भाजपा ने छेड़ी विवाहिताओं के लिए आरक्षण की लड़ाई

जयपुर।

आरक्षण को लेकर अब नया विवाद खड़ा हो गया है। राजस्थान में दूसरे राज्यों से आकर विवाह करने वाली लड़कियों को अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के अलावा ओबीसी में भी आरक्षण नहीं दिया जाता है।

इसको लेकर भारतीय जनता पार्टी की तरफ से राज्य सरकार को पत्र लिखकर चेतावनी दी गई है। कहा गया है कि संविधान के नियमानुसार पूरे देश भर में आरक्षण का प्रावधान है और उसी के तहत आरक्षण प्राप्त होता है। पूर्व मंत्री और वर्तमान विधायक प्रताप सिंह सिंघवी ने सीएम गहलोत को पत्र लिखा है।

यह पत्र लिखा है

-अन्य राज्यों से राजस्थान राज्य में विवाहित अनुसूचित जाति/जनजाति/ओबीसी वर्ग की महिलाओं को आरक्षण का लाभ देने बाबत्।

उपरोक्त विषयांतर्गत लेख है कि अन्य राज्यों की आरक्षित वर्ग अनुसूचित जाति/जनजाति/ओबीसी अन्य पिछडे वर्गो की महिलायें जिन्होंने राजस्थान राज्य के आरक्षित वर्ग में ही शादि की है, ये महिलाऐं जन्म व वैवाहिक स्थल दोनों स्थानों में ही आरक्षित वर्ग में आती है।

कानूनी तौर पर एक राज्य से दूसरे राज्य में विवाहित महिलाओं के पति के निवास संबंधि राज्यों का साधारणतः निवास मानते हुऐ भारतीय जन प्रतिनिधि अधिनियम 1950 की धारा 20 के उपबंधों के समान ही मूल निवासी का दर्जा प्राप्त हो जाता है तथा उन्हें राज्य के सभी अधिकार प्राप्त हो जाते है।

आपका ध्यान इस ओर आकृष्ट कर निवेदन है कि एक वर्ष पूर्व इन महिलाओं को राजस्थान का मूल निवासी मानते हुऐ उनके वर्गानुसार आरक्षण का लाभ मिलता था, परंतु अब इन्हें राज्य के सरकारी नौकरियों में आरक्षण के लाभ से वंतिच कर दिया गया और उन्हें प्रवासी की श्रेणी में रख दिया गया।

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जिसके कारण आरक्षित वर्ग की इन महिलाओं को सरकारी नौकरी में अनेक प्रकार की समस्याऐं आ रही है जिन महिलाओं ने सरकारी नौकरी की परिक्षाएं पास कर ली उन्हें नियुक्ति नहीं दी जा रही तथा अनेक महिलाओें को नियुक्ति के बावजूद नौकरी से निकालने के आदेश जारी किये जा रहे है।।

महोदय जब एक राज्य से निकटवर्ती दूसरे राज्य में विवाहित महिला भारतीय जनप्रतिनिधि अधिनियम 1950 की धारा 20 के अनुसार मूल निवासी होने का कानूनी अधिकारी रखती है तथा इस आधार पर अनुसूचित जाति/जनजाति/ओबीसी में विवाहित महिलाओं को राज्य सरकार ने मूल निवासी प्रमाण पत्र जारी कर रखे है तो इन्हें प्रवासी की श्रेणी में रखना संगत नहीं है।

राजस्थान सरकार ने ऐसे ही एक प्रकरण में अधिसुचना दिनांक 21/10/2019 को जारी की जिसके अनुसार अन्य राज्यों पर जन्मी आरक्षित वर्ग की महिलाओं को राज्य के टी.एस.पी. क्षैत्र के पुरूषो सहित विवाह के आधार पर राज्य का सद्धावी निवासी मानते हुऐ आरक्षण का लाभ जारी रखने का फैसला जारी किया है। लेकिन नाॅन टी.एस.पी क्षैत्र के करीब 25 जिलों की महिलाऐं अभी भी दर-दर भटक रही है।

अतः आपसे निवेदन है कि उक्त मामले को गंभीरता से लेते हुऐ अन्य राज्यों से राजस्थान राज्य में विवाहित नाॅन टी.एस.पी. क्षैत्र की इन महिलाओं की सद्धावी निवासी मानते हुऐ आरक्षित वर्गानुसार सरकारी नौकरियों में आरक्षण का लाभ दिलाया जाये तथा जिन महिलाओं की नियुक्तियों को रोका गया है उन्हें शीघ्र बहाल किया जाकर आरक्षित वर्ग की इन पीड़ित महिलाओं को न्याय प्रदान करें।