महात्मा गांधी अस्पताल द्वारा कोरोनावायरस की टेस्टिंग के साथ इतना खिलवाड़ क्यों हो रहा है?

– टेस्ट ही मुख्य आधार है कोरोनावायरस के उपचार का और अगर टेस्टिंग का सैंपल कलेक्शन ही गलत है तो रिपोर्ट कैसे सही हो सकती है?

– प्रतिष्ठित अखबार “राष्ट्रदूत” ने महात्मा गांधी अस्पताल की खोली पोल

राजस्थान के प्रतिष्ठित अखबार राष्ट्रदूत ने लिखा है राजस्थान में कोरोनावायरस की टेस्टिंग को लेकर गैरकानूनी सैंपल कलेक्शन सेंटर चलाने का मामला सामने आया है।

अजमेर रोड पर स्थित लैब जिसे ने तो कोरोनावायरस के सैंपल एकत्रित करने की अनुमति प्राप्त है और ना ही कोरोना की जांच के लिए टेस्ट रिपोर्ट जारी करने की अनुमति प्राप्त है, वह लैब ने केवल कोरोना की जांच रिपोर्ट जारी कर रही है, बल्कि महात्मा गांधी अस्पताल मेडिकल कॉलेज और अस्पताल के लिए कोरोनावायरस के सैंपल एकत्रित करने के लिए कलेक्शन सेंटर होने का दावा भी कर रही है।

अजमेर रोड के पास हीरापुरा में स्थित एम जेनिक्स डायग्नोस्टिक लैब को ने तो आईसीएमआर द्वारा कोरोना की टेस्टिंग के लिए स्वीकृत किया गया है और ना ही इसे कलेक्शन सेंटर घोषित किया गया है, परंतु फिर भी यहां कई लोगों के लिए कोरोना की जांच के सैम्पल एकत्रित कर उनकी जांच रिपोर्ट दी जा रही है।

जबकि सूत्रों से इस बारे में जानकारी प्राप्त हुई एक कर्मचारी को इस लैब में टेस्ट कराने के लिए भेजा गया गत शुक्रवार को ऐसे लैब से महात्मा गांधी मेडिकल कॉलेज और अस्पताल के साथ जुड़ी सेंट्रल की एक रिपोर्ट राष्ट्रदूत अखबार के कर्मचारी को दी गई।

गौरतलब है कि महात्मा गांधी की सेंट्रल लैब को आईसीएमआर ने को रोना की टेस्टिंग की अनुमति दे रखी है। आईसीएमआर ने प्रदेश में महात्मा गांधी अस्पताल के अलावा कहीं और कलेक्शन सेंटर बनाने की अनुमति नहीं दी है।

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राष्ट्रदूत में लिखा है, इस मामले को और स्पष्ट रूप से समझने के लिए पाठकों को बता दें कि आईसीएमआर द्वारा प्रदेश में कुछ सरकारी अस्पतालों और उनके साथ जुड़ी लैब के साथ कुछ प्राइवेट लैब को भी कोरोना की टेस्टिंग अनुमति दी गई है।

अखबार ने आगे लिखा है कि, वहीं आईसीएमआर से अनुमति प्राप्त करने के बाद प्राइवेट लाइव स्कोर स्थानीय प्रशासन को भी पत्र लिखकर टेस्टिंग प्रक्रिया शुरू करने के लिए अनुमति प्राप्त करनी होती है इसके बाद यदि राज्य सरकार चाहे तो खुद कुछ सैंपल इन लेबर में टेस्टिंग के लिए भेज सकती है।

केंद्र सरकार द्वारा 21 मार्च को गाइडलाइन जारी की गई थी जिसके अनुसार कोरोनावायरस की जांच के लिए टेस्टिंग करने के लिए लैब को नेशनल एक्रीडिडेशन बोर्ड फॉर टेस्टिंग एंड कैलिब्रेशन लैबोरेट्रीज द्वारा प्रमाणित होना चाहिए, आरटीपीसीआर मरीज में टेस्ट करने के लिए।

यहां उल्लेखनीय है कि एनएबीएल केवल एक लाइफ से जुड़े कलेक्शन सेंटर को ही प्रमाणित कर सकता है। नेशनल कॉमंस ऑफ क्लीनिकल इसलेनियर्मेंट ने अपनी 11 वीं बैठक में यही निष्कर्ष दिया था कि एक रजिस्टर्ड मेडिकल लैब के साथ जुड़ी सैंपल कलेक्शन सेंटर को तभी प्रमाणित किया जा सकता है, जबकि इसमें कानूनी तौर पर न्यूनतम मापदंडों की पालना की गई हो।

अखबार ने लिखा है कि यहां पर यह भी उल्लेखनीय है कि आईसीएमआर कि वेबसाइट के अनुसार प्रदेश में केवल एसएमएस अस्पताल जयपुर, एसएमएस मेडिकल कॉलेज जोधपुर, आरटीएन मेडिकल कॉलेज उदयपुर, एसपी मेडिकल कॉलेज बीकानेर, झालावाड़ कॉलेज और एम्स जोधपुर को कलेक्शन सेंटर के रूप में की अनुमति दी गई है, यानी कि केवल अस्पतालों की इन्हीं सरकारी लैब में जांच करने के लिए सैंपल एकत्रित किए जा सकते हैं।

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इस विषय पर जयपुर के चीफ मेडिकल एंड हेल्थ ऑफिसर के दफ्तर में कार्यरत एक शिक्षा अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि इन सभी अस्पतालों में आईसीएमआर द्वारा प्रमाणित लैब से जुड़े कलेक्शन सेंटर को ही कोरोना के सैंपल रखने की अनुमति है। राज्य सरकार ने भी किसी अन्य लेखों कलेक्शन सेंटर बनाने की अनुमति नहीं दी है।

जब एम जेनिक्स डायग्नोस्टिक में इस विषय को लेकर अंकित नंबर पर राष्ट्रदूत अखबार की तरफ से फोन किया गया तो एक शालिनी नाम की महिला ने उठाया।

पूछे जाने पर कि उनकी लैब ने महात्मा गांधी की लैब में जारी रिपोर्ट कैसे दी है, तो उन्होंने कहा कि एम जनिक्स डायग्नोस्टिक का महात्मा गांधी अस्पताल के साथ अनुबंध है और क्यों की आईसीएमआर ने महात्मा गांधी अस्पताल को ऐसा करने की अनुमति दी है, इसलिए हम यहां से सारे सैंपल नहीं भेजते हैं।

यहां गौरतलब है कि आईसीएमआर ने ऐसी कोई गाइडलाइन जारी नहीं की है, जिसके तहत एक कोरोना के टेस्टिंग के लिए प्रदर्शित लाइव किसी दूसरी प्राइवेट लैब को अपनी सुविधा डेलीगेट कर सके या अन्य प्राइवेट लैब से टेस्ट सैंपल एकत्रित कर सकें।

आईसीएमआर की गाइडलाइन भी कोरोना सैंपल कलेक्शन के विषय पर काफी सख्त है। सैंपल कलेक्शन लैब में केवल एक प्रशिक्षित डॉक्टर की देखरेख में ही सैंपल लिया जा सकता है।

इस सैंपल को टेस्टिंग के लिए यदि दूसरी जगह ले जाया जाता है तो नियमानुसार ट्रांसपोर्टिंग कंटेनर के पास ऐसे उपकरण होने चाहिए जो कि सैंपल को 4 डिग्री तापमान पर बनाए रखें।

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अखबार ने लिखा है कि एम जैनिक्स डायग्नोस्टिक को मैं तो एनएबीएबीएल ने प्रमाणित किया है और ना ही आईसीएमआर ने इसे टेस्टिंग और सैंपल लेने की अनुमति दी है।

इस विषय पर कि कैसे महात्मा गांधी मेडिकल कॉलेज में एक अन्य लैब कलेक्शन सेंटर बना रखा है, इस प्राइवेट मेडिकल कॉलेज और अस्पताल के मालिकों में से एक विकास स्वर्णकार ने कहा कि आईसीएमआर ने सैंपल कलेक्शन सेंटर बनाने के विषय में आईसीएमआर की कोई गाइडलाइन नहीं है, इतना ही कहा गया है कि सैंपल कलेक्शन सेपरेट साइट होनी चाहिए।

उन्होंने इस विषय पर राष्ट्रदूत के साथ आईसीएमआर की गाइडलाइन के दस्तावेज की कॉपी भी साझा की। उन्होंने यह भी बताया कि उनके अस्पताल का जयपुर के राजा पार्क में भी कोरोना टेस्टिंग सेंटर है।

एक वरिष्ठ डॉक्टर ने बताया कि आईसीएमआर की गाइड लाइन के अनुसार एक लाइन में कोरोना के सैंपल अलग से रखने की बात की गई है ना कि अन्य प्राइवेट लैब से कलेक्शन सेंटर घोषित करने के ऑर्डर दिए हैं।

उन्होंने राष्ट्रदूत अखबार को आगे कहा कि अगर किसी भी प्राइवेट लैब कलेक्शन सेंटर घोषित किया जाएगा तो प्रदेश में कई प्राइवेट लैब कलेक्शन सेंटर बन जाएंगी।

इस मामले में न केवल गैरकानूनी सैंपल कलेक्शन सेंटर का मुद्दा सामने आया है, परंतु महात्मा गांधी मेडिकल कॉलेज और अस्पताल द्वारा जारी की जा रही कोरोना की रिपोर्ट पर भी सवालों की कई आवाज उठती हैं।