विष्णुदत्त विश्नोई सुसाइड मामले में गहलोत सरकार ने लिया फैसला, जांच एजेंसी ही बदली जाएगी, देखिए कौन करेगा इन्वेस्टिगेशन?

नेशनल दुनिया, जयपुर।

पिछले महीने की 23 तारीख को अपने सरकारी क्वार्टर में पंखे से लटककर सुसाइड करने वाले चुरू जिले के राजगढ़ थाना अधिकारी विष्णुदत्त विश्नोई के मामले में राजस्थान की अशोक गहलोत सरकार ने जांच बदलने का फैसला कर लिया है।

सोमवार को बिश्नोई समाज के लोगों के साथ वन एवं पर्यावरण मंत्री सुखराम विश्नोई ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के साथ उनके सरकारी निवास पर मुलाकात कर जांच सीबीआई से अथवा न्यायिक जांच करवाने की मांग की थी।

सैद्धांतिक तौर पर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के द्वारा इस मामले में सहमति दे दी गई है संभावना है कि आज इस पर फैसला कर लिया जाएगा। यदि सीबीआई जांच करवाई जाएगी, तो इसके लिए आज ही राजस्थान की सरकार सीबीआई को पत्र लिख सकती है।

इससे पहले भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष डॉ सतीश पूनिया, उप नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र सिंह राठौड़ और राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के संयोजक व नागौर से सांसद हनुमान बेनीवाल भी मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को पत्र लिखकर सीबीआई जांच की मांग कर चुके हैं।

हालांकि, राज्य सरकार ने इस मामले की जांच अभी सीआईडी सीबी को सौंप रखी है, लेकिन जो लोग विष्णुदत्त विश्नोई सुसाइड केस की जांच सीबीआई से करवाना चाहते हैं, उनका कहना है कि सीआईडी सीबी निष्पक्ष जांच नहीं कर सकती है।

विश्नोई समाज के साथ मुलाकात के बाद मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सैद्धांतिक तौर पर सीबीआई से या फिर किसी न्यायिक अधिकारी से जांच करवाने के लिए सहमति दे दी है और इसको लेकर आज लिखित आदेश दिए जाने की संभावना है।

उल्लेखनीय है कि विष्णुदत्त विश्नोई के द्वारा सुसाइड किए जाने से पहले दो सुसाइड नोट लिखे गए थे, जिसमें एक चूरू पुलिस अधीक्षक को संबोधित किया गया था और दूसरे सुसाइड नोट में उन्होंने अपने परिवार और अपने माता-पिता को संबोधित किया था।

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उनके द्वारा विभिन्न लोगों के साथ व्हाट्सएप और मैसेज के जरिए जो चैट की गई थी, उसमें उन्होंने स्पष्ट तौर पर स्थानीय विधायक के बकवास होने और अधिकारियों के कमजोर होने की बात कही गई थी। साथ ही थाने के निर्माण पर उनके ऊपर 5 करोड़ में से 3.5 करोड़ रुपए के गबन का आरोप भी लगाए जाने की बात कही गई थी।

इस बीच सोशल मीडिया पर एक कैंपेन के जरिए सीबीआई जांच की मांग और स्थानीय विधायक कृष्णा पूनिया के खिलाफ निष्पक्ष जांच बिठाई जाने के लिए मामला सीबीआई को सौंपने की वकालत की जा रही है।

राजगढ़ विधायक कृष्णा पूनिया बयान देकर स्पष्ट कर चुकी हैं कि इस प्रकरण की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए, ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके।