क्या सत्ता खोने का भय बुद्धि को भी हर लेता है: डॉ. पूनियां

प्रदेश के मुख्यमंत्री के स्वयं को और प्रदेश के उप मुख्यमंत्री सहित अन्य विधायकों एवं मंत्रियों को पुलिस धारा 160 के अंतर्गत दिए गए नोटिस जिसमें राज्य सरकार को राज्य सभा चुनाव के दौरान अस्थिर करने की साजिश के अंतर्गत 124A एवं 120B के नोटिस पर अनुसंधान हेतु बयान के लिए तलब किया है।

बेहद हास्यास्पद एवं अपरिपक्व निर्णय जैसा लगता है, मुख्यमंत्री जो गृहमंत्री भी है पूरा पुलिस महकमा उनके अधीन आता है उनका एक आधिकारी स्वयं के गृहमंत्री को नोटिस देता है, क्या ये पुलिस के अपने विवेक से हो रहा है।

यदि पुलिस इतनी सतर्क थी तो यह राज्य सभा चुनाव के दौरान भी हो सकता था जब मुख्यमंत्री ने 35 करोड़ में विधायकों की खरीद फरोख्त के आरोप लगाए थे और जांच ACB और SOG को दी, चुनाव निकल गए।

पुलिस कुछ स्थापित नहीं कर पाई और जब विपक्ष द्वारा बार बार जवाब मांगा जाने लगा तो आनन फानन में एक एफआईआर दर्ज होती है और दो अड़ने से लोगो की बातचीत को सरकार गिरने का आधार बनाया।

राज्य द्रोह का 124 A का मामला दर्ज करते है ज्ञात की रिपोर्ट में बातचीत का हवाला 13 जून का है और कांग्रेस कि बाड़ाबंदी 9 जून को हो जाती है।

ऐसे में सरकार के बाड़े में से निकलकर कोई सरकार कैसे गिराएगा, दूसरा शायद कांग्रेस अपनी कमजोरी खुद स्वीकार कर रही है कि दो सामान्य लोग उनकी सरकार गिरा सकते हैं।

लेकिन अब तो यह पूरा घटनाक्रम को कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति और अंतर्कलह का कारण है। भाजपा को बार बार बीच में घसीटना जनता का ध्यान बांटने एवं खुद सहानुभूति बटोरने के लिए ऐसा किया।

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वरना क्या यह संभव है कि 1870 में ब्रिटिश हुकूमत ने तो राजद्रोह का कानून बनाया भारतीयों के खिलाफ उसी कानून के कारण यंग इंडिया में लिखने के कारण महात्मा गांधी जी पर राज्य द्रोह का मुकदमा चला तो राजस्थान में गांधी ने ऐसा क्यों किया।

प्रशन है कि वो भी तब जब 2019 में कांग्रेस पार्टी के घोषणा पत्र में 124 ए को ख़तम करने का वायदा किया गया था क्योंकि हार्दिक पटेल, कन्हैया कुमार जैसे आराजक तत्वों पर जब इस कानून का उपयोग हुआ तो सबसे पहले इनके समेत टुकड़े टुकड़े गैंग के साथ कांग्रेस है इस अंग्रेज़ी कानून को खत्म करने के लिए आगे आईं थी।

आज ऐसी राजस्थान में किसी जनविद्रोह की ना लेखनी से ना वाणी से न नीजी कृत्य से ऐसी संभावना है। तो क्या केवल अपनी ही पार्टी के अंतर्विरोध को राज्य द्रोह से जोड़ा जा सकता है?


इस तरीक़े का कृत्य निश्चित रूप से बार बार लोकतंत्र की दुहाई देनेवालों के अंग्रजी हुक़ूमत को याद दिलाते है।