्गत जो वर्णित किया गया है, उस अपराध के दोषी दिखते हैं।

राज्यपाल को, उनके संवैधानिक कर्तव्य के निर्वहन में बाधा पहुंचाना या उनको अनुचित तरीके से दबाव देना कहां तक जायज है? उन्होंने कहा कि राजस्थान की विधानसभा में सदन बुलाने की एक निश्चित संविधानिक प्रक्रिया है, उसको आहूत करने का महामहिम का अधिकार है, ये पहली बार नहीं हुआ।


इनकी सरकार ने जो केंद्र सरकार के द्वारा जारी की गई आपदा प्रबंधन की गाइड लाइन और कानून बना है, उस कानून की धज्जियां उड़ाते हुए इस तरीके से धज्जियां उड़ाते हुए राजस्थान में धरने दिए, गृह मंत्री और मुख्यमंत्री होने के नाते इस तरीके से इनकी नैतिक जिम्मेदारी थी।

हमें इस बात पर एतराज था और हम इस बात पर आज महामहिम भी मिले हैं। प्रदेश में आज अराजकता का दृश्य दिखा, वो संविधान में कानून में अनेक प्रावधान हैं, जिसके जरिए उनका समाधान होता है।

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यह कोई अखाड़ा-दंगल नहीं था, जिस तरीके से राजस्थान की शांति और सुकून को अराजकता पैदा करने के दोषी मुख्यमंत्री और उनकी सरकार है, इसलिए हमने महामहिम को ज्ञापन दिया है।

प्रदेश की कोरोनावायरस की स्थिति कैसे नियंत्रण में हो, इस पर विचार करने की आवश्यकता है, 32 हज़ार से ज्यादा कोरोना मरीज हैं और 600 से ज्यादा की मौत हो गई।

गुलाबचंद कटारिया ने कहा कि विधानसभा का सत्र बुलाने के लिए कैबिनेट राज्यपाल को सुझाव देती है तो वह ठीक है, दुर्भाग्य से उसमें कुछ लिखा हुआ नहीं है, किस लिए हाउस बुलाने की आवश्यकता पड़ी, जिस प्रकार का तरीका अपनाया, वह लोकतंत्र को कलंकित करने वाला था।

मुख्यमंत्री जैसा व्यक्ति राजभवन का घेराव करने के बारे में कहे और उनका सुरक्षा सरकार और पुलिस ने कर सकेगी, सरकार की इस नादानी पर हंसी आती है। इसलिए मैंने कल कहा था राज भवन को सुरक्षा सरकार के भरोसे नहीं छोड़कर सीआरपीएफ को बुलाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि राज्यपाल को अपनी कैबिनेट का निर्णय देकर आ सकते हो, लेकिन उनके ऊपर खड़े रहकर मनवा नहीं सकते हैं। इन्होंने संवैधानिक व्यवस्था को कलंकित करने का प्रयास किया है।

आज जो धरना दिया, वो दल के खिलाफ होता तो ठीक था, किसी पार्टी के खिलाफ होते तो समझ में आता है। मुख्य मुद्दा बनाया विधानसभा का सत्र बुलाया जाए। सत्र बुलाया जाए या नहीं, यह राज्यपाल के उपर है, उन पर इस बात का दबाव बनाना संविधान के खिलाफ है।

संविधान के सब मूल्यों की रक्षा के लिए हम आपको जिम्मेदारी देते हैं। एक सवाल के जवाब में कटारिया ने कहा कि राष्ट्रपति शासन की मांग नहीं की है। बुलाना चाहते हो बुलाओ।

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लेकिन जो नोट दिया है, उसमें एक लाइन नहीं है, बिल का कोई नाम नहीं है, किस काम के लिए बुलाना चाहते हैं, उसका नाम नहीं, दबाव बनाओगे, हाउस बुलाना पड़ेगा, इस तरह सरकार ने किया, तब हम उठे कि यह पराकाष्ठा हो गई, यह संवैधानिक अवहेलना हो गई।

उन्होंने कहा कि सत्र बुलाने के लिए दबाव नहीं कर सकते हो। इस प्रकार की भाषा का प्रयोग करने पर तुरंत त्यागपत्र देना चाहिए मुख्यमंत्री को।

राजेंद्र राठौड़ ने कहा कि जब कोरोनावायरस के रोगी इकाई में थे, तब विधान सभा को स्थगित करते हैं, आज राजस्थान में कोरोना 32 हजार से ज्यादा संक्रमित हो रहे हैं, 600 का आंकड़ा मृत्यु का पार हो रहा है, उस समय विधानसभा के सत्र बुलाने की बात हो रही है।

और आज कौन सी ऐसी स्थिति परिस्थितियां गई, यकायक अपने विधायकों के साथ इस प्रकार का दृश्य पैदा करें, राजभवन संवैधानिक रूप से यह संविधान का मंदिर है, संस्थान के मंदिर को अपवित्र करने का दोष अगर किसी को है तो वो खुद मुख्यमंत्री हैं।

इस प्रकार का अराजकता का वातावरण इस सरकार को है। अंतर्विरोध से घिरी हुई है सरकार, सदन की लड़ाई सड़क पर आ गई है, उनके अंतर्गत से लोगों का ध्यान हट जाए, संवैधानिक संकट पैदा करने की ओर सत्तारूढ़ दल बढ़ रहा है।

कांग्रेस के अंदर की लड़ाई अपने आप सामने आ गई है। सरकार के पास नंबर है तो बाड़ा खोल कर देखें, पंछी उड़ उड़कर किस डाल पर बैठते हैं, सब पता चल जाएगा।