लॉक डाउन में डिजिटल हो गए प्रदेश के ये बड़े नेता

-सबसे ज्यादा सक्रिय रहे भाजपा अध्यक्ष डॉ सतीश पूनिया

नेशनल दुनिया, जयपुर।

कोविड-19 के वैश्विक महामारी के चलते भारत में 24 मार्च की रात 12:00 बजे अचानक से केवल 4 घंटे की पूर्व सूचना के बाद लॉक डाउन कर दिया गया।

नतीजा यह हुआ कि पूरे देश भर में लोग जहां थे, वहीं रह गए। बड़े पैमाने पर प्रवासी श्रमिक अपने घर नहीं पहुंच पाए और बाद में कुछ संगठनों के द्वारा और कुछ चुनिंदा मीडिया संस्थानों के द्वारा विवाद पैदा किया गया और प्रवासी श्रमिकों को केंद्र सरकार और राज्य सरकारों ने घर पहुंचाने का काम किया।

लॉक डाउन के चलते 2 महीने से अधिक समय तक सभी नेता भी अपने घरों तक सीमित हो गया। जो नेता रोजाना मीडिया की सुर्खियां बटोरते थे और टेलीविजन में बयान और बाइट देकर हमेशा समाचारों में बने रहते थे, वह सब अपने घरों में कैद हो गए।

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से लेकर विपक्ष में भाजपा की जिम्मेदारी संभाल रहे पार्टी अध्यक्ष डॉ सतीश पूनिया भी अन्य नेताओं को तरह जनता से नहीं मिलने की मजबूरी के चलते अपने घर और कार्यालय तक सीमित हो गए।

हालांकि, अधिकांश नेताओं ने इस दौरान कोई गतिविधि नहीं की जिसके कारण मीडिया की सुर्खियों में रहते हैं।

लेकिन राजस्थान में भाजपा अध्यक्ष डॉ सतीश पूनिया के अलावा राज्य के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, चिकित्सा मंत्री रघु शर्मा, नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया, उपनेता प्रतिपक्ष राजेंद्र सिंह राठौड़, सांगानेर से विधायक अशोक लाहोटी समेत कई नेताओं ने डिजिटल प्लेटफॉर्म को अपनी ताकत बनाया।

सरकार में होने के नाते जहां मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने अपने कार्यालय और अपने घर पर बने कार्यालय से शुरुआत में तीन-चार प्रेस कॉन्फ्रेंस करके मीडिया को संबोधित किया, उसके बाद केवल अधिकारियों के साथ बैठकें करते रहे और अधिकांश समय ट्विटर और फेसबुक के जरिए ही मीडिया को बयान देने का कार्य किया।

एक-दो बार उन्होंने प्रदेश के जनप्रतिनिधियों से भी संवाद करने का प्रयास किया, लेकिन यह सिलसिला भी अधिक नहीं चला।

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दूसरी तरफ भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष डॉ सतीश पूनिया ने अपने संगठन को डिजिटल मीडिया के माध्यम से नई ऊंचाई तक पहुंचाने का प्रयास किया।

सतीश पूनिया ने अपने घर और पार्टी कार्यालय पर ही सुबह 10:00 बजे से लेकर देर रात तक पार्टी के तमाम पदाधिकारियों के अलावा केंद्रीय नेताओं से संपर्क बनाया, केंद्रीय मंत्रियों से संपर्क बनाया और विदेश में फंसे भारतीय लोगों को वापस लाने के प्रयास के अलावा केंद्र सरकार के द्वारा राज्य सरकार के साथ तालमेल के बाद सहायता मुहैया करवाने में बड़ी भूमिका निभाई।

आकाशवाणी पर छात्र-छात्राओं की आकाशवाणी से पढ़ाई के लिए स्लॉट दिलाने का कार्य हो या फिर ट्रेन उपलब्ध करवाने का काम हो या इसी तरह से अन्य सहायता मुहैया करवाने का काम हो, डॉ सतीश पूनिया ने केंद्र सरकार के साथ संपर्क साधते हुए राज्य के लिए अथक प्रयास जारी रखे।

यहां तक कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और उनकी सरकार के कई मंत्रियों ने भी डॉ सतीश पूनिया से गुहार लगाकर केंद्र सरकार से सहायता दिलाने की अपील की।

शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह डोटासरा के द्वारा की गई अपील पर उन्होंने केंद्रीय मंत्री को पत्र लिखकर न केवल राज्य सरकार के साथ शिक्षा के क्षेत्र में अद्भुत संवाद स्थापित किया, बल्कि साथ ही पर्यटन मंत्री विश्वेंद्र सिंह के साथ अच्छा संवाद होने के कारण डॉ सतीश पूनिया ने केंद्र सरकार के साथ राज्य को सहायता दिलाने में भी अहम रोल अदा किया।

इस दौरान डॉ सतीश पूनिया ने पार्टी के प्रदेश पदाधिकारियों, तमाम जिलाधिकारियों, सभी सांसदों, पार्टी के विधायकों, पूर्व विधायकों और जिन्होंने विधायक और सांसद का चुनाव लड़ा था, ऐसे पूर्व जनप्रतिनिधियों से संवाद स्थापित करते हुए केंद्र सरकार की सहायक योजनाओं का प्रचार प्रसार करते हुए संगठन को डिजिटल माध्यम से मजबूती प्रदान करने का कार्य किया।

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ट्विटर और फेसबुक के जरिए उन्होंने जनता से संवाद स्थापित किया, मीडिया के साथ डिजिटल माध्यम से प्रेस कॉन्फ्रेंस की और तमाम तरह के डिजिटल माध्यम को मुश्किल समय मे अवसर उन्होंने अच्छे से बनाने का कार्य किया।

हालांकि इस दौरान टीवी चैनल्स के लिए उनके बयान घर से ही वीडियो रिलीज किए गए, कुछ टीवी चैनल्स ने उनके घर पहुंचकर बाइट लेने का कार्य किया और कुछ ने इंटरव्यू भी लिया।

लेकिन कुल मिलाकर देखा जाए तो इस लॉक डाउन के दौरान डॉ सतीश पूनिया ने डिजिटल प्लेटफॉर्म को अपनी ताकत बनाते हुए फुल फॉर्म में सक्रिय रहे।

इसी तरह से अपने बयानों को लेकर चर्चित रहने वाले सांगानेर के विधायक अशोक लाहोटी ने तबलीगी जमात के लोगों कि राज्य सरकार द्वारा की गई सेवा और राज्य सरकार के द्वारा समय पर गरीबों को राशन मुहैया नहीं करवाए जाने को लेकर भी डिजिटल मीडिया का उपयोग करते हुए अपनी बात जनता तक पहुंचाने का कार्य किया।

नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया ने भले ही 3 प्रेस कॉन्फ्रेंस अटेंड की हों, लेकिन उन्होंने भी मीडिया के लिए प्रेस नोट जारी करने का और टीवी के लिए बाइट देने का कार्य घर बैठे ही किया।

उपनेता प्रतिपक्ष राजेंद्र सिंह राठौड़ ने भी डिजिटल मीडिया का जमकर उपयोग किया।

उन्होंने ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम के अलावा इलेक्ट्रॉनिक चैनल्स को मोबाइल से बाइट बनाकर भेजते हुए सुर्खियों में रहने का पूरा प्रयास किया।

अपनी तरफ से प्रेस नोट जारी करते हुए प्रिंट मीडिया के लिए भी उन्होंने बीच-बीच में खबरें देने का प्रयास किया।

दूसरी तरफ कोविड-19 की वैश्विक महामारी के दौरान चिकित्सा मंत्री रघु शर्मा का रोल सबसे इंपॉर्टेंट था।

उन्होंने भी फेसबुक के जरिए और व्हाट्सएप ग्रुप्स के जरिए न केवल प्रेस नोट जारी किए, बल्कि वीडियो बयान जारी करते हुए भी जनता से संवाद स्थापित बनाए रखने का कार्य किया।

केंद्रीय मंत्रियों की बात की जाए तो सबसे ज्यादा सक्रियता कृषि राज्य मंत्री कैलाश चौधरी ने दिखाई। उन्होंने राजस्थान के मीडिया के साथ लॉक डाउन की अवधि के दौरान 4 मर्तबा प्रेस कॉन्फ्रेंस की।

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इसके साथ ही उन्होंने अनेक मीडिया संस्थानों के लिए लेख भी लिखे और अपने फेसबुक और ट्विटर अकाउंट के जरिए भी जनता से संवाद स्थापित करने का प्रयास करते रहे।

जनशक्ति मंत्री और जोधपुर के सांसद गजेंद्र सिंह शेखावत भी सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहें। हालांकि, उन्होंने राज्य मीडिया के साथ केवल एक बार प्रेस कॉन्फ्रेंस की, लेकिन फेसबुक और ट्विटर के जरिए वह भी सक्रिय रहे।

डिजिटल मीडिया का भरपूर उपयोग करते हुए गजेंद्र सिंह शेखावत ने भी अपने संसदीय क्षेत्र में लोगों से संपर्क साथ रहने का भरपूर प्रयास किया।

अपने बयानों को लेकर सुर्खियों में रहने वाले प्रदेश के पर्यटन मंत्री विश्वेंद्र सिंह में ट्विटर और फेसबुक के जरिए वीडियो डाले और पोस्ट लिखकर भी जनता से संवाद स्थापित करने का प्रयास किया।

हालांकि, बीच-बीच में उनके बयान राज्य सरकार के लिए मुसीबत भरे रहे, लेकिन उन्होंने भी डिजिटल मीडिया को लेकर सक्रियता दिखाई।

कुल मिलाकर निष्कर्ष निकाला जाए तो प्रदेश के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, चिकित्सा मंत्री रघु शर्मा ने सरकार में होने के कारण मजबूरन सक्रियता दिखाई, तो दूसरी ओर विपक्ष में होने के बावजूद भाजपा अध्यक्ष डॉ सतीश पूनिया ने डिजिटल मीडिया का सर्वाधिक और सफलतम प्रयोग किया।

सतीश पूनिया ने हमेशा सोशल मीडिया पर सक्रियता दिखाई और पार्टी के पदाधिकारियों के अलावा कार्यकर्ताओं और आम जनता के साथ भी संवाद स्थापित करने में कोई कमी नहीं रखी।

कुल मिलाकर देखा जाए तो 60 दिन से अधिक समय का यह मुश्किल पीरियड भी राज्य के कुछ नेताओं के लिए कोई रुकावट नहीं बना।

उन्होंने पहले की तरह ही पूरी सक्रियता दिखाते हुए मीडिया, पार्टी के पदाधिकारियों, कार्यकर्ताओं और आम जनता के साथ संवाद स्थापित करते रहने की कोशिश जारी रखी।