पीसीसी चीफ सचिन पायलट का हटना तय! अशोक गहलोत से खींचतान पड़ी भारी

जयपुर

राजस्थान में कोरोना वायरस के लगातार फैलाव के बाद भी राजनीति थमने का नाम नहीं ले रही है। कांग्रेस सूत्रों के अनुसार राज्यसभा चुनाव के वक्त कथित तौर पर पीसीसी अध्यक्ष सचिन पायलट के द्वारा पार्टी तोड़ने की कोशिशों की सजा उनको मिल गई है।

इस सिलसिले में अब कांग्रेस आलाकमान ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए सचिन पायलट की पीसीसी चीफ के पद से छुट्टी करने का महत्वपूर्ण निर्णय ले लिया गया है। उनकी जगह नया पीसीसी चीफ लाने का फैसला कर लिया गया है।

बता दें कि उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट ने 6 साल 5 महीने पीसीसी चीफ रह कर नया रिकॉर्ड जरूर कायम किया है, किन्तु उनकी ऐसे समय में छुट्टी करने का निर्णय लिया गया है, जब उनपर गहलोत खेमे की ओर से आरोपों की बौछार की गई है।

हालांकि, अभी तक आधिकारिक रूप से आलाकमान की ओर से लिखित आदेश जारी नहीं किया गया है, किन्तु अपना कार्यकाल करीब दो बार पूरा करने के कारण उनकी जगह दूसरा अध्यक्ष बनाने का निर्णय ऊपरी स्तर पर हो चुका है।

कांग्रेस सूत्रों का दावा है कि 23 जून को कांग्रेस वर्किंग कमेटी की बैठक के दौरान इस बात के लिए फैसला ले लिया जाएगा कि सचिन पायलट को केंद्रीय नेतृत्व के तौर पर राष्ट्रीय महासचिव या राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाकर राजस्थान से बाहर का रास्ता दिखाया जाए।

इसके साथ ही यह भी चर्चा है कि पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी को 23 जून को कांग्रेस वर्किंग कमेटी की मीटिंग में फिर से राष्ट्रीय अध्यक्ष के पद पर सुशोभित किया जा सकता है। उन्होंने लोकसभा चुनाव में पार्टी की हार स्वीकार करते हुए अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया था।

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इस बीच राजनीतिक जानकारों का कहना है कि अगर सचिन पायलट को राजस्थान कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष पद से हटाया जाता है और केंद्र में महासचिव या उपाध्यक्ष बनाया जाता है, तो आने वाले समय में पार्टी के लिए सचिन पायलट भी ज्योतिरादित्य सिंधिया बन सकते हैं।

वैसे सचिन पायलट और अशोक गहलोत के बीच सियासी खींचतान पिछले 6 साल से लगातार जारी है, लेकिन हर मोर्चे पर अशोक गहलोत भारी पड़ते रहे हैं। एक बार फिर से अशोक गहलोत पीसीसी अध्यक्ष सचिन पायलट को सीधे तौर पर करारी शिकस्त देते हुए नजर आ रहे हैं।

कहा जाता है कि जितनी सचिन पायलट की कुल उम्र है, उतना अशोक गहलोत का राजनीतिक तजुर्बा है। केंद्रीय आलाकमान के इर्द-गिर्द और राजस्थान में भी अशोक गहलोत की लॉबिंग जबरदस्त है। जबकि सचिन पायलट युवा पीढ़ी के होने के नाते पुराने कांग्रेसी उनको अधिक पसंद नहीं करते हैं।

कांग्रेस सूत्रों का कहना है कि जुलाई के पहले सप्ताह अथवा दूसरे सप्ताह में अशोक गहलोत सरकार अपने मंत्रिमंडल का विस्तार करने जा रही है, जिसमें खाद्य नागरिक आपूर्ति मंत्री रमेश मीणा और खुद सचिन पायलट का भी पद जाने की संभावना है।

मंत्री रमेश मीणा पिछले दिनों जब राज्यसभा चुनाव के दौरान पूरी कांग्रेस पार्टी एक निजी रिसोर्ट में बंद थी, तब वहां नहीं गए थे और अपनी नाराजगी खुलकर जाहिर कर दी थी, जिससे अशोक गहलोत और केंद्रीय आलाकमान दोनों नाराज दिखाई दे रहे हैं।

अगर सचिन पायलट को सेंटर में ले जाया जाता है, तो राजस्थान से उनका उपमुख्यमंत्री और पंचायती राज विभाग का मंत्री पद भी जाना तय है। ऐसी स्थिति में राजस्थान कांग्रेस और राजस्थान की सरकार दोनों पर अशोक गहलोत की जबरदस्त पकड़ हो जाएगी, जिससे उनको 2023 तक शासन करने में कोई दिक्कत नहीं आएगी।

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दरअसल दिसंबर 2018 में जब अशोक गहलोत की राजस्थान में सरकार बनी थी, तभी से लेकर अब तक, करीब डेढ़ साल के दौरान उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट हर मोर्चे पर अपनी ही सरकार को आईना दिखाते रहे हैं। जिस तरह से सचिन पायलट सरकार को सवालों के घेरे में रखते हैं, वह अशोक गहलोत को पसंद नहीं है।