SOG के नोटिस पर अशोक गहलोत ने मीडिया पर उड़ेला मामला

जयपुर। राजस्थान में राजनीतिक जोड़-तोड़ का कार्यक्रम तेजी से आगे बढ़ रहा है। राज्य के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के द्वारा एक दिन पहले भाजपा पर उनके विधायकों की खरीद-फरोख्त करने और उनकी सरकार को गिराने के प्रयास के आरोप लगाते हुए प्रेस वार्ता का आयोजन किया गया था।

उसके बाद जवाब में 2 घंटे बाद भारतीय जनता पार्टी की तरफ से भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष डॉ सतीश पूनियां, विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया और उप नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र सिंह राठौड़ ने प्रेस वार्ता करके पलटवार किया।

आज भी मीडिया के माध्यम से दोनों तरफ से आरोप-प्रत्यारोप का दौर चल रहा है। इस बीच शनिवार को एसओजी के द्वारा खुद मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट के अलावा सरकारी मुख्य सचेतक महेश जोशी को नोटिस देकर पूछताछ के लिए तलब किया गया है।

राजस्थान के लोकतांत्रिक इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है कि यहां के किसी वर्तमान मुख्यमंत्री को एसओजी की तरफ से नोटिस देकर किसी आपराधिक मामले में पूछताछ के लिए बुलाया गया है।

इसको लेकर मीडिया में चल रही तमाम तरह की खबरों से विचलित हुए मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सियासी प्रकरण और दोनों दलों के राजनीतिक जोड़-तोड़ पर वाजिब जवाब देने के बजाय मीडिया के द्वारा उल्टा सीधा लिखा जाना बताकर पूरे मामले को पत्रकारों के ऊपर उड़लने का प्रयास किया जा रहा है।

उन्होंने ट्विटर और फेसबुक पर इसकी तीखी प्रतिक्रिया देते हुए एक तरह से मीडिया को अपनी सीमाओं में रहने की हिदायत दी है। ऐसा लग रहा है कि मुख्यमंत्री को सबसे ज्यादा परेशानी पत्रकारों की सच्च के साथ वास्तविक लिखी जाने वाली खबरों से हो रही है।

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अपने पक्ष में खबरें लिखने के लिए दे चुके हैं चेतावनी

इससे पहले पिछले साल एक पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने राज्य के मीडिया को हिदायत देते हुए कहा था कि “आप लोग हम से ही विज्ञापन लें और हमारे खिलाफ खबरें चलाएं, ऐसा नहीं चलेगा।” उस मामले में गहलोत को भारतीय प्रेस परिषद की ओर से नोटिस मिल चुका है।

अशोक गहलोत ने दी है ऐसी प्रतिक्रिया

“एसओजी को जो कांग्रेस विधायक दल ने बीजेपी नेताओं द्वारा खरीद-फरोख्त की शिकायत की थी उस संदर्भ में मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री, चीफ व्हिप एवम अन्य कुछ मंत्री व विधायकों को सामान्य बयान देने के लिए नोटिस आए हैं। कुछ मीडिया द्वारा उसको अलग ढंग से प्रस्तुत करना उचित नहीं है।‬”

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मीडिया फ्रेंडली कहे जाने वाले गहलोत तिलमिलाए हुए हैं

आमतौर पर मारवाड़ के गांधी और राजस्थान के जननायक की उपाधि अपने कार्यकर्ताओं से लेकर बेहद खुश और प्रफुल्लित रहने वाले मुख्यमंत्री अशोक गहलोत राजस्थान के मीडिया में कथित तौर पर फ्रेंडली व्यवहार किए जाने के लिए जाने जाते हैं। गहलोत को उनके “भक्त मीडिया” द्वारा फ्रेंडली कहकर प्रचारित किया जाता है।

सचिन पायलट ने तोड़ा 22 साल पुराना रिकॉर्ड

राजनीतिक तौर पर देखा जाए तो अशोक गहलोत 1998 में पहली बार मुख्यमंत्री बने थे। तब से लेकर अब तक वर्तमान मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को केवल उप मुख्यमंत्री और प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष सचिन पायलट ही इतने बरसों में पहली बार राजनीतिक चुनौती दे पाए हैं।

भाजपा पर निगाहें, पायलट पर निशाना

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के द्वारा शनिवार को प्रेस कांफ्रेंस का आयोजन किया गया और स्तरहीन भाषा का प्रयोग करते हुए विचलित अवस्था में बातें कही गईं, उसके बाद भाजपा के अध्यक्ष डॉ सतीश पूनियां ने कहा कि “मुख्यमंत्री भले आदमी हैं, लेकिन इतने समय में उन्होंने गहलोत को पहली बार इतना विचलित देखा है।”

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एक ही सवाल, क्या सरकार गिरेगी?

इधर, लगातार तीसरे दिन राजनीतिक गलियारों में इस बात की चर्चा जोरों पर रही कि क्या राजस्थान की कांग्रेस वाली अशोक गहलोत सरकार गिरेगी या फिर बचेगी?