भाजपा अशोक गहलोत, गोविंद सिंह डोटासरा और रणदीप सुरजेवाला के खिलाफ करेगी मानहानि का मुकदमा

जयपुर। राजस्थान में जारी राजनीतिक संग्राम के बीच भारतीय जनता पार्टी की तरफ से शुक्रवार को दोपहर बाद 5:00 बजे प्रेस वार्ता का आयोजन किया गया।

इस मौके पर जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष डॉ सतीश पूनिया, नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया और उप नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र सिंह राठौड़ ने पत्रकारों से बात करते हुए स्पष्ट तौर पर कहा कि केंद्रीय जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत के ऊपर बिना किसी सबूत के कांग्रेस पार्टी और मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के द्वारा जो आरोप लगाए गए हैं, उसके बारे में भाजपा विधि विशेषज्ञ से बात कर रही है और जल्द ही इस बात का फैसला लेगी कि इस मामले में मानहानि का मुकदमा किस स्तर का किया जा सकता है।

डॉ पूनिया ने कहा कि रणदीप सुरजेवाला और खुद मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को इतना पता नहीं है कि बिना किसी सबूत के किसी सम्मानित व्यक्ति के खिलाफ आरोप लगाना ने केवल गैरकानूनी है, बल्कि मानहानि के तहत आपराधिक करते भी है।

उन्होंने जानकारी देते हुए बताया कि केंद्रीय कैबिनेट मंत्री गजेंद्र सिंह के द्वारा खुद इस बारे में स्पष्ट कर दिया गया है कि जिन्हें ऑडियो टेप को मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के ओएसडी लोकेश शर्मा की ओर से जारी किये गए, उनसे उनका दूर-दूर तक कोई वास्ता नहीं है और अगर अशोक गहलोत सरकार दुनिया की किसी भी बड़ी से बड़ी जांच एजेंसी से जांच करवाना चाहती है तो करवा सकती है, यदि वह इस मामले में लिप्त पाए गए तो राजनीति छोड़ने को तैयार हैं।

इस प्रकरण को लेकर नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया ने कहा कि गृह मंत्रालय की तरफ से एक स्पष्ट और लिखित आदेश के द्वारा ही किसी भी व्यक्ति की कॉल रिकॉर्डिंग की जा सकती है, लेकिन मैं पूछना चाहता हूं कि राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और उनकी सरकार में बैठे हुए लोगों ने किस आधार पर किसी भी व्यक्ति की कॉल रिकॉर्डिंग की।

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इसके साथ ही उन्होंने कहा कि जिस तरह के फर्जी ऑडियो टेप वायरल किए गए हैं, उससे साबित होता है कि राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत मानसिक रुप से दिवालिया हो चुके हैं।

इस मौके पर डॉ पूनिया ने कहा कि राजस्थान विधानसभा के अध्यक्ष के समक्ष उनकी पार्टी की तरफ से करीब 4 महीने पहले बसपा के 6 विधायकों के कांग्रेस में विलय करने के खिलाफ एक याचिका दायर की गई थी, लेकिन उक्त प्रकरण में एक भी सुनवाई नहीं हुई, ना किसी को नोटिस जारी किए गए, जबकि स्पीकर ने सचिन पायलट और कांग्रेस के अन्य 19 विधायकों के खिलाफ रात को 2:00 बजे विधानसभा सचिवालय खुलवाया और रात को ही नोटिस जारी भी कर दिए और सुबह जल्दी तमाम विधायकों के आवास पर चस्पा भी कर दिया।

इससे जाहिर होता है कि स्पीकर की भूमिका संदेह के घेरे में है और वे लोग इस प्रकरण को लेकर एक बार फिर से विधानसभा अध्यक्ष के समक्ष याचिका दायर करेंगे।

इस मौके पर उप नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र सिंह राठौड़ ने कहा कि केंद्रीय कैबिनेट मंत्री के खिलाफ जिस तरह से मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और उनकी सरकार कुचक्र रच रही है, बदनाम करने के लिए साजिश बना रही है।

उससे साफ होता है कि जोधपुर में मई 2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान अशोक गहलोत के बेटे की गजेंद्र सिंह शेखावत के सामने हुई करीब तीन लाख वोटों की हार को अब भी गहलोत पचा नहीं पा रहे हैं।

एक सवाल के जवाब में नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया और पार्टी अध्यक्ष डॉ पूनिया ने साफ किया कि नागौर के सांसद और राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के संयोजक हनुमान बेनीवाल के द्वारा 1 दिन पहले वसुंधरा राजे और अशोक गहलोत के गठजोड़ के जो ट्वीट किए गए थे और आरोप लगाए गए थे।

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उसके बाद उनकी तरफ से बेनीवाल से बात की गई है और उनको गठबंधन का धर्म निभाते हुए भविष्य में इस तरह से भाजपा के किसी भी नेता के खिलाफ बयान देने और आरोप लगाने के लिए मना किया गया है।

उन्होंने बताया कि हनुमान बेनीवाल ने अपनी गलती मान ली है और भविष्य में इस तरह का कोई भी ट्वीट नहीं करेंगे। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि हनुमान बेनीवाल के स्टाफ में किसी आईटी विभाग संभालने वाले लड़के के द्वारा वो ट्वीट किए गए थे।