कांग्रेस आलाकमान की कमजोरी से साफ हो गया है कि पार्टी डिवाइड हाउस है: पूनियां

रामगोपाल जाट
राज्य के राजनीतिक संग्राम को लेकर भाजपा इंतजार की मुद्रा में नजर आ रही है। भाजपा के अध्यक्ष डॉ. सतीश पूनियां ने कहा है कि इस पूरे प्रकरण को लेकर कांग्रेस आलाकमान की कमजोरी और मूकदर्शिता ने पार्टी की हमेशा वाली डिवाइड हाउस की वास्तविकता से सबको रुबरु करवा दिया है।

करोड़ों रुपयो में कांग्रेस विधायकों को भाजपा द्वारा खरीदने के आरोप के जवाब में पूनियां ने सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि साल 2008 और 2018 में पूरी बसपा को यही मुख्यमंत्री अशोक गहलोत खा गये थे, उस वक्त कब किस आधारा पर सौदा हुआ था, इस बात का खुलासा भी गहलोत कर दें।

आरोप लगाना आसान है, पीएम पर आरोप, भाजपा पर आरोप, मेरे उपर आरोप लगाया है, लेकिन कुछ साबित नहीं कर पाते। अपने ही उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट का बर्खास्त कर इन्हीं सीएम ने इतिहास बना दिया है।

उन्होंने कहा है कि यह कांग्रेस का अंदरुनी झगड़ा है, इसमें हमारा कोई लेना देना नहीं है। सरकार को लेकर पूनियां ने कहा कि यह सरकार नहीं चलेगी, कांग्रेस की 99 सीटें थीं, फिर एक आरएलडी, 6 बसपा के ले लिए, जिस दिन बिजली चली जाएगी, उसी दिन सरकार चली जाएगी।

बहुमत के मामले में आरोप लगाते हुए पूनियां ने कहा कि सरकार के पास सीधे सीधे 99 से भी कम वोट हैं, लेकिन यह आंकड़ा तो बहुमत से दूर है।

सचिन पायलट केे साथ भाजपा के गठबंधन या उनको तोड़ने के सवाल पर पूनियां ने कहा कि पायलट से संपर्क करने की जरुरत नहीं है, अभी तो सरकार खुद ही आपस में उलझी हुई है।

यह भी पढ़ें :  भोजन लेकर घर-घर पहुंच रही भाजपा प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनियां की 'सहयोग किचन'

बीटीपी के विधायकों को लेकर पूनियां ने कहा कि चार घंटे तक उनको होटल में बंद रखा और उनकी गाड़ी की चाबी निकाल ली, उनके साथ कैसा व्यवहार किया गया, सबको पता है।

फ्लोर टेस्ट की बात पर पूनियां ने कहा कि भाजपा कुछ नहीं करेगी, सरकार गिर चुकी है और अब इस सरकार को सत्ता में रहने का कोई अधिकार नहीं है, नैतिकता के नाते अशोक गहलोत को इस्तीफा देकर जनता को अपराधों से मुक्त करना चाहिए।

अविश्वास प्रस्ताव पर पूनियां ने कहा कि वो इस खेल के हिस्सा नहीं हैं, और पीड़ित पक्ष उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट हैं, उनको ही इसके लिए आगे आना चाहिए।

व्हिप के सवाल पर पूनियां ने कहा कि सदन के बाहर यह चलता ही नहीं है, जब सदन चल रहा होता है, तब कोई दल व्हिप जारी होता है, बाहर कुछ भी लागू नहीं होता है।

वसुंधरा राजे की नाराजगी के सवाल पर पूनियां ने कहा कि किसी में कोई नाराजगी नहीं है, हम सब एक हैं, उनके साथ फोन पर हमारी लगातार बातचीत हो रही है और विधायक दल की बैठक हुई तब वो आई थीं, आगे भी आएंगी।

इससे पहले प्रदेश के मौजूदा राजनैतिक हालात पर प्रदेश भाजपा कार्यालय में अहम बैठक आयोजित हुई। पूनियां ने कहा कि राजस्थान में विशेष परिस्थिति बनी हैं, विपक्ष के नाते हमारी भूमिका क्या हो, इसको लेकर हमने चर्चा और विश्लेषण किया है।

क्योंकि आज नहींं तो कल इन सभी चीजों से रूबरू होना है किस समय होना है और क्या करना है, यह सब हम आपस में चर्चा करके ही करेंगे।

यह भी पढ़ें :  राजस्थान/ लॉकडाउन एवं कर्फ्य की सख्ती से अनुपालन नहीं होने के कारण बढ़ा प्रदेश में संक्रमण: डॉ. पूनियां

कांग्रेस पर निशाना साधते हुये पूनियां ने कहा कि जिस बात के ​लिये कांग्रेस दम भरा करती थी कि कांग्रेस पार्टी संगठित है, टूटेगी नहीं ये दुर्भाग्यपूर्ण है कि भारत की इतनी बड़ी पार्टी में इतने बड़े प्रदेश में इतनी बड़ी चूक हुई है। कांग्रेस की पहली नैतिक हार है, यह कांग्रेस के आलाकमान की हार है। पूनियां ने कहा कि पौने दो साल से मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री में अंतर्कलह जारी था और इसी के चलते उपमुख्यमंत्री की छुट्टी हो जाती है और आरोप भाजपा पर लगाया करते हैं। इसमें कहीं ना कहीं इसमें उनके आलाकमान की कमजोरी है।

पूनियां ने दावा किया वर्तमान की गहलोत सरकार अल्पमत में हैं और बहुमत खो चुकी है। क्योंकि कांग्रेस पार्टी का जो आंकड़ा था, असंवैधानिक तरीके से बसपा के मर्जर की पिटिशन भी अभी स्पीकर के यहां पैंडिंग है, वो​ निश्चित तौर पर असंवैधानिक है। फैसले कि पिटिशन पर फैसला नहीं दिया कि मर्जर गलत था, फैसला देते तो हम हाईकोर्ट में इसकी अपील कर देंगे।

उन्होंने कहा कि गहलोत सरकार के पास 100 से कम का आंकड़ा है, और कैसी स्थिति में यह बहुमत साबित करेंगे यह तो समय ही बतायेगा। राजस्थान की राजनीति में जिस तरह की हरकत शुरू हुई है इसकी सभी जगह चर्चा हो रही है।

नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया ने कहा कि इस मामले में विधानसभा का कोई रोल नहीं है। पार्टी की बैठक में कौन सदस्य नहीं आते यह स्पीकर तय नहीं करते हैं। स्पीकर का क्षेत्र विधानसभा क्षेत्र है। विधानसभा फ्लोर में यह नोटिस दिया हो और विधानसभा में पार्टी का व्हीप जारी हो, उसका पालन नहीं करे तो स्पीकर एक्शन कर सकते हैं। हाउस की मीटिंग में उल्लंघन होता तो स्पीकर का अधिकार जरूर होता। लेकिन यह अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर किया है। कुछ राज्यों में ऐसा हुआ है, जहां से कोर्ट से राहत मिली है। बैठक में नेता प्रतिपक्ष गुलाब कटारिया, उपनेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़, पूर्व मंत्री अरुण चतुर्वेदी, पूर्व विधानसभा उपाध्यक्ष राव राजेंद्र और पूर्व मंत्री वासुदेव देवनानी भी मौजूद रहे।

यह भी पढ़ें :  मुख्यमंत्री गहलोत 1951 का "कृषि कीट एवं रोग अधिनियम" ढंग से पढ़ लें: चौधरी