5 महिलाओं की मौत के बाद भी नहीं जागी सरकार

जयपुर। पूर्व चिकित्सा मंत्री, विधानसभा में उपनेता प्रतिपक्ष और चूरू से विधायक राजेंद्र सिंह राठौड़ ने चिकित्सा मंत्री रघु शर्मा को पत्र लिखकर नसबंदी शिविरों में अव्यवस्थाओं अप्रशिक्षित शिक्षकों व आपराधिक लापरवाही के कारण मृत्यु दर मुआवजा राशि दिलाए जाने और दोषियों को सख्त सजा के लिए कार्रवाई किए जाने को लेकर पत्र लिखा है।

राठौर ने लिखा है कि “मैं इस पत्र के साथ सलंग्न कर 6 जुलाई और 7 जुलाई 2020 को समाचार पत्रों में प्रकाशित छाया प्रति प्रेषित कर रहा हूं। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग का परिवार नियोजन एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय कार्यक्रम है तथा प्रति वर्ष पूरे राजस्थान के सभी जिलों में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग खुद व स्वयंसेवी संस्थाओं के माध्यम से महिला एवं पुरुष नसबंदी शिविरों का आयोजन करता है तथा शिविरों में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग द्वारा विस्तृत दिशा-निर्देश भी समय-समय पर जारी किए जाते रहे हैं।

दुर्भाग्य है कि इस प्रकार के राष्ट्रीय कार्यक्रम में विभागीय उदासीनता और पर्यवेक्षण के अभाव में न केवल परिवार नियोजन के लिए आयोजित शिविरों में विभाग द्वारा जारी प्रोटोकॉल की पालना होती है तथा ही आवश्यक प्रशिक्षित सर्जन और पैरामेडिकल स्टाफ तैनात किया जाता है, जिसका परिणाम यह रहा कि विगत 1 सप्ताह में सरदारशहर चूरू के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में आयोजित शिविर में नैना देवी पत्नी दीप सिंह की मौत आपराधिक लापरवाही के कारण हुई।

वहीं दूसरी घटना में सूरतगढ़ चिकित्सालय में शारदा देवी पत्नी आत्माराम और संतोष देवी पत्नी राम की मृत्यु हो गई, जिसके कारण चुरू जिले में पूर्व विभाग द्वारा निर्धारित शिविरों को स्थगित करना पड़ा।

यह भी पढ़ें :  अस्पताल रोड या गांधी नगर में बनेगा कांग्रेस कार्यालय, डोटासरा के कार्यकाल में बन जायेगा नया भवन

दुर्भाग्य है कि सरदारशहर चूरू में आयोजित नसबंदी शिविर में संबंधित एनजीओ पैरामेडिकल समिति के द्वारा प्रशिक्षित सर्जन एनेस्थेटिक तथा सेट किए बिना ऑपरेशन थिएटर में ऑपरेशन किए गए और जिस चिकित्सक के निर्देशन में ऑपरेशन किए गए मात्र बीएमएस योग्यताधारी थे।

चूरू में नसबंदी शिविर में महिला की मृत्यु होने के कारण प्रशासन द्वारा जांच किए जाने से भी आवश्यक पीड़ित परिवार को उचित मुआवजा दिए जाने पर भी की जा रही है।

वहीं सूरतगढ़ में 48 डिग्री तापमान के इंतजाम के राज्य सरकार द्वारा जारी दिशा निर्देश की धज्जियां उड़ाते हुए महिलाओं की मृत्यु के बाद सूरतगढ़ को मात्र आदेशों की प्रतीक्षा में कर इतिश्री कर ली गई है तथा कोई भी प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई।

विगत 1 सप्ताह बीकानेर संभाग में परिवार नियोजन शिविर में 3 महिलाओं की मृत्यु हुई है। पूरे राज्य में आयोजित होने वाले परिवार नियोजन शिविर की हालत इसी प्रकार बद से बदतर हैं। निर्धारित प्रोटोकॉल की पालना कहीं भी प्रभावी रूप से नहीं होती जाती है।

खेद की बात यह है कि ऑपरेशन के लिए आवश्यक टेलिस्कोप सहित अन्य महत्वपूर्ण उपकरणों का हर शिविर में लगातार अभाव में प्रशिक्षित सर्जन, एनेस्थेटिक की अनुपस्थिति में मापदंडों की पूर्ति के ऑपरेशन करने के कारण हजारों महिलाओं की जीवन पर इस प्रकार के शिविर में संकट मंडराता रहता है।

मेरा आग्रह है कि सरदारशहर चूरू श्रीगंगानगर में लापरवाही करने वाले चिकित्सक के विरुद्ध सख्त कार्रवाई करते हुए पीड़ित परिवारों को 25-25 लाख रुपए की का मुवावजा दिया जाए और भविष्य में लगने वाले शिविरों में पर्याप्त व्यवस्था और विभागीय निर्देशों की पालना सुनिश्चित कराने की कृपा करें।

यह भी पढ़ें :  राजस्थान पुलिस मुख्यालय में मचा हड़कम्प, पीएचक्यू (PHQ) को किया बंद

खेद की बात यह है कि जहां कोविड-19 के मरीजों की संख्या 2204 हो गई है तथा मरने वालों की संख्या 482 पर पहुंच गई है, वहीं पर लापरवाही के कारण 10 दिन पूर्व स्वास्थ्य केंद्र में प्रसव पीड़ा से पीड़ित महिला को जबरन बाहर निकालने विभाग पर काला धब्बा है। आशा है कि आप मेरे इस पत्र का संज्ञान लेकर मेरे द्वारा उठाए गए बिंदुओं पर आवश्यक कार्रवाई करेंगे।