जिस कानून को खत्म करने का वादा अपने घोषणा पत्र में किया, वही कानून उपमुख्यमंत्री पर लगा दिया: राठौड़

रामगोपाल जाट। राजस्थान में राजनीति उठापठक के बीच राज्य केे बर्खास्त उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट पर लगाये गये धारा 124A वाले राजद्रोह के कानून को लेकर विपक्ष ने बड़े सवाल खड़े किये हैं।

राज्य विधानसभा में उपनेता प्रतिपक्ष राजेंद्र सिंह राठौड़ ने कहा है कि राज्य के उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट, जिनको मंत्रीमंड़ल से भी एक दिन पहले ही बर्खास्त किया गया है, उनपर कानून की उस धारा का बेजा इस्तेमाल करते हुए जेल भेजने की तैयार कर ली है, जो कभी अंग्रेज गाँधीजी के खिलाफ लगाते थे।

राठौड़ ने कहा कि धारा 124ए को किसी राजद्रोही के उपर लगाया जाता है, जिसमें कभी भी गिरफ्तारी हो सकती है, जिसका इस्तेमाल कांग्रेस ने अपने ही नेता पर कर लिया गया, यह साबित करता है कि सरकार मानसिक रुप से दिलालियापन की शिकार हो चुकी है।

राठौड़ ने कहा कि इस धारा का प्रयोग अशोक गहलोत सरकार ने अपनी ही सरकार के उपमुख्यमंत्री के खिलाफ प्रयोग कर लिया, जबकि लोकसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस ने अपने घोषणा पत्र में लिखा था कि सरकार आएगी तो इस धारा को कानून में से हटाया जाएगा।

किंतु राज्य की सत्ताधारी अशोक गहलोत सरकार ने अपने ही उप मुख्यमंत्री और प्रदेश अध्यक्ष पायलट के उपर ही इस धारा को लगा दिया, जिससे साफ जाहिर है कि सरकार की नीयत सही नहीं है।

इसी प्रकरण को लेकर हाईकोर्ट के वरिष्ठ वकील एके जैन का कहना है कि इस धारा का उपयोग तब किया जाता है, जब कोई व्यक्ति सरकार के खिलाफ बड़ी साजिश रचता है, उसको बदनाम करने की नीयत से काम करता है और बड़े पैमाने पर सरकार के खिलाफ साजिश में शामिल होता है।

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एक अन्य वकील ओमप्रकाश चौधरी का कहना है कि सरकार द्वारा इस तरह की धारा का इस्तेमाल करना सरकार की मशीनरी पर ही सवाल खड़े करता है।

19 विधायकों को विधानसभा अध्यक्ष की तरफ से जारी नोटिस को लेकर राजेंद्र राठौड़ ने कहा कि इसके अंदर उसका का जिक्र किया गया है, जो नियम लगता ही नहीं है। उसके पेरा 1ए और 1बी में जिस प्रकार का उल्लेख किया गया है, यदि उसे पढ़ लिया जाता तो शायद यह नोटिस नहीं दिया जाता।

राठौड़ ने बताया कि इससे पहले भी जब जनता दल का भाजपा में विलय हुआ था, उस समय, यानि 1990 के अंदर जब मैं विधानसभा का सदस्य था और हमने उस समय जनता दल के खिलाफ जाकर बैठक में हिस्सा नहीं लिया था।

तब भी इस तरह की बातें सामने आई थीं, लेकिन आखिर हमारी जीत हुई और सदस्यता को लेकर कोई संकट नहीं हुआ था, इसलिये मैं दावे के साथ कह सकता हूं कि विधानसभा के बाहर के किसी भी कृत्य पर किसी भी सदस्य को अयोग्यता के लिये जिम्मेवार नहीं बनाया जा सकता है।