मौसम की रुसवाई, सरकारी कैद और कोरोना से जूझता जन-जन

मौसम की रुसवाई, सरकारी कैद और कोरोना से जूझता जन—जन

जयपुर
राजस्थान में मानसून के लिए जनता एक माह बाद आज भी इंतजार कर रही है। 20 जून को आने वाला मानसून आज भी नहीं पहुंचा है। राज्य सरकार लगातार दूसरे महीने चार दिन से एक होटल में कैद है, सियासी आक्रमण चरम पर है और प्रदेश का जन मानस वैश्चिक महामारी कोरोना से जूझ रहा है।

ऐसा लगता है राज्य की जनता पर सारी विपदा एकसाथ ही आ पड़ी है। प्रदेश का करीब 55 प्रतिशत आबादी के साथ बहुमत वाला किसान वर्ग चौमासे की आस में आसमान की ओर टकटकी लगाए बैठा है। अधिकांश जगह पर खरीफ की फसलों के लिए बुवाई शुरू भी नहीं हो पाई है और सावन का महीना बीता जा रहा है।

राज्य की कांग्रेस और उसके नेता अशोक गहलोत किसी भी चालाकी से सरकार बचाने के लिए जुटे हुए हैं, चाहे इसके लिए उनको एसओजी का इस्तेमाल करना पड़े या फिर एसीबी को बदनाम करना पड़े। अपने ही प्रदेशाध्यक्ष और उपमुख्यमंत्री को बर्खास्त करने का यह पहला मामला है।

अन्य मंत्रियों का भी बर्खास्त किया गया है। युवा ब्रिगेड गहलोत से छुटकारा चाहती है। राज्य का अपमानित जाट, गुर्जर, मीणा, राजपूत, ब्राह्मण वर्ग गहलोत को फूटी आंख भी पसंद नहीं करता है, लेकिन आलाकमान की चाटूकारिता के आगे संविधान की सीमाओं में बंधी जनता मूक बनकर देख रही है।

1998 के समय अपमानित कर परसराम मदेरणा को बाहर किया गया। तब भी चाटूकारिता हावी रही। इसके बाद प्रदेश नें अकाल के पांच साल झेले। 2003 में वसुंधरा आईं तो मानसून मेहरबान हुआ। लेकिन आपसी कलह ने 2008 में फिर से भाजपा को बाहर कर दिया। गहलोत ने चाटुकारिता की सारी हदें पार कर पहले तो सीपी जोशी को निपटाया, फिर सबको दरकिनार कर सीएम बन गए।

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2013 से 2018 तक राज्य में भाजपा प्रचंड़ रही, लेकिन ‘मोदी तूझसे बैर नहीं, वसुंधरा तेरी खैर नहीं’ के नारे और सचिन पायलट की कड़ी मेहनत ने फिर से कांग्रेस को सत्ता की दहलीज पर पहुंचाया। एक बार फिर चाटुकारिता ने जादूगरी को चौला औढ़ा। गांधी परिवार की चाटुकारिता ने प्रदेश को बदनसीबी के चंगुल में फंसा दिया।

किंतु शायद इस बार मुक्ति मिल जाए! हर ओर से युवा आवाज उठाकर लड़ रहा है, मुक्ति चाहता है चाटुकारिता के जादूगर से! कांग्रेस के भीतर जो आवाज उठी है, उसको चरम पर ले जा रहे हैं प्रदेश के युवा! सोशल मीडिया के माध्यम से सचिन पायलट, विश्वेंद्र सिंह, रमेश मीणा, मुकेश भाकर, रामनिवास गा​वड़िया समेत तमाम क्रांतिकारी विधायकों को खुलकर समर्थन मिल रहा है।

राज्य की जनता आज न केवल चौमासे का इंतजार कर रही है, बल्कि उसको रोकने के लिए जिम्मेदार से मुक्ति चाहती है। अब तो बस यही लगता है कि कोई बड़ा उथल पुथल इसी 2020 में हो जाए तो ठीक है। कोरोना से मुक्ति मिले न मिले, लेकिन राज्य के उपर 22 साल से छाई काली आंधी से मुक्ति मिलनी ही चाहिए।