मुख्यमंत्री गहलोत ‘‘मुंगेरीलाल के हसीन सपने’’ देख रहे हैं, 2023 में राजस्थान कांग्रेस मुक्त हो जायेगा: डाॅ. पूनियां

मुख्यमंत्री एसओजी और एसीबी के माध्यम से निर्दलीय एवं छोटे दलों के विधायकों को डरा-धमका रहे हैं: डाॅ. पूनियां


मुख्यमंत्री गहलोत विचलित हैं, कांग्रेस सरकार के अन्दर चल रहे झगड़े को नहीं सम्भाल पा रहे हैं: डाॅ. सतीश पूनियां


भाजपा प्रदेशाध्यक्ष पर विशेषाधिकार हनन का कोई मामला नहीं बनता है, उन्होंने किसी विधायक का नाम नहीं लिया: गुलाबचन्द कटारिया


मुख्यमंत्री गहलोत आरोप साबित करें नहीं तो राजनीति करना छोड़ें: कटारिया


मुख्यमंत्री गहलोत ने गद्दार शब्द का प्रयोग किसके लिए किया, बतायें: राजेन्द्र राठौड़


मुख्यमंत्री गहलोत की अस्थिर सरकार है, जो हर तीन महीने में डगमगाती है: राठौड़


जयपुर। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेशाध्यक्ष डाॅ. सतीश पूनियां, नेता प्रतिपक्ष गुलाबचन्द कटारिया एवं उपनेता प्रतिपक्ष नेता राजेन्द्र राठौड़ ने प्रेस काँफ्रेंस को सम्बोधित करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की प्रेस काँफ्रेंस में उनके व्यवहार में हताशा, निराशा और बौखलाहट स्पष्ट तौर पर दिखी, जिसे पूरे प्रदेश की जनता ने देखा।

डाॅ. सतीश पूनियां ने कहा कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की बौखलाहट और हताशा से यह स्पष्ट हो गया है कि कांग्रेस के अन्दर जो अन्तर्कलह और अन्तर्विरोध है उसका ठीकरा वो भाजपा पर फोड़ रहे हैं।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के कुशल नेतृत्व में प्रचण्ड बहुमत के साथ देश के ज्यादातर राज्यों में भाजपा सत्ता पर काबिज होती जा रही है, जिससे परेशान होकर कांग्रेस विचार और व्यवहार से अप्रासंगिक हो गई है।

कांग्रेस सरकार के अन्दर चल रहे अन्तर्विरोध पर डाॅ. पूनियां ने कहा कि मुख्यमंत्री पहली बार इतने विचलित दिखे हैं, वो अपने घर के अन्दर (कांग्रेस सरकार) चल रहे झगड़े एवं आपसी खींचतान को सम्भाल नहीं पा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री लोकतंत्र की हत्या की बात करते हैं, स्वर्गीय इन्दिरा गाँधी के कार्यकाल में देश में आपातकाल लगाया गया और कांग्रेस शासन में अनुच्छेद 356 का 93 बार दुरूपयोग किया गया।

इसलिए मुख्यमंत्री गहलोत का लोकतंत्र पर बोलने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है, क्योंकि लोकतंत्र का अपमान बार-बार कांग्रेस ने ही किया है। भाजपा तो लोकतंत्र को मजबूत करने का काम कर रही है।

डाॅ. पूनियां ने कहा कि 1993-1998 में स्वर्गीय भैरोंसिंह शेखावत जी की लोकप्रिय सरकार को अस्थिर करने की कोशिश की गई, उस समय भजनलाल अटैची लेकर आये थे। उन्होंने कहा कि सन् 2008 और 2018 में बसपा विधायकों के समर्थन से अशोक गहलोत ने ‘‘ऐलिफेन्ट ट्रेडिंग’’ कर सरकार बनाई।

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री गहलोत ने राजस्थान के विधायकों के बारे में कहा कि बकरा मण्डी की तरह यहाँ विधायक खरीदे जा रहे हैं तो वे बतायें कि क्या प्रदेश के विधायक बकरें हैं। हाॅर्स ट्रेडिंग, ऐलिफेन्ट ट्रेडिंग से आगे बढ़कर गहलोत अब बकरा मण्डी की बात करने लगे हैं, जो अशोभनीय और निंदनीय है। मुख्यमंत्री गहलोत ने राजस्थान के विधायकों के लिए नीचतापूर्ण शब्दों का प्रयोग कर उनकी गरिमा का हनन किया है।

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डाॅ. पूनियां ने कहा कि मुख्यमंत्री ने प्रेस काँफ्रेंस में गद्दार शब्द का जिक्र किया है, वे खुलासा करें कि कौन गद्दार हैं। उन्होंने कहा कि राज्यसभा चुनाव में मुख्यमंत्री दम्भ भरते थे, फिर लगभग 10 दिनों तक फाइव स्टार होटल में विधायकों की बाडाबंदी क्यों करवायी।

मुख्यमंत्री ने एसओजी और एसीबी का भय दिखाकर निर्दलीय और छोटे विधायकों को प्रभावित करने की कोशिश की और अभी भी वो ऐसा ही कर रहे हैं। सीपीआईएम के एक विधायक का व्हिप का उल्लंघन कर वोट करना इसका उदाहरण है।

मुख्यमंत्री भाजपा पर विभिन्न राज्यों में सरकार गिराने का आरोप लगाते हैं इस सवाल पर डाॅ. पूनियां ने कहा कि मध्यप्रदेश में ज्योतिरादित्य सिंधिया के भाजपा में शामिल होने पर मुख्यमंत्री गहलोत और उनका पार्टी आलाकमान क्यों परेशान होते हैं, ज्योतिरादित्य सिंधिया को कांग्रेस में अपमानित किया गया, इसके बाद वे भाजपा में शामिल हुए और उन्हें पूरा सम्मान दिया गया। वे आज हमारी पार्टी के सम्मानित सांसद हंै।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की विफलता और कोरोना प्रबंधन में विफलता को छुपाने और ध्यान बंटाने के लिए मुख्यमंत्री गहलोत एसओजी, एसीबी इत्यादि एजेंसियों के माध्यम से निर्दलीय और छोटे दलों के विधायकों को ड़राने-धमकाने का काम कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि पुलिस और एजेंसियों को अपराध की रोकथाम में लगाना चाहिए, लेकिन मुख्यमंत्री गहलोत ने इन एजेंसियों को फोन टैपिंग और जासूसी करने में लगा रखा है।

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत कभी विधायकों की कीमत 35 करोड़ लगाते हैं तो कभी 20-25 करोड़ लगाते हैं, वे राहुल गाँधी से मार्गदर्शन ले लिया करें कि उनको क्या बयान देना है।

उन्होंने कहा कि कोरोना काल के 100 दिनों में मुख्यमंत्री के गृहजिले जोधपुर की जनता त्राहि-त्राहि कर रही है, लेकिन मुख्यमंत्री वहाँ अभी तक सुध लेने नहीं पहुँचे हैं और ना ही प्रदेश के किसी जिले में वो आमजन की सुध लेने पहुँचे हैं।

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री गहलोत 2023 में फिर सरकार बनाने की बात करते हैं, ये ‘‘मुंगेरीलाल के हसीन सपने’’ जैसा है। 2023 में राजस्थान कांग्रेस मुक्त हो जायेगा।

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डाॅ. पूनियां ने कहा कि राजस्थान में अराजकता, भ्रष्टाचार, अपराध पर बोलने से मुख्यमंत्री बचते हैं। इन मुद्दों की तरफ इनका कोई ध्यान नहीं है। प्रदेश की जनता तीन महीने के बिजली-पानी के बिल माफ करने की मांग कर रही है।

साथ ही स्कूलों की फीस को लेकर भी समाधान निकालने की मांग की जा रही है, लेकिन मुख्यमंत्री गहलोत जनहित के मुद्दों का समाधान करने के बजाय सरकार के अन्दर चल रहे अन्तर्कलह, अन्तर्विरोध और सरकार की पौने दो साल की विफलता को छुपाने के लिए भाजपा पर झूठा आरोप लगाकर जनता का ध्यान भटकाने में लगे हुए हंै।

नेता प्रतिपक्ष गुलाबचन्द कटारिया ने कहा कि निर्दलीय विधायक ने हमारे प्रदेशाध्यक्ष डाॅ. सतीश पूनियां के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का पत्र दिया, जिसमें उन्होंने 23 विधायकों की बात कही है।

लेकिन प्रदेशाध्यक्ष ने अपने बयान में किसी भी विधायक का नाम नहीं लिया है और ऐसे में विशेषाधिकार हनन का कोई मामला बनता ही नहीं है एवं उन्होंने जो बयान दिया था वो सदन के अन्दर नहीं बाहर दिया था। उन्होंने कहा कि हमने भी मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का पत्र दिया है।

कटारिया ने कहा कि प्रेस काँफ्रेंस में मुख्यमंत्री हताश दिखे और उनकी कही गई बातों को पूरे प्रदेश की जनता ने देखा कि मुख्यमंत्री नीचता पर उतर आये हैं।

उन्होंने कहा कि राज्यसभा चुनाव के दौरान जिन विधायकों ने उनकी पार्टी को समर्थन दिया, उनसे उनकी क्या बात हुई, उनको क्या प्रलोभन दिया गया, वे इस बारे में प्रदेश की जनता को बतायें।

उन्होंने कहा कि विधायकों की कोहनी में जो गुड़ लगाया है यानि उनको जो लोभ-लालच दिया है उनको सम्भालना मुख्यमंत्री गहलोत के लिए टेढ़ा साबित होता जा रहा है। ऐसे मुख्यमंत्री पहले अपना घर सम्भालें और भाजपा पर झूठे आरोप लगाना बंद करें।

कटारिया ने कहा कि मुख्यमंत्री एसओजी और एसीबी की कार्यवाही करवायें, हमें किसी बात का डर नहीं है। कांग्रेस में अन्दरखाने जो अन्तर्कलह चल रही है उसे मुख्यमंत्री सम्भाल नहीं पा रहे हैं। ऐसे में वे भाजपा पर झूठे आरोप लगा रहे हैं।

मुख्यमंत्री गहलोत को मैं चुनौती देता हूँ कि जो उन्होंने भाजपा पर आरोप लगाये हैं, उन्हें वे साबित करके बतायें। अगर आरोप साबित होते हैं तो मैं राजनीति छोड़ दूंगा और अगर आरोप साबित नहीं होते हैं तो मुख्यमंत्री गहलोत राजनीति छोड़ें।

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उपनेता प्रतिपक्ष राजेन्द्र राठौड़ ने कहा कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने हल्के शब्दों का प्रयोग किया है, बहुत ही नीचता की है। बकरामण्डी जैसे शब्दों का प्रयोग कर उन्होंने प्रदेश के सभी विधायकों का अपमान किया है।

मुख्यमंत्री ने विधायकों की तुलना बकरामण्डी और बकरों से की हैं, जिसकी मैं कड़ी निन्दा करता हूँ और इससे यह साफ जाहिर हो गया है कि मुख्यमंत्री गहलोत अपना मानसिक सन्तुलन खो बैठे हैं।

 उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री गहलोत ने आज तक एक भी आन्दोलन का नेतृत्व नहीं किया और ना ही किसी आन्दालेन में शामिल हुए। लेकिन वे कांग्रेस के दिल्ली दरबार में हाजिरी लगाकर सत्ता के शीर्ष पद पर बने रहते हैं और प्रदेश में उनकी पार्टी का कोई नेता उनका विरोध करता है तो उसको हाशिये पर रखते हैं।

राठौड़ ने कहा कि कांग्रेस सरकार में इस कदर गुटबाजी, अन्तर्कलह है कि मुख्यमंत्री गहलोत अपनी सरकार बचाने में लगे हुए हैं।

उनकी पार्टी के दर्जनों  विधायक उनके नेतृत्व (अशोक गहलोत) के खिलाफ विधानसभा से लेकर कार्यक्रमों में बोल चुके हैं, जिससे स्पष्ट तौर पर सरकार बँटी हुई है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने गद्दार शब्द का प्रयोग किसके लिए किया, वे बतायें।

उन्होंने कहा कि भाजपा प्रदेशाध्यक्ष डाॅ. पूनियां ने बसपा विधायकों को लेकर जिस ऐलिफेन्ट ट्रेडिंग की बात की, ऐसा मुख्यमंत्री गहलोत 2008 में कर चुके हैं और 2018 में भी किया है और राज्यसभा चुनाव में भी ऐसी बातों की चर्चा रही।

उन्होंने कहा कि गाँव-ढ़ाणियों में भी यह चर्चा है कि प्रदेश कांग्रेस सरकार बँटी हुई है, तो यह सिर्फ हम नहीं कह रहे प्रदेश की जनता भी इस बात से वाकिफ है।

उन्होंने कहा कि दो व्यक्तियों की बातचीत को टैप करवाकर हमारी पार्टी पर झूठे आरोप लगाकर मुख्यमंत्री गहलोत अपनी पार्टी अन्तर्कलह से ध्यान बँटाना चाहते हैं।

राठौड़ ने कहा कि यह बिना बुनियाद की सरकार है, अस्थिर सरकार है और यह हर तीन महीने में डगमगाती है। गहलोत सरकार कोरोना प्रबंधन में पूरी तरह से फेल हो चुकी है, मुख्यमंत्री से लेकर इनकी सरकार का कोई भी मंत्री कोरोना काल में जनता की सुध लेने के लिए उनके पास नहीं पहुँचे।

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री गहलोत ने निर्दलीयों और अन्य दलों के विधायकों को डराने-धमकाने के लिए एसओजी और एसीबी के जरिए यह पटकथा लिखी है, जिससे विधायकों के विद्रोह को रोका जा सके।