CM अशोक गहलोत और BJP अध्यक्ष डॉ. सतीश पूनियां की जा सकती है विधायकी!

जयपुर। राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. सतीश पूनियां की विधायकी जाने का खतरा उत्पन्न हो गया है। दोनों के खिलाफ विधानसभा अध्यक्ष के समक्ष विशेषाधिकार हनन का प्रस्ताव दिया गया।

कांग्रेस समर्थित निर्दलीय विधायक संयम लोढ़ा के द्वारा भाजपा अध्यक्ष के खिलाफ और भारतीय जनता पार्टी की तरफ से नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया के द्वारा मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का प्रस्ताव दिया गया है।

पिछले महीने 19 तारीख को राजस्थान की तीन राज्यसभा सीटों के लिए हुए मतदान के दौरान राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बाद पहले कांग्रेस की तरफ से भाजपा के अध्यक्ष के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का प्रस्ताव दिया गया।

इसके बाद आज मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के खिलाफ भारतीय जनता पार्टी की तरफ से भी विशेषाधिकार हनन का प्रस्ताव दिया गया है।

बता दें कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के द्वारा राज्यसभा चुनाव के दौरान भारतीय जनता पार्टी पर आरोप लगाया था कि कांग्रेस विधायकों को अपने पक्ष में मतदान के लिए भाजपा के लोग 35 करोड़ रुपये का ऑफर दे रहे हैं।

उसके बाद भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. सतीश पूनियां के द्वारा मुख्यमंत्री अशोक गहलोत पर 24 विधायकों को खान आवंटन, रिको में प्लॉट के आवंटन और केस ट्रांजैक्शन का आरोप लगाया गया था।

संवैधानिक तौर पर राज्य विधान सभा के सदस्यों और संसद के सांसदों को कुछ अधिकार दिए गए हैं, जिनके तहत उनके अधिकारों का हनन होने पर विधानसभा अध्यक्ष और लोकसभा अध्यक्ष को विशेषाधिकार हनन का प्रस्ताव दिया जा सकता है।

विधानसभा अध्यक्ष और लोकसभा अध्यक्ष के द्वारा प्रस्ताव की जांच की जाती है। एक कमेटी का गठन किया जाता है जो प्रकरण की जांच करने के बाद संबंधित व्यक्ति को नोटिस देकर तलब करती है। वहां पर जांच-पड़ताल होने के बाद यदि मामला विशेषाधिकार हनन का पाया जाता है तो संबंधी सदस्य की सदस्यता खत्म हो सकती है।

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जिस तरह से मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और भाजपा के अध्यक्ष डॉ. सतीश पूनियां के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का प्रस्ताव दिया गया है। यदि दोनों के खिलाफ मामला सही पाया जाता है तो मुख्यमंत्री और भाजपा के अध्यक्ष, दोनों की विधानसभा की सदस्यता खत्म हो सकती है।

इसके साथ ही विधानसभा अध्यक्ष के विवेक पर है कि नाम लेकर सही पाए जाने के बाद कुछ समय के लिए दोनों को निलंबित किया जा सकता है या फिर एक सत्र के लिए सस्पेंड कर सजा दी जा सकती है।