जेब ढीली करने को तैयार हो जाओ, आपके घर में लगेगा 10 गुणा महंगा 8000 रुपये का स्मार्ट मीटर

जयपुर। आपके घर में वर्तमान में जो ₹800 का बिजली का मीटर लगा हुआ है, वह जल्दी ही बदल कर ₹8000 वसूलने की तैयारी की जा रही है।

राजस्थान की सरकार ने वसुंधरा सरकार के फैसले पर उठे सवालों को साइडलाइन करते हुए अंतिम 6 महीने में किए गए 1067 में से 1059 फैसलों को क्लीन चिट दे दी है, जिनमें स्मार्ट मीटर लगाना भी एक है।

राजस्थान में वसुंधरा राजे सरकार ने 2018 विधानसभा चुनाव से पहले जमीन आवंटन सहित कई नीतिगत फैसले किए थे और उन फैसलों का कांग्रेस नेताओं ने भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए सवाल खड़े किए थे और कहा था कि कांग्रेस की सरकार आते ही इन फैसलों की समीक्षा की जाएगी।

समीक्षा का मतलब यह होता है कि इन फैसलों को या तो बदला जाएगा या फिर रद्द किया जाएगा या फिर फैसलों को लेकर जो आरोप लगाए गए थे उन्हें साबित किया जाएगा।

वसुंधरा राजे सरकार का ऐसा ही एक अहम फैसला था 10 गुना अधिक महंगे स्मार्ट मीटर लगाना। अब जब राजस्थान में कांग्रेस की सरकार है और मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई है।

ऐसे में समीक्षा के लिए किए गए फैसलों को लागू किया जाना सवाल खड़े करता है कि क्या समीक्षा मात्र बहाना था? यह बात कांग्रेस के अंदर भी लगातार चर्चा को गर्म कर रही है, क्योंकि कांग्रेस सरकार की ओर से गठित सब कमेटी ने वसुंधरा राजे सरकार के अंतिम 6 महीने के 1067 में से 1059 भी दे दी।

फिर तो क्या यह माना जाए कि वसुंधरा राजे सरकार ने अंतिम फैसले किए सरकार की नजरों में सही थे? 2018 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की सरकार आई तो मंत्रिमंडल गठन के साथ सरकार ने यूडीएच मंत्री शांति धारीवाल की अध्यक्षता में एक कमेटी कैबिनेट सब कमेटी बनाकर राज्य सरकार के अंतिम 6 महीने के तमाम फैसलों की समीक्षा करने का काम सौंपा गया था।

यह भी पढ़ें :  बबीता की मौत का मामला गर्माया, सरकार को दिया 7 दिन का अल्टीमेटम

उस कमेटी की बैठकें हुई और उन फैसलों को लेकर चर्चा हुई, लेकिन वसुंधरा राजे सरकार के अधिकांश फैसलों में कमेटी ने क्लीन चिट दे दी।

ऐसा ही एक मामला आया है राजस्थान में 500 करोड रुपए खर्च करके स्मार्ट मीटर लगाए जाएंगे। यह फैसला वसुंधरा राजे सरकार ने लिया था और उस दौरान हुए टेंडरों पर कांग्रेस ने सवाल खड़े किए थे।

आबकी सरकार में बिना कोई टेंडर आमंत्रित किए हुए पुरानी दरों को ही मंजूरी दे दी गई है और स्मार्ट मीटर की खरीद भी उन्हीं जीनस पावर इन्फ्राट्रक्चर और सिक्योरिटी मीटर कंपनी से की जाएगी।

यानी कि जो फैसला समीक्षा के लिए गया फैसला कैबिनेट सब कमेटी भंग होने के बाद लागू किया जा रहा है। स्मार्ट मीटर लगाने का फैसला भी ऐसा है, इसका असर सीधा जनता की जेब पर पड़ने वाला है।

इसका कारण यह है कि एक स्मार्ट मीटर की खरीद ₹8000 की होगी और यह स्मार्ट मीटर वर्तमान में चल रहे सिंगल फेज मीटर, जिसकी कीमत ₹800 और 3 फेज मीटर, जिनकी कीमत ₹1500 होती है के स्थान पर होगा।

अब सवाल ये उठता है कि ₹800 की कीमत के वर्तमान स्थान पर ₹8000 की स्मार्ट खरीदा जाएगा तो उसका भार जनता की जेब पर पड़ना निश्चित है, क्योंकि राजस्थान की जो बिजली कंपनियां घाटे और कर्ज का रोना रोती हैं।

वर्तमान में ₹800 के स्थान पर ₹8000 खर्च होगा जनता को राहत देने की जाए और फिर मौका आने पर जनता की जेब ढीली की जाए। यहां सवाल यह भी है कि स्मार्ट में खरीदना जरूरी था तो फिर नए टेंडर आमंत्रित किए गए हो सकता है कि न होने से कम दरों पर उपलब्ध हो जाए।

यह भी पढ़ें :  Airtel,Vodafone Idea, Jio के New Plan Offers, किस Plan में मिल रहा ज्यादा Data, Free कॉलिंग-

ऐसा नहीं होना भी स्मार्ट मीटर की खरीद के मामले में सवाल खड़े करता है। यह मामला सिर्फ नीतिगत नहीं है, बल्कि राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण है क्योंकि एक तो यह फैसला भाजपा सरकार के समय का है और शर्तें तथा भी वही है, जो उस समय तय की गई थी।

सब कुछ वैसा ही हो रहा है, जैसा कि पिछली सरकार तय करके गई थी तो फिर कैबिनेट सब कमेटी ने समीक्षा के नाम पर क्या किया या फिर यूं कहा जाए कि वसुंधरा राजे सरकार के फैसलों पर चुनाव के समय अंगुली उठाना और फिर सब कमेटी बनाकर उन पैसों को क्लीन चिट दे देना सिर्फ एक राजनीतिक स्टंट था।