वसंधरा सरकार की बड़ी योजना बंद कर गहलोत ने इंदिरा के नाम से दांव खेला

नेशनल दुनिआ, जयपुर।
सरकार बदलने के साथ ही योजनाओं के नाम बदलने का आजकल बदला लेने की तरह हो गया है। कई योजनाओं को बीते डेढ़ साल के दौरान बंद करने और उनके नाम बदलने का काम करने वाली गहलोत सरकार ने वसुंधरा राजे सरकार की एक ओर जनहितैषी योजना का नाम बदल दिया है।

मजेदार बात यह है कि कांग्रेस की हर योजना केवल इंदिरा, राजीव या अधिकतम नेहरू तक की सीमित रह गई हैं। भारत भूमि पर सर्वमान्य और सबको अन्न देने वाली देवी ‘अन्नपूर्णा’ के नाम से वसुंधरा राजे ने सबको भोजना के लिए योजना शुरू की थी, लेकिन यह भी गहलोत को पची नहीं और आखिरकार कोई काम नहीं कर इस योजना का नाम ‘इंदिरा रसोई’ कर अपनी मानसिकता को फिर से प्रदर्शित करने का काम किया है।

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सोमवार को ’कोई भूखा ना सोए’ के संकल्प करते हुए प्रदेश के नगरीय क्षेत्रों में इंदिरा रसोई योजना की शुरूआत की है। इस योजना के तहत जरूरतमंद लोगों को दो समय का शुद्ध पौष्टिक भोजन रियायती दर से उपलब्ध कराया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार इस योजना पर प्रति वर्ष 100 करोड़ रूपये खर्च करेगी। योजना के संचालन में स्थानीय एनजीओ की भागीदारी की जाएगी एवं सूचना प्रौद्योगिकी की सहायता से प्रभावी मॉनिटरिंग होगी।

सीधे तौर पर देखा जाए तो एनजीओ के नाम पर अपने लोगों को लाभ पहुंचाने के लिए एक और रास्ता साफ कर लिया है। इस तरह से योजनाओं के नाम बदलने और चहेतों को फायदा पहुंचाने का गहलोत बीते 22 साल से काम कर रहे हैं।

यह भी पढ़ें :  गृह मंत्री अमित शाह कोरोनावायरस पॉजिटिव, मेदांता अस्पताल में भर्ती

गहलोत मुख्यमंत्री निवास पर वीडियो कॉन्फ्र्रेंस के माध्यम से राज्य स्तरीय कोविड-19 जागरूकता अभियान की वर्चुअल लॉन्चिंग को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग द्वारा तैयार पांच तरह के जागरूकता पोस्टर, ऑडियो जिंगल तथा जागरूकता वीडियोज की लॉन्चिंग की। उन्होंने राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन तथा यूएनएफपीए द्वारा जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से तैयार की गई पांच मोबाइल वैन को भी हरी झंडी दिखाई।

मजेदार बात यह है कि उन्होंने अपने पोस्टरों में ही साफ कर दिया है कि कोविड से लड़ने के लिए सरकार की कोई जिम्मेदारी नहीं होगी, जनता अपना ख्याल खुद रखें का स्लोगन ही सरकार की पतली हालत को दर्शाता है।

अभियान की लॉन्चिंग के दौरान लोगों ने प्रदेश की करीब 11 हजार 500 लोकेशन्स से वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए मुख्यमंत्री का संदेश सुना। जिला प्रभारी मंत्री, सांसद, विधायक प्रभारी सचिव, जिला कलेक्टर एवं अन्य जिला स्तरीय अधिकारी जिलों से वर्चुअल लॉन्चिंग कार्यक्रम में शामिल हुए।

साथ ही प्रदेश स्तर पर गठित कोर ग्रुप एवं क्वारेंटीन समितियों के सदस्य, पुलिस एवं प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य, ऊर्जा, जलदाय, कृषि एवं पशुपालन विभाग के अधिकारी-कर्मचारी, उपखण्ड अधिकारी, बीडीओ, सरपंच, पटवारी, ग्राम विकास अधिकारी, ग्राम स्तरीय कोर कमेटी के सदस्य, मीडिया के प्रतिनिधि भी वीडियो कॉन्फ्रंेस के माध्यम से जुड़े।

कार्यक्रम को फेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम, यू-ट्यूब सहित अन्य डिजिटल माध्यमों पर लाइव प्रसारित किया गया। इसमें मजेदार बात यह है कि सरकार खुद ही भाजपा से करीब 3 महीने पीछे चल रही है। भाजपा जिस डिजिटल माध्यम को बीते 3 माह से धड़ल्ले से अपना रही है, सरकार उसको अब शुरू कर रही है।

यह भी पढ़ें :  कोरोना वायरस के नाम से भाग गए आरयूएचएस के डॉक्टर-स्टाफ, जयपुर का है मामला

अभियान लॉन्च करने के बाद मुख्यमंत्री ने कहा कि कोरोना महामारी अभी खत्म नहीं हुई है, इसलिए सभी को आत्म अनुशासन और संयम बरतते हुए आपस में दो गज की दूरी, मास्क पहनने, नियमित अंतराल पर हाथ धोने और सार्वजनिक स्थानों पर नहीं थूकने के मूल मंत्र का लगातार पालन करना होगा।

wp 1592884281168गहलोत ने कहा कि कोरोना से डरने की जरूरत नहीं है, लेकिन सावधानी रखना आवश्यक है। किसी तरह की लापरवाही समस्या को और नहीं बढाए इसी उद्देश्य से प्रदेश भर में दस दिवसीय यह जागरूकता अभियान शुरू किया गया है। इस अभियान के तहत आमजन को कोरोना से बचाव के बारे में जानकारी दी जाएगी।

गहलोत सरकार के इस बयान पर चुटकी लेते हुए भाजपाध्यक्ष डॉ. सतीश पूनियां, जो कि बीते तीन माह से डिजिटल माध्यम के द्वारा प्रदेश के एक लाख से ज्यादा लोगों से सीधा संवाद कर चुके हैं, ने कहा कि सरकार ने लोगों को अपने भरोसे छोड़ दिया है, अब लोग खुद ही खुद का ध्यान रखें, सरकार अपना ध्यान रख रही है।

गहलोत ने कहा कि गांव-ढाणी तक यह संदेश पहुंचाया जाएगा कि खुद के स्वास्थ्य का खुद ख्याल रखना ही कोरोना से बचने का मुख्य उपाय है। हमारा लक्ष्य है कि रिकवरी रेट बढ़ती रहे, मृत्यु दर घटती रहे।

गहलोत ने कहा कि हमारी सरकार ने धर्मगुरूओं, चिकित्सकों, राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों, सिविल सोसायटी, उद्यमियों सहित सभी वर्गों को विश्वास में लेकर कोरोना को नियंत्रित रखने में सफलता हासिल की है। तीन महीने पहले प्रदेश में कोरोना टेस्ट की सुविधा नहीं थी, लेकिन आज हमने प्रतिदिन 25 हजार टेस्ट करने की क्षमता विकसित कर ली है।

यह भी पढ़ें :  20 करोड़ महिलाओं को 3 महीने तक 500-500 रुपये मिलेंगे

संकट की इस घड़ी में पड़ोसी राज्यों को भी हमने अपने यहां जांच कराने की पेशकश की है। हमारी सरकार ने आपदा की इस घड़ी को प्रदेश के स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने के अवसर के रूप में लिया है।

देश में जहां प्रति दस लाख की आबादी पर 4887 टेस्टिंग हो रही है, वहीं राजस्थान में यह 8389 है। राष्ट्रीय औसत 3.28 प्रतिशत की तुलना में हमारे यहां कोरोना से मृत्यु दर केवल 2.32 प्रतिशत ही है।

देश में जहां कोरोना से रिकवरी रेट 54 प्रतिशत है वहीं राजस्थान में यह 78 प्रतिशत है, जो यह दर्शाता है कि इस महामारी से निपटने के लिए राजस्थान के चिकित्सकों, नर्सिंग समुदाय सहित तमाम कोरोना वॉरियर्स ने किस समर्पण भाव एवं जज्बे से काम किया है।