वसुंधरा का बंगला बचाने उतरे पूर्व विधानसभा अध्यक्ष और भाजपा विधायक

जयपुर। एक दिन पहले ही राजस्थान के पूर्व उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट के द्वारा राज्य की अशोक गहलोत सरकार बचाने में पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे की अहम भूमिका होने का आरोप लगाने के दूसरे ही दिन वसुंधरा राजे के बेहद करीबी और राज्य विधानसभा के पूर्व विधानसभाध्यक्ष व शाहपुरा विधायक कैलाश मेघवाल व पूर्व मंत्री तथा छबड़ा विधायक प्रताप सिंह सिंघवी मैदान में आ गए हैं।

दोनों नेताओं ने पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट से किया है कि वे बताये कि दो-दो सरकारी बंगलो में किस हैसियत से रह रहें है?

उनको एक सरकारी बंगला तो वर्तमान सरकार ने सिविल लाइन जयपुर और एक यूपीए सरकार ने 5 केनिग रोड दिल्ली में आवंटित किया था।

गुरुवार को पत्रकारों से बात करते हुए दोनो विधायकों ने कहा कि सचिन पायलट अपनी सियासी महत्वकांक्षा के चलते अपनी पार्टी में अंतर्कलह की स्थिति पैदा कर उसमें ख़ुद फँस गये हैं और अब अपने राजनीतिक भविष्य को बचाने के लिये वे हताशा में बे-सिर-पैर की बातें कर रहे है।

पूर्व विधानसभा अध्यक्ष और शाहपुरा से विधायक कैलाश मेघवाल ने उन्हें सलाह दी है कि वो ऐसी बातें करने के बजाय एक ज़िम्मेदार राजनेता का आचरण करें।

मेघवाल व सिंघवी ने कहा कि वसुन्धरा राजे को सरकारी आवास उनको वरिष्ठ विधायक के रूप में मिला है। उन्होंने कहा कि इसी श्रेणी का आवास पूर्व सरकार में कांग्रेस के विधायक माहिर आज़ाद और देवी सिंह भाटी को भी मिला हुआ था।

इसी तरह पूर्ववर्ती वसुंधरा राजे सरकार में इसी तरह का आवास भाजपा विधायक प्रह्लाद गुंजल को आवंटित था। वर्तमान में भी इसी श्रेणी के आवास कांग्रेस विधायक महेन्द्र जीत मालवीय, नरेन्द्र बुढ़ानिया और महादेव सिंह खण्डेला को आवंटित किये गये हैं।

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मेघवाल ने सचिन पायलट को नसीहत देते हुए कहा कि ऐसे में दो बार मुख्यमंत्री, 5 बार विधायक, 5 बार सांसद, नेता प्रतिपक्ष और केंद्रीय मंत्री रही वसुन्धरा राजे को विधायक के रूप में जो आवास आवंटित किया गया, उसे गहलोत मदद बताना दुर्भाग्यपूर्ण है।

वसुंधरा राजे के बेहद करीबी माने जाने वाले दोनों विधायकों ने आरोप लगाया कि असल में पायलट को पीड़ा आवास आवंटन की नहीं है, बल्कि वसुन्धरा द्वारा पायलट की मां रमा पायलट को झालरापाटन विधानसभा के 2003 वाले चुनाव में बुरी तरह हराने की है। उस हार की तिलमिलाहट को पायलट अभी तक नहीं भुला सके हैं।

सचिन पायलट के वसुंधरा राजे सरकार द्वारा खनन पट्टे आवंटित में घपला किए जाने और अशोक गहलोत के द्वारा उसको बचाए जाने के आरोप पर दोनों विधायकों ने कहा कि पायलट को मालूम होना चाहिए कि जिन खनन पट्टों की बात वे कर रहें हैं, वो पूर्ववर्ती सरकार ने शिकायत होने के साथ ही तत्काल निरस्त कर दिये थे और सारा प्रकरण लोकायुक्त को दे दिया था।

इतिहास में पहली बार वसुंधरा राजे सरकार में ही पारदर्शीता के साथ खनन पट्टों के आवंटन में ई-ऑक्सन सिस्टम लागू किया। इसके अलावा वसुंधरा राजे शासन में एसीबी को स्वतंत्र रूप से काम करने दिया।

कांग्रेस सरकार ने जिस बजरी माफ़िया को पूरा राजस्थान कमाने के लिए खुला सौंप दिया था, उस बजरी माफ़िया को वसुन्धरा की भाजपा सरकार ने ख़त्म किया, बजरी लीज़ के लिये नए नियम बनाये, नई खनिज नीति लागू की।

आपको बता दें कि एक दिन पहले ही दिल्ली में एक टीवी चैनल के साथ बात करते हुए सचिन पायलट ने राजस्थान की अशोक गहलोत सरकार और पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के बीच गठजोड़ होने और एक दूसरे का बचाव करने के समेत कई गंभीर आरोप लगाए थे।

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