प्रदेश की जनता मंत्रियों-विधायकों को ढूंढ रही है, बाड़े से बाहर कब आएगी सरकार: डॉ. पूनियां

जयपुर। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. सतीश पूनियां ने अशोक गहलोत के द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखे जाने पर पलटवार करते हुए राजस्थान की जनता को 3 पन्नों का एक पत्र लिखा है।

उन्होंने पत्र में कहा है कि पिछले 13 दिन से राजस्थान की सरकार एक बाड़े में बंद है, विधायकों को राज्य की जनता ढूंढ रही है, मुख्यमंत्री की भाषा तो आपने सुना होगा, किस तरह विचलित हुए और आज प्रधानमंत्री को एक पत्र, जो मुख्यमंत्री की तरफ से लिखा गया।

वह स्पष्ट संकेत करता है कि सरकार अल्पमत में है और इसकी बिना वजह तोहमत प्रधानमंत्री, गृहमंत्री और भाजपा पर मंढ रहे हैं, भूल जाते हैं कि नैतिकता की दुहाई देने वाले मुख्यमंत्री आपातकाल उन्हीं की देन थी।

इस देश में 356 का दुरुपयोग 93 बार आपकी सरकार में हुआ, चुनी हुई कई सरकारों को बर्खास्त किया गया। इसी तरह से पिछले दिनों जो घटना कर्नाटक में 2018 में या फिर वर्तमान में महाराष्ट्र में हुई, आपने जनादेश का अपमान करते हुए एक अवसरवादी और अपमानित गठबंधन को अपनाया।

आज आपकी अपनी लड़ाई जब सड़कों पर आई और आपको सत्ता जाती हुई दिखी तो आपने भारतीय जनता पार्टी के नेताओं पर सुनियोजित साजिश करने का काम किया।

मैं आपके पत्र का जवाब जनता के दरबार में भेज रहा हूं, फैसला जनता करेगी, लेकिन हकीकत राजस्थान की जनता जान चुकी है। हमने पूछा बाड़ी से बाहर कब आएगी सरकार?

यह संवैधानिक संकट आप की देन है, आपके पार्टी के अंतर्कलह की देन है, आपके आलाकमान की कमजोरी की देन है।

यह भी पढ़ें :  एक बाराती ने 2 जिलों की पुलिस को कराया तमंचे पर डिस्को

कोरोना के काल में जिस तरह से मामले बढ़ते जा रहे हैं, टिड्डियों का हमला हुआ, अपराधी बेलगाम हो गए और इन सारी परिस्थितियों के बीच में आपने राजनीतिक बाड़ेबंदी का तो इस्तेमाल किया, लेकिन आपने किसान कर्जमाफी का, बिजली के बिलों की माफ करने की बात नहीं की, अपराधियों पर लगाम लगाने की बात नहीं कही, इसलिए जो पत्र आज प्रधानमंत्री को आपने लिखा है, उससे स्पष्ट हो गया है कि आपकी कुर्सी जा रही है, आप विधायकों का विश्वास खो चुके हैं।

इसलिए कृपया करके भारतीय जनता पार्टी को तोहमत नहीं दें। आप में थोड़ा बहुत भी जमीर बचा हो, तो नैतिक रूप से आप राजस्थान की जनता को सेवा के लिए अपने आप को प्रस्तुत करें।

उन विधायकों और मंत्रियों को छोड़ें, ताकि वो कम-से-कम उनके दफ्तरों तक पहुंच जाएं, क्योंकि उनकी क्षेत्र की जनता उनको ढूंढ रही है।

इस तरह के पत्रों के माध्यम से आग राजस्थान की जनता की सहानुभूति नहीं बटोर सकते। अब सबकुछ सामने आ चुका है, इस प्रदेश में संवैधानिक संकट का कारण कोई है तो आप खुद हैं, आपकी पार्टी है।