भाजपा MP से गहलोत ने 17 साल बाद खाली कराया बंगला, मोदी सरकार में बन सकते हैं मंत्री

जयपुर

भाजपा के राज्यसभा सांसद और आदिवासी समुदाय कहे जाने वाले मीणा समाज के सर्वमान्य नेता किरोड़ीलाल मीणा से अशोक गहलोत सरकार ने 17 साल बाद मंत्री का बंगला खाली करवा लिया है।

4 साल खुद, 4 साल पत्नी और 9 साल सांसद

दरअसल, किरोड़ीलाल मीणा को वसुंधरा राजे की पहली सरकार में अस्पताल रोड पर स्थित यह मंत्री वाला बंगला मिला था। तब 4 साल बाद 2007 में उन्होंने इस्तीफा देकर भाजपा छोड़ दी थी।

उसके बाद 2008 से 2013 वाली अशोक गहलोत की दूसरी सरकार में किरोड़ीलाल मीणा की पत्नी गोलमा देवी को यह बंगला मिल गया, किन्तु अंतिम दिनों में उन्होंने भी मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था।

इसके बाद 2009 क लोकसभा चुनाव में किरोड़ीलाल मीणा सांसद बन गए और यही बंगला उनको कंटीन्यू कर दिया गया। किन्तु 2013 के विधानसभा चुनाव के बाद दोनों पति-पत्नी विधायक बन गए और उनको दोनों के लिए यही मंत्री वाला बंगला फिर रेगुलर कर दिया गया।

लेकिन 2018 के विधानसभा चुनाव में उनकी पत्नी हार गईं और वो भी उससे पहले भी भाजपा में शामिल होकर राज्यसभा सांसद बन गए। तभी से दिसम्बर 2018 के बाद सरकार उनसे बंगला खाली कराने पर तुली हुई थी।

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अपने ही दल से नाराज क्यों?

अब शुक्रवार को किरोड़ीलाल मीणा ने आखिरकार 17 साल बाद यह बंगला छोड़ दिया है। किंतु अशोक गहलोत की वर्तमान सरकार पर आरोप लगाया है उनके ऊपर अनैतिक दबाव बनाकर जबरन खाली करवाया गया है।

इसके साथ ही किरोड़ीलाल ने अप्रत्यक्ष रूप से कहा कि वो अपने राज्य नेतृत्व से नाराज हैं। इसके साथ ही उन्होंने ने उम्मीद जताई है कि उनको मोदी की कैबिनेट में आदिवासी कोटे से मंत्री पद जरूर मिलेगा।

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वसुंधरा राजे से दूरियां जग जाहिर हैं

आपको बता दें कि 2007 में गुर्जर आरक्षण आंदोलन के कारण तत्कालीन मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे और उनके ही मंत्रिमंडल में खाद्य नागरिक आपूर्ति मंत्री किरोड़ीलाल मीणा के बीच तलवारें खिंच गई थीं।

बाद में मीणा ने मंत्री और पार्टी से भी इस्तीफा दे दिया था। और फिर राजपा के सदस्य बन गए थे। राजपा से वो 2013 में विधायक भी बने थे। साथ ही दो अन्य विधायक भी जीते थे। जिसमें उनकी पत्नी गोलमा देवी भी जीतीं थीं।

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सीढियां चढ़ने का अंतिम मौका

आपको बता दें कि उम्र के लिहाज से किरोड़ीलाल मीणा की यह अंतिम पारी है। सम्भवतः आखिरी पारी में मीणा केंद्र में मंत्री बनकर अपनी साख बचाना चाहते हैं। इसके साथ ही वसुंधरा जैसी गुजरे जमाने की राजनेता के सहारे अपने भाई जगमोहन मीणा की सियासत चमकाना चाहते हैं।

एक समय ऐसा था, जब राज्य में किरोड़ीलाल मीणा का कद राज्य जातिगत समीकरण के आधार पर भैरोंसिंह शेखावत जैसा कद बनने की ओर था, किन्तु पार्टी छोड़ने की वजह से वो रुतबा हासिल नहीं कर पाए और केवल मीणा समाज के सुप्रीमो बनकर रह गए।

अपनों की चुनौती से चिंतित

अब किरोड़ीलाल को उनके समाज के ही कई युवा नेता चुनौती दे रहे हैं। रमेश मीणा, ओमप्रकाश हुड़ला, पृथ्वीराज मीणा समेत अनेक मीणा नेताओं की चुनौती ने किरोड़ीलाल मीणा को चिंता में डाल दिया है।