अशोक गहलोत के आगे झुके अविनाश पांडे, समन्वय समिति की बैठक क्यों नहीं कर पा रहे हैं?

जयपुर। अविनाश पांडे राजस्थान कांग्रेस की समन्वय समिति की मीटिंग आयोजित क्यों नहीं कर रहे हैं?

इस मीटिंग में विभिन्न बोर्डों के अध्यक्ष व सदस्यों के लिए प्रस्तुत किए जाने वाले नामों के गुण अवगुण पर सोच-विचार आकलन चर्चा की जाएगी, क्योंकि बोर्डों के अध्यक्ष व सदस्यों की नियुक्ति प्रक्रिया राज्य में कांग्रेस की सरकार के घटित होने के बाद से ही लंबित है।

यह सर्वविदित है कि अविनाश पांडे अशोक गहलोत के “यश मैन” हैं और उन्हीं के दिए गए निर्देशों पर काम करते हैं। अशोक गहलोत का प्लान क्या है तथा वे बोर्डों के अध्यक्ष और सदस्यों को पूरी नियुक्ति प्रक्रिया में क्यों विलंब कर रहे हैं?

ज्ञातव्य है कि राजस्थान के गठन के दौरान अशोक गहलोत मुख्यमंत्री बनाए गए थे, तब यह राहुल गांधी का आदेश था कि मंत्रालयों का गठन 50-50% फार्मूले के आधार पर होगा, अर्थात मंत्रिमंडल में अशोक गहलोत के प्रति निष्ठावान लोग होंगे और सचिन पायलट के 50% निष्ठावान और इस फार्मूले में कोई बदलाव नहीं हुआ है।

पार्टी के उच्च पदस्थ सूत्र कहते हैं कि नई नियुक्तियों में भी 50% का फार्मूला जारी रहेगा, यह बात गहलोत को नहीं जंचती है और वे अपनी तरफ से यह हर संभव प्रयास कर रहे हैं कि सचिन पायलट को एक व्यक्ति एक पद के फार्मूले के तहत प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष पद से हटा दिया जाए, ताकि पार्टी और सरकार पर उनका पूर्ण नियंत्रण सुनिश्चित हो सके।

इसके साथ ही गहलोत की जनसंपर्क मशीनरी ने यह प्रचारित कर दिया है कि मंत्रिमंडल फेरबदल में भी सीएम गहलोत का ही दखल रहेगा।

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इसलिए मंत्रालय में समायोजित नहीं किया गया, उन्हें बोर्ड के अध्यक्ष पदों पर समायोजित किया जाएगा।

नवीनतम खबरों के अनुसार अशोक गहलोत ने कम से कम 50 लोगों से वादा किया है कि उन्हें मंत्री बनाया जाएगा, जबकि अब सिर्फ पांच मंत्री पद ही रहते हैं।

इसके लिए उन्हें खुद के निष्ठावान मंत्रियों को पद से हटाना पड़ेगा, क्योंकि सचिन पायलट के निष्ठावान को नहीं हटा सकते और ऐसा करना उन्हें मुसीबत में डालेगा, खासतौर से जब अशोक गहलोत को दिल्ली स्थित कांग्रेस हाईकमान से मुलाकात का समय नहीं मिल रहा है।

इस बात की अटकलें जोरों पर है कि एआईसीसी के शायद जल्दी ही होने वाले फेरबदल में अविनाश पांडे को पद से हटाया जा सकता है, क्योंकि पांडे का गहलोत को एकतरफा समर्थन पार्टी को महंगा पड़ रहा है।

अशोक गहलोत विधायकों से बात करके उन्हें आश्वस्त कर रहे हैं कि उनका ध्यान रखा जाएगा। गहलोत पायलट की निष्ठा वालों को भी मलाईदार पदों का प्रलोभन देकर तोड़ने की कोशिश कर रहे हैं।

इस बीच राजस्थान कांग्रेस में राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं, क्योंकि एक अनुग्रहकारी ने यह प्रचारित कर दिया है कि अगले 10 दिन में वार्डों के अध्यक्षों व सदस्यों को नियुक्ति कर दिया जाएगा तथा वे कार्रवाई जल्दी पूर्ण हो जाएगी।

लेकिन वास्तविकता यह है कि जब तक समझ में समिति की बैठक नहीं हो जाती है और नामों पर मुद्दों पर चर्चा नहीं हो जाती है, घिसे-पिटे गहलोत स्थिति में जोड़ तोड़ नहीं कर सकेंगे, जैसा कि वे गंभीरता से कर रहे हैं।

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