वसुंधरा राजे की चुप्पी से अशोक गहलोत सरकार को हो रहा है फायदा

जयपुर। राजस्थान में भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस के बीच सिर फुटव्वल चल रहा है। प्रदेश की कांग्रेस सरकार अल्पमत में बताई जा रही है, जबकि कांग्रेस के ही विधायक सचिन पायलट समेत 19 एमएलए राजस्थान से बाहर हैं।

भारतीय जनता पार्टी कांग्रेस नेता और प्रदेश के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के हर सवाल का मुंहतोड़ जवाब दे रही है।

कांग्रेस पार्टी के नवनियुक्त प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा से लेकर बसपा छोड़कर कांग्रेस में आए छह विधायक प्रेस कॉन्फ्रेंस करके अपनी सरकार का बार-बार बचाव कर रहे हैं।

राजस्थान की भारतीय जनता पार्टी इकाई के अध्यक्ष डॉ. सतीश पूनियां, नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया और उप नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र सिंह राठौड़ भी लगातार सरकार पर हमले कर रही है और राज्य के ठप एक कार्यों में कोरोना का हाल में जनता की बदहाली का हवाला देकर अशोक गहलोत को राजधर्म याद दिला रहे हैं।

लेकिन सबसे बड़ी बात यह है कि बार-बार आरोप लगने के बावजूद राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री और भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष वसुंधरा राजे की रहस्यमई चुप्पी अभी भी जारी है।

राजस्थान भाजपा मुख्यालय में कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों के बीच इस बात की चर्चा जोरों पर है कि राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के संयोजक और नागौर के सांसद हनुमान बेनीवाल ने कुछ दिनों पहले अशोक गहलोत और वसुंधरा राजे के गठजोड़ का जो आरोप लगाया था क्या वह सच है?

चर्चा यह भी है कि हनुमान बेनीवाल से पहले प्रदेश के तत्कालीन उप मुख्यमंत्री और कांग्रेस पार्टी के ही प्रदेश अध्यक्ष रहे सचिन पायलट के द्वारा अशोक गहलोत सरकार को घेरने और भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष वसुंधरा राजे के द्वारा गहलोत सरकार का बचाव करने के आरोप लगाए गए थे।

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कार्यकर्ताओं में चर्चा है कि चहुंओर से लगातार आरोप लगने के बाद एक दिन खुद का बचाव करने के लिए वसुंधरा राजे ने दो ट्वीट जरूर किए, लेकिन उसके बाद फिर से इस मामले में लंबी चुप्पी खींच ली गई है।

जबकि, तमाम घटनाओं और त्यौहारों को लेकर वसुंधरा राजे के द्वारा ट्विटर और फेसबुक के जरिए संपर्क जारी रखा हुआ है।

भले ही भारतीय जनता पार्टी के तमाम बड़े नेताओं द्वारा कांग्रेस पार्टी और प्रदेश की अशोक गहलोत सरकार को सवालों में खड़ा किया जा रहा हो, लेकिन जिस तरह से लगातार वसुंधरा राजे चुप हैं, उससे कहीं ना कहीं इस बात को जरूर बल मिलता है कि प्रत्यक्ष नहीं तो परोक्ष रूप से वसुंधरा राजे के द्वारा अशोक गहलोत सरकार का बचाव किया जा रहा है।

हो सकता है कि इस चुप्पी से अशोक गहलोत सरकार को फायदा नहीं हो रहा हो, किन्तु इतना जरूर है कि पूर्व मुख्यमंत्री की अनुपस्थिति ने सियासत को गपशप के लिए मजबूर अवश्य कर दिया है।

इधर, ताज़ा घटनाक्रम के दौरान राजस्थान हाई कोर्ट के द्वारा फैसला 24 जुलाई तक टाल दिया गया है और भारतीय जनता पार्टी की तरफ से अभी भी इस मामले में कुछ भी कहने से इनकार किया जा रहा है माना जा रहा है कि भाजपा भी सचिन पायलट की तरह हाईकोर्ट के फैसले का इंतजार कर रही है।