7 अगस्त 2008 को बीजिंग में क्या समझौता हुआ था कांग्रेस और चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के बीच?

नई दिल्ली।

भारत और चीन के दरमियान केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख की गलवान घाटी में युद्ध की संभावनाओं के बीच एक बार फिर से 7 अगस्त 2008 को बीजिंग में भारत की कांग्रेस पार्टी और चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के बीच जो समझौता हुआ, वो सुर्खियों में है।

बीजिंग में अगस्त 2008 में हुए ओलंपिक खेलों के दौरान भारत की तरफ से चीन के द्वारा अधिकारिक तौर पर तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, महासचिव राहुल गांधी, उनकी बहन प्रियंका वाड्रा, प्रियंका वाड्रा के पति रॉबर्ट वाड्रा और उनके दो बच्चे चीन के सरकारी मेहमान के तौर पर बुलाया गया था।

यहां पर ओलंपिक खेलों के आगाज के लिए दुनिया भर के बड़े नेताओं को बुलाया गया था। अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश भी उसी भव्य समारोह के अतिथि थे। चीन के तत्कालीन राष्ट्रपति हू जिंताओ की तरफ से दुनिया के साथ भारत से सोनिया गांधी के परिवार को आमंत्रित किया गया था।

मजेदार बात यह थी कि दुनिया के सबसे बड़े खेल आयोजन के शुभारंभ पर जहां विश्व के अन्य सभी देशों के राष्ट्राध्यक्षों को आमंत्रित किया गया था, वहीं भारत के तत्कालीन राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल या प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के बजाय कांग्रेस की तत्कालीन अध्यक्ष और उनके परिवार को सरकारी मेहमान के तौर पर बीजिंग बुलाया गया था।

बीजिंग ओलंपिक शुरू होने से पहले चीन की कम्युनिस्ट पार्टी और भारत की कांग्रेस पार्टी के बीच एक अहम समझौता हुआ। जिसके तहत भारत और चीन दोनों देशों में से, यह दोनों दल हमेशा एक दूसरे को, एक दूसरे देश के विकास, उसकी उच्च स्तरीय सूचनाएं और तमाम तरह की जानकारियां साझा करेंगे।

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तत्कालीन राष्ट्रपति हू जिंताहु चीन की तरफ से और भारत की कांग्रेस पार्टी की तरफ से अध्यक्ष सोनिया गांधी इस समझौते के दौरान उपस्थित थे। चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के तत्कालीन उपाध्यक्ष, स्टैंडिंग कमेटी के मेंबर व पोलित ब्यूरो शी जिनपिंग और भारत की तरफ से कांग्रेस के महासचिव राहुल गांधी के बीच एमओयू पर हस्ताक्षर हुए।

बीजिंग ओलंपिक के शुभारंभ के अवसर पर दुनिया के जिन वीवीआईपी मेहमानों का स्वागत किया गया, उनमें अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश के साथ उसी जगह पर भारत की तरफ से कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, महासचिव राहुल गांधी, उनकी बहन प्रियंका वाड्रा, प्रियंका के पति रॉबर्ट वाड्रा और उनके दो बच्चों का भी भारत के सरकारी मेहमानों की तरह स्वागत किया गया, जबकि इनमें से कोई भी व्यक्ति संवैधानिक पदों पर नहीं थे।

2008 के एमओयू बाद 2012 में जब चीन में हू जिंताओ राष्ट्रपति पद से हटे और शी जिनपिंग राष्ट्रपति बने तो उसके बाद से भी भारत की कांग्रेस पार्टी और चीन की कम्युनिस्ट पार्टी उच्च स्तरीय जानकारियां और सूचनाएं साझा करती रही हैं। इस मामले को लेकर अब कांग्रेस पार्टी देशभर में सवालों से घिरती हुई नजर आ रही है।

इसके अलावा जब भारत और चीन के बीच करीब दो साल पहले डोकलाम में विवाद चल रहा था, तब भी कांग्रेस के अध्यक्ष के तौर पर राहुल गांधी गुपचुप चीन के दूतावास में रात को मिलकर निकले थे, जिसपर भी काफी विवाद हुआ था। पहले कांग्रेस ने इनकार किया और जब सबूत सामने आए तो इसको स्वीकार कर लिया था।

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अब जिस तरह से राहुल गांधी और सोनिया गांधी के द्वारा प्रधानमंत्री और भारत की सरकार से चीन को लेकर उल्टे और देश की सेना पर ही सवाल किए जा रहे हैं, उसके बाद जनता कांग्रेस से सवाल पूछ रही है कि यदि सरकार उच्च स्तरीय और देश की सुरक्षा से जुड़ी हुई जानकारियां गांधी परिवार को देगी, तो क्या वो सभी सूचनाएं चीन नहीं भेजी जाएंगी?

इस बीच भारत के द्वारा स्वतंत्रता प्राप्त करने के बाद नेपाल, ब्लूचिस्तान समेत कई अन्य द्वीप जब भारत में मिलने के लिए तैयार थे, तब नेहरु ने उनको लेने से इनकार कर दिया था, जो आज सभी भारत के लिए नासूर बन गए हैं।

इसी तरह से पहले भारत को संयुक्त राष्ट्र की स्थाई सदस्यता मिल रही थी, जिसको भी नेहरु ने ठुकराकर चीन को सौंप दी। आज चीन ही भारत को यूएन में स्थाई सदस्य नहीं बनने दे रहा है।

इतना ही नहीं, अपितु चीन के द्वारा 1962 में भारत के अक्साई चीन पर हमला कर भारत से छीन लिया, लेकिन 1650 सैनिकों की शहादत, 2000 से ज्यादा सैनिकों के घायल होने और 3000 सैनिकों को आजतक अता—पता नहीं होने के बाद भी नेहरु पीछे हट गए। जिसके कारण भारत का करीब 38000 वर्गकिलोमीटर का क्षेत्र आज भी चीन के कब्जे में है।