किसानों को लेकर राज्य सरकार पूरी तरह से नक्कारा साबित हुई, अनशन पर क्यों बैठा है अन्नदाता?

जयपुर।

चना खरीद को लेकर किसान सरकार के सामने खड़ा है, किन्तु कोई सुनने वाला नहीं है। अजमेर रोड पर किसानों के 5 किलोमीटर लंबे रैली को देखकर सरकार ने दिल्ली की ओर कूच करने वाले किसानों को पुलिस प्रशासन द्वारा रोक दिया है।

भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. सतीश पूनियां का कहना है कि राज्य सरकार किसानों के मामले में पूरी तरह उदासीन है और तमाम तरह के वादों से पहले ही मुकर चुकी है, किसान और सड़क पर है, केंद्र सरकार के ऊपर सारी जिम्मेदारी डालने का प्रयास कर रही है खुद के ऊपर कोई भी दायित्व नहीं लेना चाहती है।

राष्ट्रीय किसान महापंचायत के अध्यक्ष रामपाल जाट ने बताया कि पुलिस प्रशासन द्वारा रोकने की वजह तक भी नहीं बताई गई, शांति पूर्वक रास्ते पर चलना सभी का व्यक्तियो का अधिकार है, परंतु पुलिस प्रशासन की हठधर्मिता के कारण किसानों को बेवजह परेशान किया गया।

किसानों का कहना है कि पुलिस के इस रवैया के कारण किसान महापंचायत के राष्ट्रीय अध्यक्ष रामपाल जाट को अनशन का रास्ता चुनना पड़ा, आज किसानों की व्यथा सुनने वाला कोई नहीं बचा है।

जाट का कहना है कि विधायक, सांसद का चुनाव होता है तो नेता लोग किसानों के हितों के लिए बड़ी-बड़ी बातें करते रहते हैं, परंतु सरकार के अंदर जाकर किसान को भूल जाते हैं।

इसके बाद किसान नेता रामपाल जाट 8 जुलाई 2020 को सुबह 11:00 बजे अनशन पर बैठ गए। पुलिस प्रशासनिक अधिकारियों को बार-बार पूछा गया कि हमें आप किस अधिकार के तहत रोक रहे हो, किस आदेश पर रोक रहे हो? अधिकारियों द्वारा किसी भी प्रकार का उत्तर नहीं मिला।

यह भी पढ़ें :  7 लाख पैंशनर्स को दवा नहीं, डॉ. सतीश पूनियां ने पत्र लिखकर मुख्यमंत्री को चेताया

उसके बावजूद भी पुलिस अधिकारियों द्वारा किसानों दिल्ली कूच करने से रोका गया। जाट का कहना है कि सरकार ने 20% अगर अधिक रजिस्ट्रेशन किया है तो फिर उसकी खरीद क्यों नहीं की जा रही है?

सहकारिता मंत्री उदयलाल आंजना का कहना है कि राज्य सरकार ने गलती से 20 फ़ीसदी अधिक रजिस्ट्रेशन कर दिया है, इसके चलते दिक्कत हो रही है।

इसको लेकर जाट का कहना है कि सरकारी स्तर पर यदि कोई गलती हुई है तो उसका भुगतान सरकार को करना चाहिए, जबकि अभी तक भी केंद्र सरकार के नियमों के मुताबिक नोडल एजेंसी होने पर भी राज्य सरकार ने 25% खरीद नहीं की है।