इस बार अशोक गहलोत फेल: विधायकों को होटल में बंद करने के बावजूद भी बगावत का दौर जारी है!

जयपुर।

राज्यसभा चुनाव से पहले राजस्थान में भाजपा की ओर से कांग्रेस सरकार गिराने की कोशिशों की खबरों के बीच कांग्रेस सहित निर्दलीय विधायक दिल्ली रोड स्थित एक लग्जरी होटल में हैं, ताकि पार्टी को टूट से बचाया जा सके।

इस बीच एक महत्वपूर्ण खबर गया आई है कि इस पूरे प्रकरण की जानकारी लेने के लिए कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने पार्टी नेता दीपेंद्र हुड्डा को अचानक जयपुर भेजा गया है।

बताया जा रहा है कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने विधायकों की बाड़ाबंदी के मामले में उपमुख्यमंत्री एवं प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सचिन पायलट को अलग-थलग किया हुआ है और यह बात पार्टी आलाकमान तक पहुंच चुकी है।

कुछ विधायकों की ओर से पार्टी आलाकमान तक यह संदेश पहुंचाया गया है कि सरकार होते हुए अपनी ही पार्टी के विधायकों की इस तरह से बाड़ाबंदी की गई है तथा उनके पार्टी के प्रति निष्ठा संदिग्ध रूप से देखा जा रहा है और प्रदेश में हो रही चर्चाओं का पार्टी को ही नुकसान हो सकता है।

इस बीच शनिवार को राजस्थान के उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट दिल्ली चले गए हैं। दीपेंद्र हुड्डा के जयपुर आने और उसके बाद सचिन पायलट के दिल्ली जाने को लेकर सरगर्मियां बढ़ सकती है।

पायलट दिल्ली पहुंचते ही सीधे अपने आवास पर पहुंचे। बताया जा रहा है कि वह दिल्ली में राहुल गांधी से मुलाकात कर सकते हैं।

वही 2 दिन जयपुर में रुकने के बाद राजस्थान से कांग्रेस की ओर से राज्यसभा उम्मीदवार बनाए गए और कांग्रेस के राष्ट्रीय संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल दिल्ली लौट गए हैं। अविनाश पांडे और सह प्रभारी जयपुर में मौजूद हैं।

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दरअसल इस पूरे प्रकरण को लेकर जिस तरह से मीडिया में खबरें आ रही है और उसके बाद आम जनता में जो चर्चाएं हो रही हैं, वो पार्टी के लिए चिंताजनक है कि अभी तक कांग्रेस की ओर से भाजपा पर हॉर्स ट्रेडिंग के आरोप की सच्चाई 4 दिन बाद भी सामने नहीं आई है।

इस बीच शनिवार को रिसोर्ट में मौजूद विधायकों की 12:00 बजे से लेकर 1:30 बजे तक कार्यशाला राज्यसभा चुनाव के लिए कांग्रेस पर्यवेक्षक और मीडिया प्रमुख रणदीप सुरजेवाला की अध्यक्षता में हुई।

इस कार्यशाला के बाद सुरजेवाला भी चार्टर्ड विमान से चंडीगढ़ चले गए हैं। दूसरी ओर कांग्रेस निर्दलीय बीटीपी और राष्ट्रीय लोकदल के विधायक बाड़ाबंदी में पहुंच चुके हैं।

बताया जा रहा है कि माकपा भी कांग्रेस के प्रत्याशी को ही मतदान करेगी, लेकिन पार्टी का समर्थन पत्र 16 जून को विधायक दल की बैठक के बाद ही दिया जाएगा।

इधर, विधायकों की बाड़ाबंदी में खुद मुख्यमंत्री अशोक गहलोत दो रात रिसोर्ट चुके हैं। उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट और पर्यटन मंत्री विश्वेंद्र सिंह दिन में रिसोर्ट में रहने के बाद रात को वापस आ जाते हैं।

मंत्री लालचंद कटारिया, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री रमेश मीणा, विधायक भरत सिंह रिसोर्ट में नहीं आए हैं। विधायक परसराम मोरदिया का अभी हाल ही में बड़ा ऑपरेशन हुआ है इसके कारण उन्हें घर पर रहने की इजाजत दी गई है।

विधायक रामनारायण मीणा घरेलू कार्यक्रम में शामिल होने के चलते कोटा गए हुए हैं, वह 16 जून को वापस लौट आएंगे। मंत्री मास्टर भंवरलाल मेघवाल अस्पताल में भर्ती होने के कारण नहीं आ सकते हैं और विधायक वाजिद अली भी ऑस्ट्रेलिया में हैं।

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जानकारी के अनुसार कांग्रेस ने मास्टर भंवर लाल मेघवाल को लेकर चुनाव आयोग से राय भी मांगी है कि अस्पताल में भर्ती रहने के दौरान उनका मतदान कैसे कराया जा सकता है।

इस सारे मामले को लेकर भारतीय जनता पार्टी की तरफ से कांग्रेस पर तगड़ा हमला बोला गया है। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष डॉ सतीश पूनिया ने एक बार फिर से अशोक गहलोत की सरकार को पूरी तरह से नाकाम और विफल करार देते हुए चुनौती दी है कि जिस तरह से उन्होंने बीजेपी के द्वारा विधायकों के खरीदे जाने की बात कही है, उसके सबूत पेश करें अन्यथा उनके लिए लीगल कार्रवाई के सारे द्वार खुले हुए हैं।

इधर, सरकार के मुख्य सचेतक महेश जोशी के द्वारा एसओजी को पत्र लिखे जाने के कारण मामला और गरम हो गया है।

पार्टी के पास 124 विधायकों का समर्थन हासिल बताया जा रहा है, लेकिन दो विधायक उम्मीदवारों के लिए केवल 102 विधायक चाहिए, बावजूद इसके पूरी सरकार एक होटल में कैद है, जिसके कारण अशोक गहलोत की रणनीति पर कई सवाल खड़े हो रहे हैं।

ऐसा माना जा रहा है कि जादूगर कहे जाने वाले अशोक गहलोत पहली बार चुनकर विधानसभा पहुंचे भाजपा के अध्यक्ष डॉ सतीश पूनिया की रणनीति में फंस गए हैं। यही कारण है कि अपने विधायकों को अशोक गहलोत एक पल भी ढीला छोड़ना नहीं चाहते हैं।