राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष सीपी जोशी की कुर्सी पर लटकी तलवार, आ सकता है अविश्वास प्रस्ताव

राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सचिन पायलट के साथ अपनी लड़ाई को बहुत खराब स्थिति में पहुंचा दिया है। उन 3 ऑडियो क्लिप्स, जिनमें पैसे के लेनदेन के संबंध में बातचीत हो रही है क्या आधार पर पुलिस ने केंद्रीय जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत के खिलाफ एफ आई आर दर्ज कर ली है।

कथित बिचौलिए, जिसको भाजपा नेता स्थापिय करने का प्रयास किया जा रहा है, वो संजय जैन उर्फ संजय बरडिया को गिरफ्तार कर लिया है तथा भंवर लाल शर्मा और भरतपुर महाराजा विश्वेन्द्र सिंह को पार्टी से निलंबित कर दिया है।

एसओजी के एडीजी का कहना है कि उनके पास साक्ष्य नहीं है तथा उन्हें जांच पड़ताल करनी पड़ेगी। लेकिन राजस्थान के गृहमंत्री के रूप में एसओजी के बॉस मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का कहना है कि हर चीज की जांच पड़ताल हो गई तथा हर चीज सिद्ध हो गई है।

अशोक गहलोत ने एसओजी को आवाज के नमूने लेने के लिए मानेसर के उस होटल में भेजा था, जहां सचिन पायलट खेलने के विधायक ठहरे हुए हैं, लेकिन हरियाणा पुलिस का कहना है कि यह लोग जरूरी कागजी कार्रवाई के बिना ही आ गए थे, तथा इसलिए उन्हें वापस कर दिया गया है।

अशोक गहलोत को यह बात उजागर करनी पड़ सकती है कि क्या वे टेलीफोन टाइप कर रहे थे, जासूसी कर रहे थे, या कुछ और कर रहे थे, या फिर यह टाइप खुद चलकर उनके पास आ गए, उनकी गोद में आ गए। गजेंद्र सिंह शेखावत ने टेप में उनकी आवाज होने से इनकार किया तथा कहा कि यह टाइप नकली है।

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मोदी सरकार से ऐसी आशा तो हरगिज़ नहीं की जा सकती कि वह चुपचाप बैठे रहे और अपने मंत्री की जासूसी होते तथा उन पर सूक्ष्म नजर रखे जाने को सहज भाव से देखती रहेगी।

राजस्थान उच्च न्यायालय में दिनभर चली सुनवाई के बाद इस केस, जिसमें सचिन पायलट ने उन्हें अयोग्य ठहराए जाने के नोटिस को चुनौती दी है कि सुनवाई आज सोमवार 20 जुलाई को होगी तथा अदालत ने विधानसभा अध्यक्ष सीपी जोशी को कह दिया है कि वह मंगलवार शाम तक विद्रोही विधायकों की अयोग्यता को लेकर कोई आदेश पारित नहीं करें।

इसे सचिन पायलट को और समय मिल गया है तथा इस मुद्दे को कुछ दिन और घसीटा जा सकता है तथा यह मुद्दा सर्वोच्च न्यायालय तक भी जा सकता है, फिलहाल फ्लोर टेस्ट अवश्यंभावी प्रतीत प्रतीत हो रहा है।

हालांकि कुछ लोगों का विचार है कि पायलट को आपने डिसक्वालीफिकेशन के मामले में कोई अनुकूल आदेश मिल जाता है तो वह राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष सीपी जोशी के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव ला सकते हैं तथा अविश्वास प्रस्ताव भी फ्लोर टेस्ट जितना ही कारगर रहेगा।

एक और घटनाक्रम के अंतर्गत अशोक गहलोत ने एक टीवी चैनल को दिए गए इंटरव्यू में खुलासा किया कि उनमें और सचिन पायलट में पिछले 18 माह से बोलचाल नहीं थी। 18 माह का अर्थ है इस सरकार का अब तक का पूरा कार्यकाल और इस पूरे अरसे में गांधी परिवार ने इस स्थिति को ठीक करने के लिए कुछ भी नहीं किया।

दोनों नेताओं को अपने पास बुला कर इस मुद्दे का कोई समाधान नहीं किया एआईसीसी महासचिव तथा राजस्थान प्रभारी अविनाश पांडे ने भी इनके मतभेदों का हल निकालने की दिशा में कोई सक्रियता नहीं दिखाई, बल्कि वे तो वही अशोक गहलोत के कहे अनुसार चल रहे थे।

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और सचिन पायलट के एक करीबी सूत्रों का कहना है कि सभी 3 दिन पहले प्रियंका गांधी ने पायलट से बातचीत की तथा उन्हें विश्वास दिलाया कि उनकी सारी शिकायतें सोनिया गांधी तक राहुल गांधी की समक्ष रखी जाएगी।

लेकिन इस बातचीत के चंद घंटे बाद ही गहलोत ने उन्हें उप मुख्यमंत्री तथा राज्य विधानसभा अध्यक्ष पीसीसी अध्यक्ष के पदों से हटा दिया गया। कहने का मतलब यह है कि गहलोत बहुत अड़ियल हो गए हैं तथा वे गांधी परिवार और हाईकमान की भी नहीं सुनते हैं, तथा अपनी सनक एवं मर्जी के मुताबिक काम करते हैं, यह कितने दिलचस्प बात है।