राजस्थान में राष्ट्रपति शासन की तैयारी! पृष्ठभूमि हो रही है तैयार

राजस्थान में राष्ट्रपति शासन की तैयारी! पृष्ठभूमि हो रही है तैयार
राजस्थान में राष्ट्रपति शासन की तैयारी! पृष्ठभूमि हो रही है तैयार

जयपुर।
राजस्थान में राजनीतिक हालात बद से बदत्तर होते जा रहे हैं। कांग्रेस दो फाड़ होकर आधी दिल्ली रोड पर गहलोत के स्वामित्व वाली होटल में और आधी हरियाणा में खट्टर सरकार की मेहमान नवाजी है, तो भाजपा मौका तलाश रही है​ कि कैसे भी सरकार गिरे और उसको मध्य प्रदेश की तरह सरकार बनाने का अवसर मिले।

हालांकि, इस मामले में जो आरोप लग रहे हैं, वो ज्यादा चौंकाने वाले हैं। आरोप है कि वसुंधरा राजे पर्दे के पीछे से अशोक गहलोत सरकार को बचाने का पूरा प्रयास कर रही हैं, जबकि जिस तरह से भाजपा के विधायक, जिनको राजे का करीबी माना जाता है और 2013 से 2018 तक विधानसभा अध्यक्ष रह चुके हैं, कैलाश मेघवाल ने अपने ही दल होर्स ट्रेडिंग में शामिल होने का आरोप लगाते हुए सवाल उठाए हैं।

कांग्रेस भले ही दो टुकड़ों में बंटी हुई हो, किंतु इतना तय मानकर चलिये कि भाजपा भी कम से कम दो खेमों में बंटी हुई है। और ऐसे में यह समझना मुश्किल नहीं है कि गहलोत की सरकार गिरने पर भाजपा आसानी से सरकार का गठन कर उसको अगले करीब सवा तीन साल चला पाएगी।

इस बीच फोन टैपिंग के कांड़ ने रही सही कसर भी पूरी कर दी है। मायावती ने गहलोत को दोखेबाज और विधायकों का खरीददार करार दिया है। मायावती ने कहा है कि राजस्थान में राष्ट्रपति शासन लगना चाहिए। इधर, फोन टैपिंग कांड़ के बाद भाजपा ने सीबीआई जांच की मांग की है।

सोमवार को यदि कोर्ट से फैसला सचिन पायलट खेमे के पक्ष में आता है तो तय मानकर चलिए कि राज्य में सरकार को अल्पमत में मानकर फ्लोर टेस्ट करवाया जाएगा, जिसमें गहलोत सरकार के गिरने की पूरी संभावना है। ऐसे में भाजपा के पास मौका होग, लेकिन नंबर कम होने पर राष्ट्रपति शासन का विकल्प भी खुला हुआ है।

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अगला एक पखवाड़ा इस सियासी ड्रामे का आखिरी पड़ाव माना जा सकता है। इस दौरान कोर्ट का फैसला, विधानसभाध्यक्ष की सुनवाई, फ्लोर टेस्ट, राष्ट्रपति शासन की अनुशंषा समेत तमाम कार्य पूर्ण हो जाएंगे और राज्य में राजनीतिक नौटंकी का अंत भी हो जाएगा।