युवा विधायक मुकेश भाकर ने अशोक गहलोत को दिखाया आईना

जयपुर। राजस्थान में चल रहे सियासी ड्रामे के बीच मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने अपने ताकत दिखा दी है। गहलोत 109 विधायकों के होने का दावा कर रहे हैं।

लेकिन इस सारे एपिसोड में नागौर के युवा विधायक मुकेश भाकर के एक ट्वीट ने राज्य की सरकार और उसके मुखिया अशोक गहलोत को आईना दिखा दिया है।

मुकेश भाकर ने ट्वीट करके स्पष्ट कर दिया है कि उनको अशोक गहलोत का नेतृत्व कतई मंजूर नहीं है। उन्होंने लिखा है “जिंदा हो तो देखना जरूरी है” और आगे लिखा है “कांग्रेस का मतलब अशोक गहलोत नहीं होता है।”

इधर, बहुमत का आंकड़ा होने के बाद भी कांग्रेस की ओर से सचिन पायलट खेमे को मनाने के प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन सूत्र बता रहे हैं कि यह प्रयास सचिन पायलट को मनाने के लिए नहीं हो रहे हैं, बल्कि सचिन के साथ गए विधायकों को मनाने के हो रहे हैं।

दूसरी तरफ कहा जा रहा कि मंगलवार को कांग्रेस महासचिव प्रियंका वाड्रा जयपुर के उस होटल में आ सकती हैं, जहां सरकार के मंत्री और कांग्रेस के तमाम विधायक ठहरे हुए हैं।

कांग्रेस के जानकारों का कहना है कि पिछले तीन दिनों में जो भी कुछ ड्रामा हुआ, पायलट को कुछ उत्साही कार्यकर्ताओं द्वारा गद्दार कहा गया। पुलिस ने उन्हें नोटिस दिया।

इस पूरे संकट के लिए अशोक गहलोत खेमे के द्वारा सचिन पायलट को दोषी बनाया गया, उसके बाद सचिन पायलट का कांग्रेस में वापस आना संभव नजर नहीं आ रहा है।

ऐसे में प्रदेश कांग्रेस का जोर इस बात पर है कि पायलट के साथ जो भी विधायक हैं, उन्हें किसी तरह से वापस लाया जाए। इसके दो फायदे होंगे। एक तो बागी तेवर अपनाने वाले पायलट अकेले पड़ जाएंगे।

यह भी पढ़ें :  प्रधानमंत्री मोदी ने यह करके रच दिया इतिहास, 21 अक्टूबर रहेगी हमेशा याद-

वहीं दूसरी ओर उनके गुट के विधायकों की वापसी से प्रदेश में कांग्रेस सरकार ज्यादा मजबूत हो जाएगी।

कहा जा रहा है कि इसी कारण से सचिन पायलट से किसी प्रकार की बातचीत कांग्रेस की ओर से नहीं की जा रही है, बल्कि उनके साथ के विधायकों से ही बात की जा रही है और मनाने के प्रयास किए जा रहे हैं, ताकि उनकी फिर से वापसी हो सके।

जानकारों का कहना है कि अभी सरकार ने जादुई आंकड़ा प्राप्त कर लिया है, लेकिन इस बात से इन्कार नहीं किया जा सकता है कि भाजपा फिर से तोडफ़ोड़ की साजिश करेगी।

ऐसे में सरकार को मजबूत करने के लिए पायलट खेमे के विधायकों की वापसी अति आवश्यक है। कांग्रेस का मानना है कि पायलट की वापसी का कोई फायदा नहीं मिलेगा।

यदि पायलट वापस कांग्रेस में आते हैं, तो फिर से पार्टी में गुटबाजी होने लगेगी, जो प्रदेश में सरकार को फिर से संकट में खड़ा कर सकती है।

यह भी कहा जा रहा है कि यदि पार्टी पायलट के आगे कुछ झुकती है तो भविष्य में कांग्रेस में अन्य कई महत्वाकांक्षा वाले पायलट खड़े हो सकते हैं।

दूसरी तरफ भारतीय जनता पार्टी के द्वारा आज दूसरे दिन भी पूरी तरह से कांग्रेस की गुटबाजी पर बारीकी से नजर रखी गई।

हालांकि बताया जा रहा है कि भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष डॉ सतीश पूनिया इस मामले को लेकर पूरी तरह से केंद्रीय नेतृत्व के संपर्क में हैं और पल-पल की जानकारी आपस में साझा की जा रही है।

यह भी पढ़ें :  99 लाख कृषकों का 10 दिन में ऋणमाफ करना था, 81 दिन बाद केवल 20 लाख का दावा

अभी तक सचिन पायलट की तरफ से अशोक गहलोत के द्वारा बहुमत साबित करने के लिए विधायकों की परेड के जवाब में कोई बयान नहीं आया है।

माना जा रहा है कि देर रात तक या कल सुबह सचिन पायलट कांग्रेस को बड़ा झटका दे सकते हैं।

भले ही कांग्रेस और अशोक गहलोत के द्वारा सरकार के समर्थन में 109 विधायकों की दावेदारी जताई जा रही हो, लेकिन युवा विधायक मुकेश भाकर समेत कई लोगों ने खुलकर बगावत कर दी है।

कहा तो यहां तक जा रहा है कि होटल में खुद गहलोत समेत केवल 76 विधायक ही मौजूद हैं।

दूसरी तरफ तरफ बीटीपी ने स्पष्ट किया है कि उनके दोनों विधायक कांग्रेस या भाजपा में से किसी को भी वोट नहीं देंगे, जिसके बाद अशोक गहलोत सरकार पर संकट के बादल बढ़ते हुए नजर आ रहे हैं।