अशोक गहलोत की भाजपा की निगाहें सचिन पायलट पर निशाना

जयपुर। कहीं पर निगाहें, कहीं पर निशाना….. अपने रास्ते का कांटा अर्थात सचिन पायलट को हटाने के लिए अशोक गहलोत के हताशा भरा प्रयास इस उक्ति को स्पष्ट हो जाते हैं और यह सुनिश्चित करने के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं कि उन्हें उप मुख्यमंत्री व प्रदेश अध्यक्ष के साथ सत्ता में लेश मात्र भी भागीदारी नहीं करनी पड़े।

कांग्रेस के मुख्यमंत्री ने आज प्रेस कॉन्फ्रेंस पर भाजपा का हमला बोला और आरोप लगाया कि भाजपा हर एक विधायक को का विधायकों को 10-20 करोड़ देने की पेशकश करके उनकी सरकार को गिराने का प्रयास कर रही है।

हालांकि उन्होंने पूर्व में 25 30 करोड़ देने की बात कही थी गहलोत ने कहा कि सरकार ने जिस बेशर्मी से कर्नाटक में कांग्रेस जनता दल सरकार गिराई थी, मध्यप्रदेश में कांग्रेस सरकार गिराई और गुजरात में एक राज्य सभा सीट जीतने के लिए कांग्रेस के 7 विधायकों को खरीदा था, उसी बेशर्मी से वह राजस्थान में भी पार्टी विधायकों को खरीद कर उनकी सरकार गिराने की कोशिश कर रही है।

लेकिन पार्टी और राजनीतिक हलकों में भारी चर्चा व्याप्त है कि गहलोत सरकार में आखिर क्या चल रहा है? मुख्यमंत्री जो कि गृह मंत्री भी हैं और जिन के दायरे में पुलिस विभाग भी है, ने एक स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप का गठन किया है, इन आरोपों की जांच करने के लिए कि क्या उनके सरकार को अस्थिर किया जा रहा है और विधायकों को पैसा देने की पेशकश की जा रही है।

एसओजी ने दो लोगों को गिरफ्तार किया है, जिनका कथित तौर पर संदिग्ध बैकग्राउंड है और उनकी कोई राजनीतिक पृष्ठभूमि नहीं है। इस प्रकार से एक कहानी गढ़ी गई जिसके लेखक, निर्माता, निर्देशक अशोक गहलोत ही हैं।

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बड़ा सवाल यह है कि जब 9 जून को कांग्रेस विधायक और कांग्रेस को समर्थन दे रहे विधायकों को पहले शिव विलास पैलेस में और उसके बाद जेडब्ल्यू मैरियट रिजॉर्ट में बंद कर दिया गया, जहां इतनी बड़ी तादाद में पुलिसकर्मी थे तो आखिर इतने भारी बंदोबस्त को पार करने पर कोई भी कैसे विधायकों तक पहुंचा वे उन्हें खरीदने की कोशिश की।

मुख्यमंत्री मूर्खतापूर्ण बयान जारी कर रहे हैं और उनके विधायकों को खरीदने के लिए 35 करोड़ रुपये देने की पेशकश की गई थी और मुख्य सचेतक में जोशी पुलिस महानिदेशक और एंटी करप्शन ब्यूरो को शिकायत कर रहे हैं कि राज्य सरकार को गिराने की कोशिश कर रहे हैं।

13 जून को भाजपा का कोई नेता ऐसे ज्यादा कोई नहीं जानता है विधायकों से यह कहते हुए सुना गया है कि मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री के बीच वाले हैं। इस महान रहस्योद्घाटन एसओजी ने एक एफ आई आर दर्ज करवाई है, जिसमें कहा गया है कि मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री के बीच अच्छे संबंध नहीं है।

यह बात पत्रकारों टीवी एंकर और आम लोगों द्वारा कही गई और इतनी गई है और सत्ता के गलियारों में भी यह चर्चा है। गंभीर रूप से सुरक्षित किस राज्य का पता लगाने के लिए एसओजी गठित की गई और इसे फोन टेप करने की अनुमति दी गई है।

सच बात यह है कि एसओजी को कोई भी महत्वपूर्ण जानकारी नहीं मिली है। सिवाय इसके कि सरकार के दोनों दिग्गज नेताओं के बीच गंभीर मतभेद हैं और भाजपा सचिन पायलट को राज्य का मुख्यमंत्री नहीं बल्कि केंद्र में मंत्री बनाएगी।

दूसरे शब्दों में कहें तो एसओजी ने रास्ते पर चल रही इस चर्चा को चुना चुना है। वैसे टाइप की हुई बातचीत के नाम पर दर्शाया था कि सनसनीखेज कहानी गढ़ी जा सके। एक नए उदाहरण शुरू हुआ है सूत्रों के आधार पर एफ आई आर दर्ज की।

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F.i.r. कहती है सूत्रों के अनुसार पता चला है कि हो सकता है 1000 से 2000 करोड़पति की भारी रकम होता कि विधायकों को खरीदा जा सके। सूत्रों से पता चला है कि 30 जून के बाद भाजपा सचिन पायलट का भाग्य बदल सकता है।

और अगले पांच 10 दिनों में राजस्थान के मुख्यमंत्री पद पर शपथ ले सकते हैं और सूत्रों से पता चला है कि निर्दलीय विधायकों से संपर्क साधने के प्रयास किए जा रहे हैं दूसरे शब्दों में कहें तो जो कुछ भी एसओजी को पता चला है वह सूत्रों से पता लगा है।

इसके बाद देर रात मुख्यमंत्री आवास से बयान जारी हुआ कि विधायक चट्टान की तरह एकजुट हैं और भाजपा इन्हें खरीद नहीं सकती है पर यह बताने वाला कोई नहीं है कि क्या वास्तव में विधायक खरीदे और बेचे जा रहे थे जो बात रोचक है वह हैरान करती है कि यह कि f.i.r.।

महेश जोशी उनके आरोपों व उनके सूत्रों का कोई जिक्र नहीं है और सबसे ज्यादा हैरान करने वाली बात यह है कि मुख्य सचेतक महेश जोशी ने 9 जून को एसओजी एंटी करप्शन ब्यूरो के पुलिस महानिदेशक को शिकायत की थी कि विधायकों को खरीदा जा रहा है।

उन्होंने कहा था कि उनके पास इसका सबूत है और किस आधार पर ज्यादा पुलिस बल दिया गया था।

भविष्य में सबूत दिए जाएंगे लेकिन रजिस्टर्ड f.i.r. में जोशी या उनकी शिकायत व सबूतों का जिक्र नहीं है। यह सारा परिदृश्य राज्यसभा चुनाव के बाद रचा गया।

लेकिन जब गहलोत को पहली काल्पनिक फिल्मी पटकथा विफल हुई तो यह सब यह नई फिल्म लेकर आए हैं जिसमें उन सवालों को सुनने करने की कोशिश की गई है जो आरोप लगाए गए थे।

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इस प्रकार यह प्रश्न फिर पैदा होता है कि क्या मैं पूरा जबरदस्त ड्रामा जिसमें कल्पना का याद आवे तथ्य कम थे, सचिन पायलट को पार्टी से विदा करने के लिए ही लिखा गया था।

क्या यह सब कुछ राज्य के पंचायत चुनाव से पहले ही पायलट की रवानगी देखने के लिए किया गया है। सर्वोच्च न्यायालय का आदेश ही पंचायत चुनाव 15 अक्टूबर से पहले पूरे हो जाने चाहिए तथा चुनाव चिन्ह वितरण का काम भी पीसीसी अध्यक्ष ही करेंगे।

राज्य में राजनीतिक नियुक्तियां भी करनी होगी। मंत्री परिषद में भी फेरबदल होना ही है। पायलट बराबर संख्या में, 50:50 में पड़ जाते हैं।

पायलट चाहते हैं कि प्रत्येक नाम पर चर्चा हो तथा राजनीतिक कुछ लोगों को बाहर कर दिया जाए तथा ऐसे लोगों को पद दिया जाए जो जमीनी स्तर पर काम कर रहे हैं और यह चीज गैरों को स्वीकार नहीं है तथा वे अपनी हां में हां मिलाने वालों को पद देना चाहते हैं।

लेकिन क्या कोई मुख्यमंत्री देखना ज्यादा निराश, हताश तथा एक आदमी से इतना भयाक्रांत हो सकता है कि वह अपनी सरकार को हंसी का पात्र बना दें तथा एक आदमी को नीचा दिखाने के लिए ऐसी जगह पर भूतों की कल्पना कर ले, जहां किसी का अस्तित्व भी नहीं है और इसकी जमीनी प्रतिक्रिया बड़ी रहस्यपूर्ण, घबराहट पैदा करने वाली देने वाली है।