सचिन पायलट होंगे गृहमंत्री, इनपर टिकी है कांग्रेस की गहलोत सरकार की इज्जत.

जयपुर।

राजस्थान में 3 राज्यसभा सीटों के लिए आने वाली 19 जून को मतदान होना है। और इसी दिन राज्य के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत सरकार की इज्जत भी टिकी हुई है।

मध्य प्रदेश, कर्नाटक और गुजरात की ट्रेन राज्य में भी कांग्रेस के विधायक काफी हलचल में हैं।

राज्य में पिछले 5 दिन से राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत अपनी पार्टी के विधायकों को लेकर काफी चिंतित नजर आ रहे हैं। बुधवार को मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने इसी चिंता में राज्य के कांग्रेसी विधायकों की एक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बैठक बुलाई है।

इस बैठक में राज्य कांग्रेस के कथित तौर पर 106 विधायकों में से हैं काफी सारे विधायक अनुपस्थित रहे। इस अनुपस्थिति को लेकर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और कांग्रेस पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष सचिन पायलट भी चिंता में नजर आए।

हालांकि, जिस चिंता को लेकर राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत हैं, उससे कम चिंतित राज्य कांग्रेस के अध्यक्ष सचिन पायलट हैं।

बताया जा रहा है कि जिस तरह से मध्य प्रदेश में ज्योतिरादित्य सिंधिया के द्वारा पार्टी बदलने का काम किया गया है ठीक उसी तरह से राज्य में भी कांग्रेस अध्यक्ष सचिन पायलट के द्वारा कोई बड़ा राजनीतिक खेल किया जा सकता है।

राजस्थान के विधायक भरत सिंह और पृथ्वीराज मीणा के द्वारा जिस तरह से पार्टी के खिलाफ खिलाफत करते हुए बयानबाजी की गई है, उससे स्पष्ट तौर पर समझा जा सकता है कि राज्य में कथित तौर पर राज्यसभा चुनाव के दौरान क्रॉस वोटिंग की जाती है।

हालांकि राजस्थान की अशोक गहलोत सरकार के पास सो विधायक खुद कांग्रेस पार्टी के हैं जबकि छह विधायक बहुजन समाज पार्टी के शामिल होकर कांग्रेस में आए हैं।

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ऐसे में स्पष्ट तौर पर 106 विधायक कांग्रेस सरकार के पास हैं। इसके अलावा 13 विधायक ऐसे हैं, जिन्होंने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को सरकार में रहने के दौरान, या सरकार से बाहर रहने के दौरान समर्थन देने का ऐलान किया हुआ है।

हालांकि सूत्रों का दावा है कि भारतीय जनता पार्टी के द्वारा जिस तरह से कर्नाटक मध्य प्रदेश और गुजरात में कांग्रेस के भीतर अंतर्कलह का फायदा लेते हुए पार्टी के विधायकों को तोड़ने का काम किया गया है, वही स्थिति राजस्थान में भी होने वाली है।

कई विधायकों ने स्पष्ट तौर पर बुधवार को मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कहा है कि राज्य भाजपा के द्वारा उनसे संपर्क किया गया है और विभिन्न प्रकार के लालच उनको दिए गए हैं।

मुख्यमंत्री कार्यालय के सूत्रों के मुताबिक बुधवार को दूसरी बार राज्य के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को राज्य कांग्रेस के कई विधायकों के द्वारा बहुत साफ कह दिया गया है कि राज्य में उनके काम नहीं हो रहे हैं और इसका फायदा लेते हुए भारतीय जनता पार्टी उनसे संपर्क बनाए हुए हैं।

ऐसे में राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष सचिन पायलट के लिए मुश्किलें खड़ी हो सकती हैं।

हालांकि, सूत्रों का यह भी दावा है की उप मुख्यमंत्री और कांग्रेस अध्यक्ष सचिन पायलट खुद भी भाजपा के संपर्क में हैं। जिन पार्टी पदाधिकारियों और दल के विधायकों के ऊपर कांग्रेसी नजर हैं, उनमें प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष सचिन पायलट के अलावा पर्यटन मंत्री विश्वेंद्र सिंह टोडाभीम से विधायक पृथ्वीराज मीणा और भरत सिंह के ऊपर टिकी हुई हैं।

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ऐसे में देखना बेहद दिलचस्प होगा की 19 जून को होने वाले राज्य के तीन राज्यसभा सीटों के लिए कांग्रेस पार्टी, जो कि सत्तारूढ़ और भारतीय जनता पार्टी जो कि विपक्ष में है, उनके बीच किस तरह से मुकाबला होता है?

राजनैतिक तौर पर माना जा रहा है, कि यदि कांग्रेस पार्टी के मूल 100 विधायकों और बसपा के 6 विधायकों में से किसी भी विधायक के द्वारा भारतीय जनता पार्टी के पक्ष में वोट किया जाता है, तो यह राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष सचिन पायलट की मूल रूप से हार होगी।