Video: महाराणा प्रताप और अकबर दोनों थे महान, जोहर और सती में अंतर नहीं जानते नेता

giriraj sngh lotwada rajput sabha jaipur
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जयपुर।
राजस्थान में सरकार बदलने के बाद पाठ्यक्रम और कवर पेज पर फोटो बदलने को लेकर जारी विवाद के बीच राजपूत समाज के लिए काम करने वाले राजपूत सभा ने कहा है कि सरकारें बदलने के साथ कोर्स बदलने की प्रवृत्ति पर रोक लगनी चाहिए, यह गलत रीति है।

https://youtu.be/c0vK3Dwyq2Y

राजपूत सभा के अध्यक्ष गिर्राज सिंह लोटवाड़ा ने नेशनल दुनिया के साथ बातचीत करते हुए बताया कि राजनीतिक फायदे के लिए इस तरह के काम करना ही सरकारों का काम रह गया है, जबकि असल मुद्दे तो विकास के होने चाहिए।

लोटवाड़ा ने कहा कि महाराणा प्रताप और अकबर दोनों ही अपनी अपनी जगह महान थे। एक बादशाह अपने राष्ट्र का विकास करने में जुटा हुआ था, जबकि दूसरा अपनी रियासत की स्वतंत्रता को कायम रखने के लिए लड़ रहा था। इसलिए यह विवाद का विषय है ही नहीं।

https://youtu.be/V1nW6FfRusM

बाहरी नहीं था अकबर

लोटवाड़ा ने कहा कि किसी भी विदेशी नागरिक को आज नागरिकता के लिए 10-15 साल रहने की जरूरत होती है? उसको एक तय समय में नागरिता मिल जाती है।

जबकि अकबर के पिता, दादा और पड़दादा भी भारत के थे। अकबर के पड़दादा को भारत में लोगों ने बुलाया था, वो भारत में बिना बुलाए नहीं आए थे।

https://youtu.be/IgMNoeAUfrk

जाति के राजनेताओं को जेल भेजो

जाति की राजनीति करने वाले नेताओं को आड़े हाथों लेते हुए लोटवाड़ा ने कहा कि जाट—राजपूत, गुर्जर—मीणा जैसे विवाद कभी हुए ही नहीं, यह केवल राजनीति करने वालों का काम है।

उन्होंने कहा कि इस तरह से जाति के आधार पर राजनीति करने वालों को जेल भेज देना चाहिए। विधायक, सांसद या मंत्री सभी जातियों और धर्मों का होता है, किसी जाति विशेष का नहीं।

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https://youtu.be/5qANbs2AebM

जोहर और सती प्रथा में अंतर है

इसके साथ ही एक सवाल के जवाब में लोटवाड़ा ने कहा कि सरकार पाठ्यक्रम के साथ जोहर की फोटो की जगह पर किले की तस्वीर लगा रही है, उनको पता ही नहीं है कि जोहर और सती प्रथा क्या होती है?

लोटवाड़ा ने दावा किया कि सती कोई प्रथा नहीं थी, बल्कि लाखों में से किसी एक महिला में सतीत्व के लिए शक्ति होती थी, जिसके चलते वह अपने मृत पति या पुत्र के लिए उसके साथ जलती अग्नि में खुद को जला दिया करती थी।

https://youtu.be/MRJ3scp9rbY

जोहर एक अलग चीज है। इसको लेकर चित्तौड़गढ़ किले से जोड़कर नहीं देखा जा सकता, बल्कि जैसलमेर और सवाईमाधोपुर के किले में भी जोहर हुआ था। इसके अलावा इसके सैकड़ों उदाहरण हैं।

उन्होंने ​बताया कि जोहर तब होता था, जब युद्ध होता था, पूरा राज्य दुश्मनों की सेनाओं से घिर जाया करता था और स्त्री को अपनी इज्ज्त बचाने के लिए खुद को मिटाना पड़ता था।

लोटवाड़ा ने कहा कि जो लोग ​सरेंडर करते हैं, उसकी प्रक्रिया से बचने और खुद को हमेशा एक शुद्ध स्त्री के तौर पर कायम रखना चाहती थीं, वो महिलाएं आग में कूदकर खुद की अस्मत को बचाया करती थीं।