राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में टिड्डी की बर्बादी का कहर, गहलोत सरकार पूरी तरह फैल

नेशनल दुनिया, जयपुर/भोपाल/लखनऊ।

पाकिस्तान के पख्तून और बलूचिस्तान से मुल्तान के रास्ते राजस्थान के बाड़मेर, जैसलमेर, जोधपुर, नागौर, सीकर, जयपुर, दोसा, बस्सी होते हुए मध्यप्रदेश के मंदसौर समेत पूरे मालवा और उत्तर प्रदेश के 11 जिलों में करोड़ो टिड्डीयों ने किसानों की फसलों को बर्बाद कर दिया है

राजस्थान में पिछले साल भी टिड्डी ने बड़ा आतंक मचाया था। केंद्र सरकार की मदद से तब बाड़मेर, जोधपुर, जैसलमेर इलाके में टिड्डी को नियंत्रित करने के लिए बड़े पैमाने पर अभियान चलाया गया था। जहां पर किसानों की फसलें बर्बाद हुई, वहां पर गिरदावरी भी करवाई गई थी लेकिन राज्य सरकार ने किसी भी किसान को मुआवजा नहीं दिया।

इस बार पाकिस्तान से आने वाला टिड्डी दल केवल पश्चिमी राजस्थान में ही नहीं ठहरा, बल्कि 35 साल बाद राजस्थान की राजधानी जयपुर में भी आतंक मचाने में कामयाब रहा। यहां पर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के सिविल लाइन स्थित बंगले के ऊपर भी टिड्डी ने सरकार को जगाने का प्रयास किया।

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मध्य प्रदेश की सरकार ने उठाया कदम उत्तर प्रदेश में भी हाई अलर्ट

मजेदार बात यह है कि खुद को संवेदनशील सरकार कहने वाली राजस्थान की अशोक गहलोत सरकार टिड्डी को नियंत्रित करने में पूरी तरह से विफल हुई, तो दूसरी तरफ मामा की सरकार, यानी मध्यप्रदेश के शिवराज सिंह चौहान की सरकार ने तुरंत प्रभाव से टिड्डी को नियंत्रित करने के लिए कई कठोर फैसले लिए।

मध्यप्रदेश के मालवा में टिड्डी ने बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचाया है, तो इसके साथ ही राजस्थान के रास्ते उत्तर प्रदेश पहुंची टिड्डी ने यूपी के 11 जिलों में नुकसान पहुंचाया है, वहां पर योगी आदित्यनाथ की सरकार ने तुरंत प्रभाव से किसानों के लिए कदम उठाया है और टिड्डी को नियंत्रित करने के लिए संसाधन भी मुहैया करवाए हैं।

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राजस्थान के मुख्यमंत्री केवल बातों के संवेदनशील

वैसे तो राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत खुद को मारवाड़ का गांधी कहते हैं, लेकिन हकीकत यह है कि राज्य की सरकार केवल बातें करने में ही संवेदनशील है। किसानों के लिए राज्य सरकार कुछ भी कदम नहीं उठा पा रही है। नतीजा यह हो रहा है कि किसान टिड्डे की मार खुद ही झेल रहा है।

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लाखों किसानों की करोड़ों रुपए की फसलें बर्बाद हो गई

पिछले साल राज्य सरकार के द्वारा जो गिरदावरी करवाई गई थी, उसमें करीब 800 करोड रुपए की फसल बर्बाद होने की बात सामने आई थी। लेकिन आज की तारीख में भी जोधपुर के बालोतरा में किसान सरकारी मुआवजे के इंतजार में हैं, जबकि फसल बीमा योजना के तहत उनसे लगातार किस्त ली जा रही है।

एक बार फिर से अप्रैल के मध्य से शुरू हुआ टिड्डी दल राजस्थान की राजधानी जयपुर से होता हुआ मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश पहुंच गया, लेकिन राज्य सरकार ने अभी तक भी किसानों की बर्बाद हुई फसलों का मुआवजा देने की हिम्मत नहीं जुटाई है। अलबत्ता गिरदावरी तक भी नहीं करवाई गई है, इससे किसानों में गहरा रोष है।

सब कुछ केंद्र सरकार के भरोसे

यदि राज्य सरकार की कार्यप्रणाली की बात की जाए तो मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और उनके कृषि मंत्री लालचंद कटारिया केवल केंद्र सरकार के द्वारा संसाधन मुहैया करवाए जाने के भरोसे बैठे हैं। हकीकत यह है कि केंद्र सरकार के द्वारा बहुत सारे उपकरण और आर्थिक सहायता दी जा चुकी है। बावजूद इसके राज्य सरकार अभी भी किसानों को राहत पहुंचाने में नाकाम रही है।

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