टिड्डी ने जैसलमेर से जयपुर और मध्य प्रदेश के मंदसौर, उज्जैन, देवास तक मचाया आतंक, ये सावधानी बरतें किसान

नेशनल दुनिया, जयपुर।

पाकिस्तान से आने वाला टिड्डी दल राजस्थान के जैसलमेर, जोधपुर, नागौर, जयपुर होता हुआ मध्य प्रदेश तक पहुंच गया है। टिड्डी दल ने मध्यप्रदेश के मालवा क्षेत्र के कई जिलों में आतंक मचा रखा है।

जानकारी के अनुसार मध्यप्रदेश के मालवा क्षेत्र में टिड्डी दल का प्रवेश हो चुका है। जिसमे मंदसौर, उज्जैन, देवास, हरदा इस क्षेत्र में तथा एक दल टिड्डी दल झाबुआ की तरफ से पूर्व दिशा की ओर बढ़ रहा है।

कृषि विशेषज्ञ रामनारायण चौधरी बताते हैं कि किसान इनकी रोकथाम के लिए निम्न उपाय खुद भी करें, दूसरों को भी आगाह कर सकते हैं-


टिड्डी दल से बचाव हेतु उपाय :
टिड्डी दल समूह में रात्रिकालीन के समय खेतो में रूककर फसलों को नुकसान पहुचाता है। जमीन में लगभग 500 से 1500 अंडे प्रति मादा कीट देकर सुबह उड़ कर के दूसरी चला जाता है।

टिड्डी दल के समूह में लाखों की संख्या होती है, ये जहाँ भी पेड़ पौधों या अन्य वनस्पति दिखाई देती है, उसको खाकर आगे बढ़ जाते हैं।

टिड्डी दल के प्रकोप से बचाव हेतु सभी किसानों को सलाह दी जाती कि अपने स्तर पर अपने गांव में समूह बनाकर खेतों में रात्रिकालीन के समय निगरानी रखें।

यदि टिड्डी दल का प्रकोप होता है तो कृषि विज्ञान केंद्र ग्वालियर के वैज्ञानिकों ने सलाह दी गई है कि किसान इस कीट की सतत् निगरानी रखें। यह कीट किसी भी समय खेतों में आक्रमण कर क्षति पंहुचा सकता है।

शाम 7 बजे से 9 बजे के मध्य यह दल रात्रिकालीन विश्राम के लिए कहीं भी बैठ सकते हैं, जिसकी पहचान एवं जानकारी के लिए स्थानीय स्तर पर दल बनाकर सतत निगरानी रखें।

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जैसे किसी गांव में टिड्डी दल के आक्रमण एवं पहचान की जानकारी मिलती है, तो त्वरित गति से स्थानीय प्रशासन कृषि विभाग, कृषि विज्ञान केंद्र से संपर्क कर जानकारी देवें।

यदि टिडडी दल का प्रकोप हो गया है तो सभी किसान टोली बनाकर विभिन्‍न तरह की परम्परागत उपाय जेसे ढोल, डीजे बजाकर, थाली, टीन के डिब्बे से शोर मचाकर, ट्रैक्टर का सायलेंसर निकालकर चलाकर, ध्वनि विस्तारक यंत्रों के माध्यम से आवाज कर खेतों से भागाया जा सकता है।

यदि शाम के समय टिड्डी दल का प्रकोप हो गया है, तो टिड्डी की विश्राम अवस्था में सुबह 3 बजे से 5 बजे के बीच में तुरंत निम्नलिखित कीटनाशी दवाएं ट्रैक्टर चलित स्प्रे पम्प (पावर स्प्रेयर) स्प्रे करें।

इसमें दवास क्‍लोरोपायरीफास 20 ई.सी. 200 मि.ली. या लेम्डासाईलोयिन 5 ई.सी. 400 मि.ल्री. या डाईफ्लूबेन्जूसन 25 WT 240 ग्राम प्रति है। 500 लीटर पानी में मित्राकर छिड़काव करें।

रासायनिक कीटनाशी प्राउडर फेनबिलरेड 0.4 प्रतिशत 20-25 कि.ग्रा. या क्‍यूनालफ़ास .5 प्रतिशत 25 किग्रा. प्रति है छिड़काव या भुरकाव करें।

यदि टिड्डी दल के आक्रमण हो जाने के बाद यदि कीटनाशी दवा उपलब्ध न हो। इस दशा में ट्रेक्टर चलित (पावर स्प्रेयर) के द्वारा तेज बौछार से भी भगाया जा सकता है।