राजस्थान के ‘चाणक्य’ बने भाजपा अध्यक्ष डॉ. पूनियां, केंद्र के साथ बनने लगे हैं सफल समीकरण

जयपुर।

राजस्थान में तीन दिन से जारी भारी सियासी उठापटक ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के पसीने छुड़ाकर रख दिये हैं।

एक तरफ जहां उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट की बगावत और उनके भाजपा में जाने की संभावना के चलते राज्य की गहलोत वाली कांग्रेस सरकार अल्पमत के खतरे से जूझ रही है।

वहीं भाजपा अध्यक्ष डॉ. सतीश पूनियां और बीजेपी के केंद्रीय नेतृत्व के साथ उनके चतुराई वाले तालमेल ने भी कांग्रेस की नींद हराम कर दी है।

कहा जा रहा है कि सियासत में होने वाले असली खेल की तीन दिन तो मात्र एक बानगी है, बल्कि अभी इस ट्रैलर की फ़िल्म रिलीज होनी बाकी है।

इस बीच भाजपा के उच्च पदस्थ सूत्रों का तो यहां तक दावा है कि पिछले करीब 7 माह के दौरान भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा, खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री व देश की सियासत में “चाणक्य” कहे जाने वाले अमित शाह के साथ कदमताल कर डॉ. सतीश पूनियां राज्य बीजेपी में नए ‘चाणक्य’ बनकर उभरे हैं।

भाजपा के राज्य में सभी छोटे-बड़े नेताओं के साथ संगठन की चर्चा, फैसले और सभी राजनीतिक गतिविधियों में डॉ. पूनियां की लीडरशिप होना और केंद्रीय नेतृत्व के तमाम दिशा-निर्देश लेकर राज्य संगठन को फिर से मजबूती की ओर ले जाने में भी अध्यक्ष आशानुरूप सफल हो रहे हैं।

सूत्र बताते हैं कि अबतक केंद्र में भाजपा के पूर्व अध्यक्ष अमित शाह को चाणक्य की उपाधि दी जाती है, लेकिन दिसम्बर 2018 के चुनाव में सत्ता से बाहर होकर लगभग चुप्पी साधे बैठीं वसुंधरा राजे की गैर मौजूदगी का भरपूर लाभ लेने वाले डॉ. पूनियां ने न केवल पार्टी को कम समय में फिर से मुकाबले में लाकर चाणक्य बनकर उभर रहे हैं, जिसके चलते राज्य की अशोक गहलोत सरकार की चूलें हिलाकर रख दी हैं।

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संगठन के कार्यकलापों से लेकर राज्य की सत्ता से सीधी टक्कर ले राज्य भाजपा में नम्बर एक का दर्जा हासिल कर चुके संघ पृष्ठभूमि और आरएसएस के चहेते माने जाने वाले डॉ. पूनियां अब भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा और मोदी-शाह की जोड़ी के समक्ष भी आरएसएस की विचारधारा का अक्षरसः पालन कर ‘सबसे बेस्ट’ की स्थिति हासिल करते नजर आ रहे हैं।

इस दौरान राज्य भाजपा में उनके सबसे खास सहयोगी बने हैं उपनेता प्रतिपक्ष राजेन्द्र सिंह राठौड़। लगभग हर फैसले के पहले-बाद और हर कार्य में साथ खड़े दिखने वाले राठौड़ को भाजपा के कार्यकर्ता अध्यक्ष का सबसे खास सलाहकार बोलने लगे हैं।

यह बात सही है कि उनको डॉ. पूनियां का करीबी कहलाना भी पसंद है। ऐसे में ऊपर जहां डॉ. पूनियां राष्ट्रीय नेतृत्व के साथ कदमताल कर राज्य के दिन-दिन बेहतर बनते जा रहे हैं, वहीं राठौड़ भी अपने अध्यक्ष के लगभग खास बनकर खुश नजर आ रहे हैं।

बहरहाल, राज्य में इन्हीं दोनों नेताओं के द्वारा हर मुद्दे पर कांग्रेस पर ताबड़तोड़ हमले हो रहे हैं। राज्य की सरकार को एक तरह से देखा जाए तो सरकार गिराने की रणनीति के तहत पहले चरण में डॉ. पूनियां और उनके सहयोगी राठौड़ ने मिलकर आइसोलेटेड करने में कामयाबी पा ली है।

अगला चरण जो भी हो, किन्तु एक बात तय है कि राज्य भाजपा में डॉ. पूनियां आज की तारीख में नम्बर एक नेता का रुतबा तो हासिल कर ही चुके हैं।

एक बात का यहां जिक्र करना और जरूरी है, जो यह कि जिसकी चर्चा अक्सर भाजपा के कुछ पदाधिकारी और सक्रिय रहने वाले कार्यकर्ता करते रहते हैं, वो यह है कि शायद अब राज्य भाजपा में वसुंधरा राजे की किसी भी रूप में वापसी असम्भव सी नजर आ रही है।

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अगर इसी धारा में राजस्थान भाजपा चलती रही और जिस तरह से डॉ. पूनियां को भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व द्वारा लगभग “फ्री हैंड” देकर कांग्रेस की सरकार को घेरने का कार्य चल रहा, वही चलता रहा तो भले ही अशोक गहलोत सरकार आज नहीं गिरे, लेकिन आने वाले 2023 तक चल पाएगी, इसमें शंका पक्की है।

बीते एक माह से भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं में इस बात की चर्चा है कि राज्य भाजपा अध्यक्ष डॉ. सतीश पूनियां के रूप में पहली बार मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे को चुनौती देने वाला नेता सामने आया है।

कहा तो यह भी जा रहा है कि आने वाले कुछ दिनों में डॉ. सतीश पूनियां की वास्तविक प्रतिभा के सामने आने की संभावना है, जबकि उनकी कार्यकारिणी का गठन होगा और प्रदेश में कोरोना का कहर नियंत्रण में आएगा, तब खुलकर बैटिंग करने पर भाजपा अध्यक्ष के रनों की बौछार से कांग्रेस के नेता अशोक गहलोत कैसे सामना कर पाएंगे?