26 C
Jaipur
शुक्रवार, जून 5, 2020

राजपूत या गुर्जर, कौन थे सम्राट पृथ्वीराज चौहान? पढ़िए यहां

- Advertisement -
- Advertisement -

-महान योद्धा सम्राट पृथ्वीराज चौहान के बारे में फ़िल्म से जानेंगे सच्चा इतिहास?


राजस्थान में दो बड़ी जातियों में वर्तमान में उनकी जाति को लेकर विवाद उठा है। हालांकि, पृथ्वीराज चौहान की कहानियां पढ़ कर पीढ़ियां बड़ी हुई है और उन्हें इतिहासकारों के अनुसार क्षत्रिय राजपूत ही माना जाता है।

लेकिन अब गुर्जर समाज ने पृथ्वीराज चौहान को अपनी जाति का होने का दावा प्रस्तुत कर दिया है। जिसके बाद से अभी तक बेहद सद्भाव एवम् भाईचारे से रहने वाली दोनों जातियों में एक दूसरे के प्रति सद्भाव में कमी आने की आशंका से भी इंकार नहीं किया जा सकता।

श्रीराजपूत करणी सेना के अध्यक्ष महिपाल सिंह मकराना कहते है कि पृथ्वीराज चौहान क्षत्रिय राजपूत थे और हमारा गौरव है गुर्जर समाज इतिहासकारों को झूठा साबित करना चाहते है जो किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

वहीं गुर्जर समाज के नेता हिम्मत सिंह गुर्जर कहते है की कर्नल टोड ने गलत इतिहास लिखा है, इतिहास में वर्णन है कि उनके पिता गुर्जर थे।

मंगलवार को पृथ्वीराज चौहान की जयंती दोनों समाज अपने अपने हिसाब से मना रहे हैं। अभी कुछ दिनों पहले करणी सेना ने इसी विषय पर बन रही फिल्म पृथ्वीराज का विरोध गलत तथ्यों पर फिल्म बनाने पर किया था।

इस विवाद से इतर इस बात से कोई भी इंकार नहीं कर सकता कि पृथ्वीराज चौहान सभी जातियों के लिए बेहद सम्मानित शक्सियत हैं। यशस्वी वीर सम्राट और प्रेमी थे पृथ्वीराज चौहान।

इतिहास में वे एकमात्र सम्राट थे, जिनका साम्राज्य जितना बड़ा था, उतना ही उनके बारे में इतिहास मौन है। खामोश है। बहुत कम जानकारी दर्ज है।

अब लेकिन देशवासियों को जो चीज़ किताबें ना दे सकी, वो एक फिल्म देगी। फिल्म का नाम है ‘पृथ्वीराज’। जिसे 50 से अधिक सुपर हिट फिल्मों का जनक यशराज फिल्म्स का बैनर बना रहा है।

कहानी रची है निष्णात लेखक-निर्देशक डॉ चन्द्रप्रकाश द्विवेदी (चाणक्य, पिंजर, जेड प्लस वाले) ने। सम्राट की कहानी में तीरंदाजी है, तलवारबाजी है, घुड़सवारी है। एक साहस है। एक प्रेम है। स्वयंवर है।

दरवाजे पर लगी सम्राट की प्रतिमा को अपना पति मानकर वरमाला पहनाने वाली प्रेमिका संयोगिता है। युद्ध है। धोखा है और फिर शब्दभेदी बाण है जो अर्जुन के बाद चंद्रगुप्त और फ़िर पृथ्वीराज ने चलाया था।

सम्राट की उम्र लगभग 26 से 29 वर्ष थी। वे लम्बे नहीं जिए, लेकिन खूब जिए। उनकी राज्य की सीमायें दक्षिण में गुजरात और उत्तर में अफगान-कश्मीर तक थीं।

एक डंका था, जो ईरान अफगान से लेकर बिहार बंगाल तक बजता था। राजधानी अजमेर थी और अरावली के माथे की गढ़ बीठली चोटी पर आसमां में तारों से बातें करता तारागढ़ किला था।

इस फिल्म की शूटिन्ग राजस्थान में हो रही थी, लेकिन अजमेर में कोई शूटिंग प्लान नहीं है। जबकि लोगों का कहना है कि फिल्म की थोड़ी सी शूटिंग तो अजमेर में भी होनी ही चाहिए।

अजमेर से जब जयपुर-दिल्ली-आगरा की तरफ जाते हैं तो एक जगह है घूघरा घाटी। यह घाटी असल में पृथ्वीराज के प्रेम की निशानी है।

वे जब अपनी प्रेमिका संयोगिता को कन्नौज से अजमेर ला रहे थे तो सन्योगिता के पैर का एक घून्घरू (राजस्थानी में घूघरा) दौड़ते हुए घोड़े पर से इस घाटी में गिर गया था। इसलिये इस घाटी का नाम पड़ा घूघरा घाटी।

आधुनिक युग में लोकतंत्र आया। सरकारें आईं, लेकिन किसी ने प्रेम की इस निशानी के बारे में नहीं सोचा कि एक बोर्ड ही वहां लगा देते इस कहानी के नाम।

इतिहासकारों के अनुसार 1192-93 के आस पास अफगानी सुल्तान मुहम्मद गौरी ने भारत पर आक्रमण किया और 16 बार वो पृथ्वीराज के हाथों मार और मात खाया।

17वीं बार 1193 (तराइन का मैदान दिल्ली के पास) में उसे कामयाबी मिली और वो सम्राट को बन्धक बनाकर अन्धा करने में कामयाब हुआ।

लेकिन अन्धा होने पर भी सम्राट पृथ्वीराज ने अपने मित्र चन्दरवरदाई की मदद से शब्दभेदी बाण (4 बांस 24 गज अंगुल अष्ट प्रमाण तां ऊपर सुल्तान है मत चूके चौहान) चलाकर गौरी को मौत की नीन्द सुला दिया। हालांकि, वे खुद भी बच ना सके, क्योंकि दुश्मन की पकड़ में थे।

उनके साथ ही राजस्थान से उनका परिवार भी छिन्न भिन्न हो गया। आज भी तराइन (हरियाणा) और दिल्ली के भीतर और आस पास के गांवों में चौहान राजपूत रहते हैं।

क्योंकि उनके साथ गए सैनिक फ़िर वापस नहीं लौटे या तो युद्ध में शहीद हुए या बचे तो फ़िर वहीं बस गए। इन गांवों में रह रहे उनके वंशज आज भी अपना खानदानी सिलसिला पृथ्वीराज से बताते हैं।

दुख की बात है कि ऐसे वीर पराक्रमी सम्राट की याद में सरकारों ने किसी विश्विद्यालय, स्टेडियम, हवाई अड्डे, अस्पताल का नामकरण नहीं किया।

यह फिल्म सम्राट को सच्ची श्रद्धांजलि साबित होगी। नई पीढ़ी जिसको अधकचरा और अधूरा इतिहास पढ़ाया गया वो जान सकेगी, कि वो किन पूर्वजों की संतान है।

ऐसे पूर्वज कि आज भी पाकिस्तान में लाहौर-पेशावर और अफगानिस्तान में काबुल तक के बुजुर्ग जानते हैं कि कौन थे ‘सम्राट पृथ्वीराज चौहान’ ……

- Advertisement -
Ram Gopal Jathttps://nationaldunia.com
नेशनल दुनिया संपादक .

Latest news

मुख्यमंत्री गहलोत भाजपा आपको क्यों अस्थिर करेगी, झगड़ा तो आपके घर में है: डॉ. सतीश पूनियां

-दिव्यांग विद्यार्थियों को विशेष शिक्षक उपलब्ध कराने की मांग को लेकर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने मुख्यमंत्री को लिखा पत्र
- Advertisement -

प्रदेश के सभी 46,543 गांवों की आबादी का ड्रोन सर्वे से तैयार होगा रिकॉर्ड एवं मानचित्र

नेशनल दुनिया, जयपुर। राजस्थान प्रदेश के समस्त 46,543 गांवों की आबादी का ड्रोन के माध्यम से सर्वे...

विष्णुदत्त विश्नोई आत्महत्या मामले की होगी सीबीआई जांच, अशोक गहलोत सरकार ने लगाई मुहर

नेशनल दुनिया, जयपुर। राजस्थान के अशोक गहलोत सरकार ने आखिरकार चूरू के राजगढ़ थाना अधिकारी विष्णुदत्त विश्नोई आत्महत्या मामले...

मैंने आत्महत्या करने की सोच लिया था, लगा बालकॉनी से कूद जाऊंगा : उथप्पा

नई दिल्ली। टी-20 विश्व कप जीतने वाली भारतीय क्रिकेट टीम के हिस्सा रहे विकेटकीपर बल्लेबाज रोबिन उथप्पा ने खुलासा किया है कि साल 2009 से...

Related news

मुख्यमंत्री गहलोत भाजपा आपको क्यों अस्थिर करेगी, झगड़ा तो आपके घर में है: डॉ. सतीश पूनियां

-दिव्यांग विद्यार्थियों को विशेष शिक्षक उपलब्ध कराने की मांग को लेकर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने मुख्यमंत्री को लिखा पत्र

प्रदेश के सभी 46,543 गांवों की आबादी का ड्रोन सर्वे से तैयार होगा रिकॉर्ड एवं मानचित्र

नेशनल दुनिया, जयपुर। राजस्थान प्रदेश के समस्त 46,543 गांवों की आबादी का ड्रोन के माध्यम से सर्वे...

विष्णुदत्त विश्नोई आत्महत्या मामले की होगी सीबीआई जांच, अशोक गहलोत सरकार ने लगाई मुहर

नेशनल दुनिया, जयपुर। राजस्थान के अशोक गहलोत सरकार ने आखिरकार चूरू के राजगढ़ थाना अधिकारी विष्णुदत्त विश्नोई आत्महत्या मामले...

मैंने आत्महत्या करने की सोच लिया था, लगा बालकॉनी से कूद जाऊंगा : उथप्पा

नई दिल्ली। टी-20 विश्व कप जीतने वाली भारतीय क्रिकेट टीम के हिस्सा रहे विकेटकीपर बल्लेबाज रोबिन उथप्पा ने खुलासा किया है कि साल 2009 से...
- Advertisement -