कलेक्टर बोले: ‘जनरल कास्ट के सफाइकर्मी न तो सफाई करते हैं और न ही करेंगे’

jagroop singh yadav ias
jagroop singh yadav ias

—जिला कलेक्टर ने सफाई व्यवस्था पर खड़ा किया प्रश्नचिन्ह, बोले: चुनाव का फूल खिलना बाकी है।

जयपुर।

जिला कलेक्टर जगरूप सिंह यादव ने शहर के सफाई तंत्र पर बड़ा प्रश्नचिन्ह लगाया है। यादव से पूछा गया था कि चुनाव ड्यूटी में लगे सफाईकर्मियों को रिलीव क्यों नहीं किया जा रहा है?

https://youtu.be/V1nW6FfRusM

जवाब में यादव ने ही सवाल दाग दिया कि आप कितना जानते हैं, सफाईकर्मियों को? इनमें से एक भी सफाई नहीं करता है। नगर निगम के पास सफाईकर्मी फालतू पड़े हैं।

‘ये सब जनरल कास्ट के सफाईकर्मी हैं। इन सफाईकर्मियों ने आज तक न तो सफाई की है और न ही करेंगे।’

यादव ने कहा कि यदि निगम को सफाईकर्मियों की जरूरत है तो वह हमसे मांग ले। हम उन्हें वापस कर देंगे। अभी चुनावी प्रक्रिया पूरी नहीं हुई है।

https://youtu.be/c0vK3Dwyq2Y

‘चुनावों का फूल तो अभी खिलना बाकी है।’ चुनाव आचार संहिता 23 तक है और चुनावी प्रक्रिया 27 मई तक जारी रहेगी।

उन्होंने कहा कि अभी चुनावी प्रक्रिया पूरी नहीं हुई है। ‘चुनावों का फूल तो अभी खिलना बाकी है’ चुनाव आचार संहिता 23 तक है और चुनावी प्रक्रिया 27 मई तक जारी रहेगी।

ऐसे में यह नहीं कह सकते हैं कि चुनाव हो चुके हैं। इन कर्मचारियों को रिलीव किया जाए। जिसके चलते शहर की सफाई पटरी पर लौटने वाली नहीं है।

उल्लेखनीय है कि पूरे विश्व में विरासत पर्यटन के लिए मशहूर जयपुर शहर बदहाल सफाई व्यवस्था से जूझ रहा है। जगह जगह कुत्तों के काटने से जनता परेशान है।

https://youtu.be/IgMNoeAUfrk

स्वायत्त शासन विभाग की ओर से आए दिन आदेश निकाले जा रहे हैं कि सफाईकर्मी के रूप में भर्ती हुए कर्मचारियों को सिर्फ सफाई कार्य में ही लगाया जाए।

यह भी पढ़ें :  सचिन पायलट को भी पता नहीं अशोक गहलोत कौन हैं?

इसके बावजूद प्रशासन में बैठे उच्चाधिकारी ही सामान्य व अन्य वर्गों और वाल्मिकी समाज से आने वाले सफाईकर्मियों के बीच कार्य के विभाजन की रेखा खींच रहे हैं।

वाल्मिकी समाज ही मैला क्यों ढोए

नगरीय निकायों में वाल्मिकी समाज के सफाईकर्मियों और सामान्य व अन्य वर्गों से भर्ती हुए सफाईकर्मियों के बीच कार्य को लेकर लंबे समय से विवाद चलता आ रहा है।

वाल्मिकी समाज का कहना है कि दूसरे वर्गों से भर्ती होने वाले सफाईकर्मी नौकरी पर लगने के बाद सफाईकार्य नहीं करते हैं।

पैसे और पहुंच का इस्तेमाल कर वह सफाई कार्य से हटकर अन्य कार्यों में लग जाते हैं। ऐसे में मैला ढोने का काम सिर्फ वाल्मिकी समाज ही क्यों करे?

गत वर्ष हुई भर्तियों के बाद भी यह विवाद काफी गर्माया था। अब यह हालत है कि अन्य वर्गों से आए सभी सफाईकर्मचारी अन्य कार्यों में लग गए हैं।
आदेशों की पालना नहीं

स्वायत्त शासन विभाग इस विवाद को खत्म करने के लिए बार-बार आदेश निकालता रहता है, लेकिन नगरीय निकायों की ओर से इसकी पालना नहीं हो रही है।

जिला कलेक्टर की इस टिप्पणी से एक दिन पूर्व ही विभाग के निदेशक एवं संयुक्त सचिव पवन अरोड़ा ने सभी नगरीय निकायों को फिर से आदेश निकाला है कि नगरीय निकायों में कार्यरत सफाईकर्मियों को उनके मूल पद पर ही कार्य कराया जाए।

पूर्व में इस तरह के आदेश 2015, जुलाई 2018 और 2018 में नए सफाईकर्मियों की भर्ती के बाद सितंबर में निकाले गए थे।