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शुक्रवार, जून 5, 2020

मुख्यमंत्री गहलोत 1951 का “कृषि कीट एवं रोग अधिनियम” ढंग से पढ़ लें: चौधरी

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-टिड्डी समस्या/नियंत्रण पर बोले केंद्रीय मंत्री कैलाश चौधरी

800 ट्रैक्टर किराए पर हम दे रहे, 55 गाड़ियों की व्यवस्था की, ड्रोन के लिए टेंडर निकालकर DGCA से परमिशन ली, NDRF से पैसा और कीटनाशक दिया, यूके से हवाई स्प्रे मशीनें भी मंगवाई, लेकिन कोई मुझे ये बताए कि अशोक गहलोत के नेतृत्व वाली राज्य सरकार क्या झुनझुना बजा रही है?

भाजपा प्रदेश मुख्यालय की ओर से “टिड्डी समस्या और नियंत्रण के लिए प्रयास” विषय पर आयोजित वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग प्रेसवार्ता में कृषि राज्यमंत्री कैलाश चौधरी ने कहा कि केवल प्रधानमंत्री को चिट्ठी लिखने और केंद्र सरकार पर आरोप लगाने के अलावा मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ठीक से पढ़ लें 1951 का “राजस्थान कृषि कीट एवं रोग अधिनियम”

कृषि राज्यमंत्री कैलाश चौधरी ने बताया कि केंद्र सरकार ने आज टिड्डी नियंत्रण के लिए राज्य सरकार को 14 करोड़ रुपए और टिड्डी दल के हमले से किसानों की नष्ट हुई फसलों की मुआवजा राशि 68 करोड़ रुपए का भुगतान कर दिया है, राज्य सरकार इसके क्रियान्वयन को लेकर जल्दी उठाए कदम

नेशनल दुनिया, जयपुर/दिल्ली

केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्यमंत्री कैलाश चौधरी ने शनिवार शाम को राजस्थान भाजपा प्रदेश मुख्यालय की ओर से “टिड्डी समस्या और नियंत्रण के लिए प्रयास” विषय पर आयोजित वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग प्रेसवार्ता को सम्बोधित किया।

इस डिजिटल संवाद में केंद्रीय मंत्री कैलाश चौधरी ने प्रदेश भर के सवांददाताओं से टिड्डी समस्या, नियंत्रण और रोकथाम को लेकर केंद्र सरकार के प्रयासों और केंद्र-राज्य समन्वय से जुड़े हर तरह के सवालों के जवाब दिए।

संवाददाताओं के सवालों के जवाब में केंद्रीय मंत्री कैलाश चौधरी ने केंद्र सरकार की उपलब्धियों और सक्रियता का जिक्र करते हुए राज्य सरकार की निष्क्रियता और विफलताओं पर जमकर तंज कसे।

मुख्यमंत्री गहलोत को दी राजस्थान का कृषि कीट अधिनियम-1951 पढ़ने की सलाह

कृषि राज्यमंत्री कैलाश चौधरी ने कहा कि राजस्थान की जनता इस समय कोरोना महामारी के साथ ही टिड्डी समस्या के रूप में दोहरी मार झेल रही है।

परंतु राज्य की कांग्रेस सरकार धरातल पर कोई काम किए बिना केवल प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर और केंद्र सरकार पर आरोप लगाकर निर्लज्जता के साथ अपने कर्तव्यों की इतिश्री कर रही है।


केंद्रीय मंत्री कैलाश चौधरी ने कहा कि शायद अशोकजी गहलोत यह भूल गए हैं कि कृषि क्षेत्र राज्यसूची का विषय है।

राज्य सरकारें अपने फसल क्षेत्रों में विभिन्न प्रावधानों और उनके द्वारा बनाई गई योजनाओं के अनुसार कीटों को नियंत्रित करती हैं।

राजस्थान की तत्कालीन राज्य सरकार ने “राजस्थान कृषि कीट और रोग अधिनियम-1951” भी लागू किया, जो कीटों और पौधों के रोगों की शुरूआत, प्रसार या पुन: प्रकट होने से रोकने के लिए पारित किया गया।

केंद्रीय मंत्री चौधरी ने आगे कहा कि राजस्थान राज्य में इस अधिनियम के तहत फसलों, पौधों या वृक्षों के लिए हानिकारक कीटों की उत्पति, वृद्धि, पुन: प्रकट होने या रोकथाम के उपाय और प्रयास करना भी आता है।

अधिनियम के भाग II, पैरा 4 (2) के तहत फसलों पर टिड्डी दल का हमला होने पर “राजस्थान कृषि कीट और रोग अधिनियम-1951” के अनुसार – अधिसूचित क्षेत्र में टिड्डी दल का हमला होने का खतरा होने की स्थिति में सम्बंधित जिला कलेक्टर या उसके द्वारा अधिकृत अन्य अधिकारी को इसके नियंत्रण के लिए कार्यवाही करनी होती है।

हर काम केंद्र सरकार ही कर रही है तो राज्य सरकार क्या झुनझुना बजा रही है

केंद्रीय मंत्री कैलाश चौधरी ने राज्य सरकार की निष्क्रियता पर तंज कसते हुए हमला बोला कि केंद्र सरकार ने टिड्डी दल पर कीटनाशक स्प्रे करने के लिए राज्य सरकार को 800 ट्रैक्टर किराए पर लेने का निर्देश दिया है तथा इसके लिए उसे डीजल और किराए के लिए एनडीआरएफ से पर्याप्त धनराशि भी आवंटित कर दी है।

इसके साथ ही हमने ट्रैक्टरों की सहायता के लिए 55 गाड़ियों की भी अतिरिक्त व्यवस्था की है।

कैलाश चौधरी ने बताया कि ऊंचे स्थानों पर बैठी टिड्डी को हवाई स्प्रे से नष्ट करने के लिए इंग्लैंड से हवाई स्प्रे मशीनो का आयात समझौता किया, जोकि वैश्विक लोकडॉउन के कारण रुक गया।

भुगतान सहित इसकी शेष प्रकिया सम्पन्न हो चुकी है। लोकडॉउन में कुछ छूट मिलते ही ये हेलिकॉप्टर शीघ्र ही भारत पहुंचेंगे।

परन्तु तब तक टिड्डी दल को नष्ट करने के लिए कृषि मंत्रालय ने DGCA से ड्रोनों की भी परमिशन ले ली है।

भविष्य में टिड्डी दल के आगमन के प्रति जागरूकता को लेकर नियमित तौर पर एएफओ संगठन के सदस्य देशों की बैठक के साथ टिड्डी नियंत्रण की रणनीति को लेकर समन्वय भी बनाया जा रहा है।

उन्होंने बताया कि आज केंद्र सरकार ने टिड्डी नियंत्रण के लिए राज्य सरकार को 14 करोड़ रुपए और टिड्डी दल के हमले से किसानों की नष्ट हुई फसलों की मुआवजा राशि 68 करोड़ रुपए का भुगतान कर दिया है। राज्य सरकार बिना समय गंवाए इसका शीघ्रता से कार्यान्वन करें।

केंद्रीय मंत्री कैलाश चौधरी ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने तो टिड्डी रोकथाम, नियंत्रण और भविष्य में इसके आगमन और प्रभाव को रोकने के लिए तमाम प्रयास किए और कई प्रभावकारी कदम भी उठाए।

लेकिन कोई मुझे ये बताए कि अशोक गहलोत के नेतृत्व वाली राज्य सरकार क्या केवल झुनझुना ही बजा रही है।

कांग्रेस सरकार केवल प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर और केंद्र सरकार पर आरोप लगाकर निर्लज्जता के साथ अपने कर्तव्यों की इतिश्री कर रही है।

अशोक गहलोत केंद्र पर आरोप लगाने के बजाय धरातल पर कदम उठाए

कृषि राज्यमंत्री कैलाश चौधरी ने बताया कि भारत में 2 लाख वर्ग किलोमीटर से अधिक क्षेत्र रेगिस्तान के अंतर्गत आता है।

टिड्डी चेतावनी संगठन और भारत सरकार के 10 टिड्डी सर्किल कार्यालय में से राजस्थान के जैसलमेर, बीकानेर, फलौदी, बाड़मेर, जालौर, चूरू, नागौर और सूरतगढ़ में तथा गुजरात के पालनपुर और भुज में स्थित हैं।

रेगिस्तानी क्षेत्र में टिड्डी दल के हमला होने पर उसकी निगरानी, सर्वेक्षण और नियंत्रण के लिए जिम्मेदार हैं।

कैलाश चौधरी ने बताया कि टिड्डी नियंत्रण संगठन, मैलाथियान 96% ULV का उपयोग करके रेगिस्तानी क्षेत्रों / बंजर चरागाह भूमि में टिड्डियों के खिलाफ नियंत्रण अभियान चलाता है जो केवल रेगिस्तानी क्षेत्रों के लिए एफएओ द्वारा अनुशंसित है।

राज्यों के अनुरोध पर फसल क्षेत्र में टिड्डी नियंत्रण के लिए 11 कीटनाशकों की सिफारिश को मंजूर किया। फसल क्षेत्रों में नियंत्रण राज्य सरकार द्वारा अनुशंसित कीटनाशकों के साथ किया जाता है।

कृषि राज्यमंत्री चौधरी ने कहा कि अधिसूचित रेगिस्तानी क्षेत्र में मुख्य रूप से लगभग 2 लाख वर्ग किमी का थार का रेगिस्तान शामिल है।

पिछले कई वर्षों में ग्रामीण विकास और सिंचाई सुविधाओं का विस्तार, सड़कों का निर्माण और कृषि क्षेत्र में नई तकनीकों की शुरुआत के परिणामस्वरूप रेगिस्तान और चारागाह भूमि में भी कृषि गतिविधियों में वृद्धि हुई है।

केंद्रीय मंत्री कैलाश चौधरी ने कहा कि पिछले साल केंद्र एवं राज्य सरकारों ने कीटनाशकों और ट्रैक्टरों से़ स्प्रेयर के माध्यम से किसानों की सहायता की थी।

वर्ष 2019-20 के दौरान भारत में बड़े पैमाने पर टिड्डियों का हमला हुआ। इस पर टिड्डी चेतावनी संगठन के कर्मियों ने नियंत्रण अभियान 21 मई 2019 से 17 फरवरी, 2020 तक जारी रखा और कुल 4,03,488 हेक्टेयर क्षेत्र का उपचार किया गया और टिड्डियों को नियंत्रित किया।

वर्तमान टिड्डी को नष्ट करने के साथ केंद्र सरकार भविष्य की योजना पर भी कर रही हैं काम

कैलाश चौधरी ने बताया कि आम तौर पर, मानसून के आगमन के साथ, जून / जुलाई की गर्मियों में प्रजनन के लिए टिड्डी दल पाकिस्तान के रास्ते से भारत के अधिसूचित रेगिस्तानी क्षेत्रों में प्रवेश करता हैं, लेकिन इस वर्ष 11 अप्रैल, 2020 से टिड्डियों के हॉपरों की उपस्थिति दर्ज की गई।

राजस्थान और पंजाब के सीमावर्ती जिलों में 30 अप्रैल से गुलाबी वयस्क हॉपरो (टिड्डी के नवजात शिशुओं) के हमले की सूचना दी गई थी, जिन्हें नियंत्रित किया गया है और नए झुंडों के खिलाफ नियंत्रण अभियान चल रहा है।

उन्होंने कहा कि इसका एक कारण पाकिस्तान में पिछले सीज़न के अनियंत्रित अंडे थे जो लगातार प्रजनन करते हैं।

गुलाबी अपरिपक्व वयस्कों के झुंड ऊंची उड़ान भरते हैं और पाकिस्तान से आने वाली तेज हवाओं के साथ लंबी दूरी तय करते हैं।

इनमें से अधिकांश गुलाबी अपरिपक्व वयस्क रात के समय में पेड़ों पर रहते हैं और ज्यादातर दिन के समय में उड़ते हैं।

टिड्डी नियंत्रण को लेकर एएफओ के सदस्य देशों के साथ हो रही हैं समन्वय बैठकें

कृषि राज्यमंत्री ने कहा कि आगामी सीज़न को देखते हुए टिड्डी की समस्या से निपटने के लिए तेज गति से काम किया जा रहा है।

दक्षिण-पश्चिम एशियाई देशों (अफगानिस्तान, भारत, ईरान और पाकिस्तान) में रेगिस्तान टिड्डियों पर एक उच्च-स्तरीय बैठक 11 मार्च, 2020 को भारत के नई दिल्ली स्थित एफएओ कार्यालय में आयोजित की गई थी।


इस बैठक में खुद मैं (कैलाश चौधरी) शामिल हुआ था। बैठक में लिए गए निर्णय के अनुसार सदस्य देशों के तकनीकी अधिकारियों की आगामी बैठकें प्रत्येक सोमवार को वीसी के माध्यम से आयोजित की गई।

इस तरह अब तक 8 बैठकें आयोजित की जा चुकी हैं। इन बैठकों में तकनीकी जानकारी का आदान-प्रदान किया जाता है।


उन्होंने बताया कि इसी तरह टिड्डी दल की वर्तमान स्थिति, निगरानी और रोकथाम को लेकर तैयारियों की समीक्षा फरवरी और मई 2020 में राज्य कृषि सचिवों और जिला अधिकारियों के साथ सचिवों (कृषि सहयोग और किसान कल्याण) के स्तर पर बैठकें की गई थी और आने वाले सीज़न के लिए पिछले अनुभवों की रणनीति के आधार पर नियंत्रण की रणनीति तैयार की गई।

अंत में कृषि राज्यमंत्री कैलाश चौधरी ने कहा कि वर्तमान में टिड्डी चेतावनी संगठन और केंद्र सरकार की ओर से राज्यों को टिड्डी के पूर्वानुमान के बारे में लगातार अवगत कराया जा रहा है और आवश्यकता अनुसार मदद भी जारी की जा रही है।

टिड्डी नियंत्रण की स्थिति की समीक्षा करने और टिड्डी हमले से निपटने के लिए प्रभावी नियंत्रण सुनिश्चित करने के लिए 06 मई 2020 को आयोजित एक बैठक में कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह जी तोमर के साथ कृषि अधिकारियों को विभिन्न निर्देश दिए।

  1. वर्तमान समय में कोविड -19 महामारी की आपात स्थिति होने के बावजूद 11 अप्रैल 2020 से टिड्डी नियंत्रण कार्यालय काम कर रहे हैं।
  2. 50 स्प्रे उपकरण / वाहनों के साथ जिला प्रशासन और राज्य कृषि विभाग के अधिकारियों के साथ समन्वय बनाते हुए टिड्डी चेतावनी संगठन के कमर्चारी और कृषि मंत्रालय के अधिकारी काम कर रहे हैं।
  3. विभिन्न स्थानों पर तैनात ट्रैक्टरों से स्प्रेयर और फायर-टेंडर वाहनों का उपयोग टिड्डी नियंत्रण में किया जा रहा है। टिड्डी नियंत्रण संगठनों की नियंत्रण क्षमता बढ़ाने के लिए अतिरिक्त उपकरण भी खरीदे जा रहे हैं
  4. अब तक (11.05.2020 तक) राजस्थान के जैसलमेर, श्रीगंगानगर, जोधपुर, बाड़मेर, नागौर जिलों और पंजाब के फाजिल्का जिले में 14,299 हेक्टेयर क्षेत्र में हॉपर और गुलाबी झुंडों को नियंत्रित किया गया है।
  5. वर्तमान में राजस्थान के बाड़मेर, फलोदी (जोधपुर), नागौर, श्रीगंगानगर और अजमेर जिलों में अपरिपक्व गुलाबी टिड्डियों के झुंड सक्रिय हैं। नियंत्रण कार्य सुबह जल्दी शुरू कर दिया जाता है।
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Ram Gopal Jathttps://nationaldunia.com
नेशनल दुनिया संपादक .

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