डॉ. सतीश पूनियां ने नहीं मानी वसुंधरा की पसंद, धौलपुर महल की राजनीति का ‘चक्रव्यूह’ ध्वस्त

-धौलपुर की राजनीति पहली बार महल के चक्रव्यूह से बाहर, डॉ. सतीश पूनियां ने संघ पृष्ठभूमि के श्रवण वर्मा को बनाया जिला अध्यक्ष

जयपुर।

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष डॉ. सतीश पूनियां ने धौलपुर का जिला अध्यक्ष बनाने में पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे की पंसद के नाम को दरकिनार कर संघ से जुड़े श्रवण वर्मा को जिला अध्यक्ष की कमान सौंपी है।

सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक वसुंधरा ने अपनी पसंद का एक नाम जो भेजा था, उसे प्रदेश नेतृत्व ने स्वीकार नहीं किया। यह पूनियां की बड़ी जीत और वसुंधरा की तीसरी हार मानी जा रही है।

अब सियासी गलियारों में यह चर्चा कि धौलपुर की राजनीति लंबे अरसे बाद महल से बाहर निकली है। कहने का मतलब धौलपुर की राजनीति का चक्रव्यूह ध्वस्त हो गया है।

अब देखना होगा कि संघनिष्ठ भाजपा प्रदेश अध्यक्ष डॉ. सतीश पूनियां की पसंद श्रवण वर्मा जिलाध्यक्ष बनने के बाद किस तरह वहां पार्टी को मजबूत कर पाते हैं, या उनके सामने हथियार डाल देते हैं।

देखना बेहद दिलचस्प होगा कि जिलाध्यक्ष वर्मा कैसे वसुंधरा राजे खेमे से चुनौती ले पाते हैं? कैसी उनकी जिले की टीम होगी? यह सब बातें भविष्य के गर्भ में छिपी हैं।

उल्लेखनीय है कि लंबे समय से धौलपुर में भाजपा का जिला अध्यक्ष वसुंधरा राजे की पसंद के ही बनते थे, लेकिन पहली बार उनकी पसंद को नहीं माना गया।

जिससे ये साफ संकेत मिल रहे हैं कि पार्टी के केन्द्रीय नेतृत्व ने वसुंधरा राजे जैसी कद्दावर नेत्री को जिस तरह से प्रदेश में हाशिये पर धकेलकर नई पीढ़ी को सत्ता की ओर बढ़ा दिया है।

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केन्द्रीय नेतृत्व के नक्शेकदम पर चलते हुए प्रदेश अध्यक्ष डॉ. पूनियां ने धौलपुर जिला अध्यक्ष बनाने में वसुंधरा की पसंद के व्यक्ति को नहीं मानकर धौलपुर की राजनीति को महल से बाहर निकालकर श्रवण वर्मा को जिला अध्यक्ष बनाकर पार्टी को मजबूत करने की दिशा में बड़ा फैसला लिया है।


अब देखना यह भी काफी रोचक होगा कि नए नवेले जिलाध्यक्ष श्रवण वर्मा किस तरह से धौलपुर में सभी भाजपाइयों को साथ लेकर पार्टी को जिले में किस तरह मजबूत कर पाते हैं।

उल्लेखनीय है कि इससे पहले भी अन्य जिलों के जिला अध्यक्ष बनाने में भी पार्टी के प्रति समर्पित एवं कर्मठ नेताओं को ही तवज्जो दी गई, जो वसुंधरा की हार के तौर पर देखा जा रहा है।