उपमुख्यमंत्री पायलट के समझौते से गठित चिकित्सा टीम से पोस्टमार्टम कराया भजनलाल का

-सुबह फिर से एसएमएस टीम को बुलाने से भडक़े आंदोलकारी, वापस बैठे धरने पर
टोंक।

जिले के नगरफोर्ट कस्बे में हरभजन हत्याकांड में सोमवार को देवली उनियारा विधायक हरीश चंद्र मीणा व जहाजपुर विधायक गोपीचंद मीणा का आमरण अनशन समाप्त होने के बाद मंगलवार को कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक की हठधर्मिता के चलते फिर से लोगों का गुस्सा फूट पड़ा और एसएमएस जयपुर की बुलाई टीम से पोस्टमार्टम नही कराने पर अड़े गए, मगर उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट के आने के बाद समझौते में गठित चिकित्सा दल से ही उनके हस्तक्षेप के बाद मृतक का पोस्टमार्टम हुआ।

29 मई को परासिया निवासी ट्रैक्टर चालक हरभजन मीणा की उनियारा पुलिस द्वारा की गई हत्या को लेकर 6 दिन तक क्षेत्रीय विधायक हरीश चंद्र मीणा और जहाजपुर विधायक गोपीचंद मीणा के नेतृत्व में पीडि़त परिवार के साथ आंदोलन चल रहा था तथा दोनों विधायक 3 दिन से आमरण अनशन पर बैठे थे।

राजस्थान सरकार के खाद्य मंत्री रमेश मीणा ने सोमवार रात 8 बजे राज्य सरकार द्वारा पीडि़त परिवार की पांच सूत्रीय मांगों को मानने की घोषणा कर दोनों विधायकों का अनशन तुड़वा दिया।

रात 11.30 बजे नगरफोर्ट पुलिस थाने में मृतक के साले खेड़ली निवासी दिनेश मीणा की ओर से उनियारा थाना अधिकारी मनीष चारण, कॉन्स्टेबल भगवान गुर्जर, सांवरा जाट, लखमी गुर्जर, राजेश गुर्जर व रामअवतार जाट के खिलाफ आईपीसी की धारा 147, 302 व धारा 3 (2) (1) अनुसूचित जाति एवं जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज करवाया गया।

प्रकरण की जांच अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सीआईडी सीबी रेंज सेल अजमेर ज्योति स्वरूप शर्मा को सौंपी गई।

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मंगलवार को सुबह समझौते के अनुसार मृतक पोस्टमार्टम गठित तीन डॉक्टरों की टीम से पोस्टमार्टम होना था।

लेकिन जिला कलेक्टर एवं पुलिस अधीक्षक ने अपनी हठधर्मिता दिखाते हुए एसएमएस चिकित्सालय जयपुर से तीन चिकित्सकों की टीम से पोस्टमार्टम के लिए बुला लिया।

जयपुर से आई टीम से पोस्टमार्टम करवाने की बात आंदोलनकारी विधायकों से कही जिससे आंदोलनकारी विधायक भडक़ गए तथा कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक को खरी-खोटी सुनाई।

दोनों विधायकों और एसपी, कलेक्टर के बीच तकरार बढ़ गई थी। विधायक हरीश चंद्र मीणा को फिर से आंदोलन की चेतावनी देने पर मजबूर होना पड़ा और वापस धरने पर बैठ गए।

करीब 4.00 बजे मौके की नजाकत को देखते हुए उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट को नगर फोर्ट आना पड़ा तथा एसपी व कलेक्टर को मृतक का पोस्टमार्टम करवाने में अपनाई जा रही हठधर्मिता को लेकर खूब खरी-खोटी सुनाई।

इसके बाद उपमुख्यमंत्री पायलट के हस्तक्षेप के बाद मृतक का पोस्टमार्टम जयपुर से आए चिकित्सकों की टीम से नहीं करवा कर खाद्य मंत्री के साथ हुए समझौते में गठित चिकित्सा दल से करवाने पर सहमति बनी और मृतक हरभजन का पोस्टमार्टम करवाया।

सरकार गोली लाठी दम पर कुचलना चाहती है …

जिला कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक की हठधर्मिता से गुस्साए विधायक हरीश चंद्र मीणा ने कहा कि सरकार प्रशासन के माध्यम से लाठी गोली के दम पर मृतक का पोस्टमार्टम करवाना चाहती है और अपराधियों को बचाना चाहती है हम गोली और लाठी के दम पर डरने वाले नहीं हैं।

एक हत्या को छुपाने के लिए, एक हत्यारे को बचाने के लिए, कितनी ताकत है सरकार में, यह सरकार हत्यारों की है। अपराधियों की है।

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उन्होंने मुख्यमंत्री गहलोत पर भी निशाना साधते हुए कहा कि गहलोत गांधीवाद की बात करते हैं, कहां गई आपकी वह गांधीगिरी, कहां गया वह आपका गांधीवाद तरीका, अरे कुछ तो न्याय करो, इंसान से नहीं भगवान से तो डरो,वहां तो जाना है।

ऐसी क्या मजबूरी है सरकार की, एक हत्यारे अधिकारी को बचाने के लिए पूरी राजस्थान की जनता के साथ अन्याय कर रहे हो। ऐसी क्या मजबूरी है। ऐसा क्या खा लिया। ऐसा क्या दे दिया। यह बात मंगलवार को विधायक हरीश चंद्र मीणा ने कही।

मंगलवार को यह नेता आए धरना स्थल पर निवाई पीपलू विधायक प्रशांत बैरवा, पूर्व विधायक टोडाभीम घनश्याम महर, विधायक मुरारी लाल मीणा, पूर्व जिला प्रमुख रामविलास चौधरी, जिला अध्यक्ष लक्ष्मण गाता, कांग्रेस प्रदेश कमेटी सचिव कंचन मीणा, विधि मानवाधिकार आईटी सेल जिला अध्यक्ष अनुराग गौतम, पूर्व प्रधान जगदीश चौधरी, जिला कांग्रेस कमेटी उपाध्यक्ष देवकरण गुर्जर, विक्रम सिंह गुर्जर, सुभाष मिश्रा सहित सैकड़ों नेता उपस्थित थे।