तीन बुझी हुई बीड़ियां बचा रही हैं अशोक गहलोत सरकार, कांग्रेस का सत्यनाश भी कर रही हैं

नई दिल्ली। राजस्थान में कांग्रेस की सियासी संघर्ष को नियंत्रित करने के लिए दिल्ली से विशेष रूप से जयपुर भेजे गए रणदीप सिंह सुरजेवाला, अजय माकन और केसी वेणुगोपाल को लेकर कांग्रेस विधायकों में अच्छी खासी प्रतिक्रिया दिख रही है।

इन लोगों को सचिन पायलट से बात करनी थी, लेकिन जो कि पायलट जयपुर में नहीं होकर हरियाणा के मानेसर में डेरा डाले हुए हैं। इसलिए यह लोग राजस्थान की राजधानी में गहलोत के स्वामित्व वाले एक होटल में फाइव स्टार आवभगत का लुफ्त उठा रहे हैं।

इन तीनों की विश्वसनीयता भी संदिग्ध है। सुरजेवाला लगातार तीन विधानसभा चुनाव हार चुके हैं और हरियाणा के 1 राज्य सभा चुनाव में उन्होंने कांग्रेस समर्थित प्रत्याशी आरके आनंद के खिलाफ वोट कर सोनिया गांधी के साथ विश्वासघात किया था।

यह सब कुछ भूपेंद्र सिंह हुड्डा की शह पर किया गया था, लेकिन अब स्थितियां बदल गई हैं और हुड्डा हाथ धोकर सुरजेवाला के पीछे पड़े हुए हैं, लेकिन सुरजेवाला को अब वाड्रा परिवार का संरक्षण प्राप्त है।

क्योंकि वह अन्य के अलावा रॉबर्ट वाड्रा के भी कानूनी सलाहकार हैं, इसलिए प्रियंका उन्हें संरक्षित करती हैं। दिल्ली के अपने चुनाव हार चुके हैं, बल्कि दिल्ली प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष के रूप में उन्होंने यह सुनिश्चित किया कि इसके बाद होने वाले विधानसभा चुनाव के साथ ही लोकसभा चुनाव में पार्टी का खाता नहीं खुला पाए, लेकिन गांधी परिवार के लिए एक बड़ी उम्मीद है।

और भी अब राजस्थान के कांग्रेस संकट को हल करने के लिए जयपुर गए हैं। किसी को यह पता नहीं है कि वह वहां के फेयरमोंट होटल में क्या कर रहे हैं और बेशक केसी वेणुगोपाल, जो कि राजस्थान से राज्यसभा सांसद और राहुल गांधी के चहेते हैं।

यह भी पढ़ें :  बेनीवाल खींवसर से भरेंगे हुंकार मंडावा में भाजपा लगाएगी ताकत

उन्होंने उन्हें पार्टी संगठन का महासचिव बनाया है, के खिलाफ केरल में बलात्कार का एक केस दर्ज है, लेकिन इन छोटी मोटी बातों की किसी को परवाह नहीं है।

हिंदी भाषा को लेकर उन्हें बड़ी समस्या है और जयपुर की होटल में मौजूद कांग्रेसी विधायकों से बातचीत करने में उन्हें परेशानी आ रही है।

होटल के भीतरी सूत्रों से मिली खबरों के अनुसार कदाचित ही अपने कमरे से बाहर नहीं निकलते, तथा न तो किसी विधायक से मिलते हैं और ना ही किसी से बात करते हैं।

वे सिर्फ अशोक गहलोत के कमरे में जाने और उनसे बातचीत करने के लिए ही अपने कमरे के बाहर निकलते हैं और फिर अपने कमरे में आ जाते हैं।

गांधी परिवार की, खास तौर पर राहुल गांधी की पसंद पर क्या कहा जाए, जिन्होंने पार्टी के भीतर चल रही उथल-पुथल के जैसा मौन धारण कर रखा है।

उनके पास प्रधानमंत्री, चीन, कोरोना, अर्थव्यवस्था और मोदी देश को कैसे चला रहे हैं पर ट्वीट करने का समय है, लेकिन वह दुनिया को यह बताना भूल गए कि वह और उनकी मां सोनिया गांधी कांग्रेस पार्टी को किस तरह से संभाल रहे हैं।

संजय जैन, जिसे राजस्थान पुलिस ने इस मामले में तथाकथित रिश्वत देने के संबंधित ऑडियो टेप कांड से गिरफ्तार किया है, उसकी वसुंधरा राजे अशोक गहलोत दोनों से नजदीकी जग जाहिर है।

वसुंधरा राजे ने जो कुछ घटनाक्रम चल रहा है, उस पर रहस्यमई चुप्पी साध रखी है। हालांकि भाजपा से संबंधित हनुमान बेनीवाल ने इस बारे में कहा है कि राजे ने कांग्रेस के विधायकों से गहलोत का समर्थन करने के लिए कहा है।

यह भी पढ़ें :  समीक्षा के बाद मोदी मंत्रिमंडल से कुछ की छुट्टी तय

यह बात जगजाहिर है कि वसुंधरा और गहलोत एक दूसरे के मददगार हैं और उन्होंने कई बार एक दूसरे की मदद की है। इस संदर्भ में गजेंद्र सिंह शेखावत के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराना है। गहलोत-वसुंधरा और दोनों से शेखावत से नफरत करते हैं।

वसुंधरा, इसलिए क्योंकि मुख्यमंत्री पद के लिए उनके प्रतिद्वंद्वी हैं और वे भाजपा हाईकमान के नजदीक हैं। इसके साथ ही गहलोत इसलिए नफरत करते हैं, क्योंकि जोधपुर निवासी हैं और उन्होंने गहलोत के पुत्र वैभव गहलोत लोकसभा चुनाव में हराया था।

संभवत यह पहला अवसर है जब राज्य सरकार ने केंद्रीय मंत्री के विरुद्ध एफआइआर दर्ज कराई है, परंतु उनका क्या होगा। उन्हें इन आरोपों का जवाब देना ही पड़ेगा। कांग्रेस के विधायक फेयरमाउंट होटल में अपने को व्यस्त रखे हुए हैं।

उनमें से कुछ अपना कमरों में जासूसी। कमरों में माइक्रोफोंस की तलाश करके समय व्यतीत कर रहे हैं। क्योंकि उनमें से कुछ कुछ संदेह है कि उनके कमरों में कांटेक्ट करने के उपकरण लगाए हुए हैं और उनकी बातों को रिकॉर्ड किया जा रहा है।

असुरक्षित गहलोत ने निर्देश दिए हैं कि विधायक अपना मोबाइल कमरे से बाहर रखेंगे और वह अपनी इच्छा अनुसार फोन नहीं कर सक।ते खबरों के अनुसार ऐसा इसलिए किया गया है, क्योंकि फेयर माउंट होटल में ठहरे हुए कुछ विधायक विधानसभा में शक्ति परीक्षण के समय गहलोत सरकार के खिलाफ मतदान कर सकते हैं।

दिल्ली में बैठे कुछ वरिष्ठ नेताओं का आकलन यह है कि लगभग 42 विधायक गहलोत सरकार के खिलाफ मतदान कर सकते हैं। कहानी दिन-ब-दिन रोचक होती जा रही है।

यह भी पढ़ें :  Delhi assembly election : भाजपा ने उम्मीदवार चयन की प्रक्रिया शुरू की