एमएसपी खरीद में राजस्थान सरकार फेल, किसान बेहाल

नेशनल दुनिया, जयपुर।

किसानों से एमएसपी पर चना समेत अन्य उत्पाद खरीद में राजस्थान सरकार पूरी तरह से फेल हो गई है। इसके चलते प्रदेश के किसान बेहाल हो रहे हैं। सरकारी खरीद नहीं होने के कारण प्रदेश के किसानों का चना, गेहूं, सरसों, जौ बाहर पड़ा खराब होने की स्थिति में पहुंच गया है।

सरकार के अधिकारी इस मामले को लेकर संतुष्टि पूर्ण जवाब नहीं दे रहे हैं, जबकि 1 दिन पहले ही सहकारिता मंत्री उदयलाल आंजना के द्वारा बयान जारी करके कहा गया था कि चना खरीद के लिए 10% अतिरिक्त भंडार बढ़ाया गया है और इसकी शुरुआत आज सुबह 9 बजे से होनी थी।

14 मई से राजस्थान में चना खरीद के लिए 10% अतिरिक्त व्यवस्था किए जाने के बयान के उलट ईमित्र से चना खरीद के लिए सरकारी वेबसाइट पर पंजीकरण नहीं हो पा रहा है, जिसके चलते किसानों का चना खुले में पड़ा हुआ है और बरसात के कारण खराब होने की स्थिति में पहुंच चुका है।

इससे पहले 13 मई को ही प्रदेश के सहकारिता मंत्री उदयलाल आंजना की तरफ से एक लिखित बयान जारी करते हुए कहा गया था कि किसानों के चना खरीद के लिए 10% अतिरिक्त व्यवस्था की गई है, ताकि बचे हुए किसान भी अपना उत्पादन सरकारी खरीद पर बेच सके।

राजस्थान की राजधानी जयपुर के आसपास जिसमें सांगानेर, फागी, चाकसू, दूदू, इसके अलावा भीलवाड़ा के तमाम चना केंद्र जहां पर खरीद होती है, वहां पर व्यवस्था नहीं होने का हवाला देते हुए सरकारी वेबसाइट पर पंजीकरण नहीं किया जा रहा है।

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इस बाबत जब किसान सरकारी अधिकारियों से बात करते हैं तो उनका कहना है कि सहकारिता मंत्री उदयलाल आंजना को इस बात की जानकारी नहीं है कि चना खरीद की व्यवस्था कैसे होती है। जिम्मेदार अधिकारियों का तो यहां तक कहना है कि सरकारी वेबसाइट है चल जाए तो ठीक, नहीं चले तो ठीक।

आपको बता दें कि लॉक डाउन से पहले 19 मार्च तक जिन किसानों ने चना बेचने के लिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन करवाया था, उनका ही उत्पादन सरकार के द्वारा खरीदा जा रहा है उसके बाद ई-मित्र बंद हो गए थे और जब खुले तब से रजिस्ट्रेशन हो ही नहीं रहा है।

क्योंकि मार्च के महीने में चना उत्पादन का पीक सीजन होता है तब तक बहुत कम संख्या में किसान चना मंडी हो तक ले जाने में सफल होते हैं। इसी दौरान गेहूं व सरसों समेत तमाम फसलों को किसान मंडी में बेचने का काम करता है, जिसके चलते वह अपना सारा उत्पादन विक्रय नहीं कर पाता है।

तकरीबन आधे मार्च के बाद सरकारी पंजीकरण नहीं होने के कारण अब किसान काफी परेशान हो रहे हैं और सरकारी कर्मचारियों व अधिकारियों के यहां पर गुहार लगा रहे हैं। लेकिन सहकारिता मंत्री उदयलाल आंजना के बयान के उलट जिम्मेदार अधिकारियों का कहना है कि किसान बहुत चालाक हो गया है और जैसे ही वेबसाइट खुलती है, तुरंत रजिस्ट्रेशन करवाते हैं। इसलिए दूसरे किसानों का रजिस्ट्रेशन नहीं हो रहा है।

किसान अब यह नहीं समझ पा रहे हैं कि सहकारिता मंत्री उदयलाल आंजना का लिखित बयान चना खरीद के लिए सही है, अथवा जो जिम्मेदार अधिकारी व कर्मचारी उनको बता रहे हैं, वह सही है? ऐसी स्थिति में आंधी, बरसात और तूफान के चलते खुले में पड़ा किसानों का चना खराब होने की स्थिति में पहुंच गया है।

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यह केवल चना खरीद को लेकर ही नहीं है, अपितु गेहूं, जो, सरसो समेत तमाम उत्पादन विक्रय करने के लिए किसान सरकार की वेबसाइट पर पंजीकरण नहीं कर पा रहा है, जिसके चलते किसानों की 6 महीने की मेहनत बेकार होने की स्थिति में जा रही है।

उल्लेखनीय है कि मंडियों पर 2% कृषक कल्याण को शुल्क लगाए जाने के बाद प्रदेश की 247 मंडियों में आढ़तियों ने काम बंद कर रखा है। इसके चलते किसानों का उत्पादन आढ़तिये भी नहीं खरीद पा रहे हैं। उनका उत्पादन मंडियों में पड़ा हुआ है।

एक तरफ जहां किसान सरकारी अव्यवस्थाओं के कारण परेशान और लाचार हैं, तो दूसरी तरफ मौसम की मार के चलते किसानों का उत्पादन खराब होने की हालत में पहुंच गया है। पहले से ही कर्ज में दबे किसानों के लिए राम और राज दोनों नाराज नजर आ रहे हैं।