सुप्रीम कोर्ट में मामला लम्बित, सीएम धैर्य धारण करें -डॉ. पूनियां

  • भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनिया का बयान
  • पूनिया बोले, विधानसभा का सत्र नहीं बुलाया जा सकता
  • विधायकों की परेड़ करवाने का सीएम का अधिकार
  • राजभवन घेरने की चेतावनी पर पूनिया ने की निंदा

जयपुर।
भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष डॉ. सतीश पूनियां ने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों के हिसाब से विधानसभा सत्र नहीं बुलाया जा सकता है। प्रदेश में कोरोना का कहर है, विधायकों को नोटिस का मामला अभी सुप्रीम कोर्ट में लम्बित है। ऐसे में मुख्यमंत्री को अभी धैर्य धारण करना चाहिए।

डॉ. पूनियां ने भाजपा प्रदेश कार्यालय में मीडिया से कहा कि हम सीएम की गतिविधयों को देख रहे हैं।अंधा आदमी बता देगा कि कांग्रेस का अंदरूनी झगड़ा है। झगड़ाा नहीं होता तो शायद यह परिस्थिति पैदा नहीं होती।

समस्या का कारण भी वो ही समाधान भी वो ही हैं। पूनिया ने कहा कि राजस्थान के इस प्रकरण से कांग्रेस की युवा पीढी में हलचल हुई है। आगे क्या होगा यह कांग्रेस के अलाकमान को तय करना है।

कभी करा चुकते परेड़ ….


डॉ. पूनियां ने कहा कि गहलोत के पास बहुमत होता तो इस तरह की कभी की परेड करा चुके होते, इतनेे दिन नहीं लगते।

अपनी गलती छुपाने के लिए बीजेपी को आरोपित करना मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की पुरानी आदत है। गहलोत अपने घर को ठीक रखते,सरकार सही चलताते, एकजुटता रखते तो यह नौबत नहीं आती।

सत्र आहूत करने का दबाब बना रहे —

डॉ. पूनियां ने कहा कि राजभवन में विधायकों की परेड़ पॉलिटिकल टेक्टिस है। एक तरीके की दबाव की राजनीति की कोशिश है। धैर्य तो वो खो ही चुके हैं, लेकिन अब राजभवन को इस तरह दबाव में लेकर सत्र आहूत करने का दबाव बना रहे हैं।

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लेकिन राज्यपाल भी बहुत सारी मर्यादाओं में बंधे हुए हैं और ये मामला सुप्रीम कोर्ट के लम्बित है है इस पक्ष की भी व्याख्या होनी है नोटिस की व्याख्या होनी चाहिए।

मुख्यमंत्री चाहते हैं कि उनके विधायक पार्टी से अयोग्य हो जाएं। राजभवन में जाना इस तरह की बातें करना उनकी रणनीति का हिस्सा है।

वाणी से अधीर हो चुके हैं मुख्यमंत्री –


डॉ. पूनियां ने कहा कि राज्यपाल को पत्र देना, विधायकों की परेड करवाना लोकतांत्रिक व्यवस्था है, लेकिन जनता के राजभवन घेरने की निंदा करने योग्य हैं। क्या सरकारें अल्पमत में नहीं आती है,क्या सरकारों को मौका नहीं मिलता ?

मुख्यमंत्री क्या कानून और संविधान से ऊपर हैं। हर व्यक्ति की अपनी अपनी संवैधानिक व कानूनी भूमिका है। मुख्यमंत्री वाणी से अधीर हुए हैं। मुख्यमंत्री को इन सारी परिस्थितियों का धैर्य से मुकाबला करना चाहिए।

मुख्यमंत्री संजीदगी से करते विचार —


एक सवाल के जवाब में डॉ. पूनियां ने कहा कि मुख्यमंत्री को डर तो पहले दिन से ही था। यह उस दिन साबित हो गया था जब विधायकों ने नारे लगाए थे। मुख्यंत्री इतने बड़े नेता हैं, उन्हें बडे दिल और संजीदगी के साथ विचार करना चाहिए। कुर्सी खोने के भय से संतुलन नहीं खोना चाहिए।

नया सीएम भविष्य के गर्भ में—


सचिन पायलट के सीएम बनने के सवाल पर भाजपा प्रदेशाध्यक्ष डॉ. सतीश पूनियां ने कहा कि कौन बनेगा मुख्यमंत्री का सवाल नहीं है। बहुत सारी चीजें हैं जो अभी भविष्य के गर्भ में है। कोई भी बन सकता है,थोड़ा और इंतजार करना चाहिए।